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‘दृश्यम’ फिल्म देख पत्नी की हत्या!: ग्वालिन बाई हत्याकांड में पति-प्रेमी को उम्रकैद, ऐसे लगाई थी लाश ठिकाने
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: कबीरधाम ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 07:50 AM IST
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सार
कबीरधाम के ग्वालिन बाई हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। पति लुकेश साहू और प्रेमी राजाराम साहू को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दोनों पर लाखों का जुर्माना भी कोर्ट की ओर से लगाया गया है।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के बहुचर्चित ग्वालिन बाई हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मृतका के पति लुकेश साहू और उसके प्रेमी राजाराम साहू को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अपर सत्र न्यायाधीश गीतेश कुमार कौशिक की अदालत ने दोनों को हत्या, अपहरण और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाया।
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यह मामला थाना सहसपुर लोहारा क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, ग्राम कल्याणपुर निवासी ग्वालिन बाई साहू (28) की शादी ग्राम चिमागोंदी निवासी लुकेश साहू से हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं। पारिवारिक विवाद के कारण पति-पत्नी अलग रह रहे थे। ग्वालिन बाई बच्चों के साथ मायके में रहती थी और भरण-पोषण का मामला कोर्ट में चल रहा था।
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इसी दौरान ग्वालिन बाई का संबंध राजाराम साहू से हो गया। वे दोनों कवर्धा में किराए के मकान में रहने लगे थे। पुलिस जांच में सामने आया कि महिला दोनों आरोपियों पर पैसों को लेकर दबाव बना रही थी। इससे परेशान होकर दोनों ने उसकी हत्या की योजना बनाई।
'दृश्यम' फिल्म से प्रेरित होकर बनाई योजना
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने हिंदी फिल्म 'दृश्यम' देखकर हत्या और शव ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी। उनका मकसद पुलिस तक कोई सुराग न पहुंचने देना था। राजाराम ने फिल्म चार बार और लुकेश ने एक बार देखी थी। 19 जुलाई 2024 को राजाराम ग्वालिन बाई को स्कूटी से घानीखुंटा घाट के जंगल ले गया। कुछ देर बाद लुकेश भी वहां पहुंच गया। दोनों ने मिलकर साड़ी से गला दबाकर ग्वालिन बाई की हत्या कर दी।
शव को ठिकाना लगाना
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को करीब 100 फीट गहरी खाई में दफना दिया। उन्होंने मृतका की स्कूटी और मोबाइल कर्रा नाला बैराज में फेंक दिए, जबकि गहनों को छिपा दिया था। करीब 23 दिन बाद मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों से पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पूछताछ में दोनों ने अपराध कबूल किया और उनकी निशानदेही पर शव बरामद हुआ। अदालत ने अपराध को गंभीर और सुनियोजित बताया, लेकिन मृत्युदंड के बजाय उम्रकैद को उचित माना।