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Chhattisgarh News: कांकेर का ऐतिहासिक नरहरदेव खेल मैदान बना गौठान, खिलाड़ी और नागरिक परेशान
अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 08 Oct 2025 03:36 PM IST
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सार
स्थानीय लोगों ने बताया कि हर दिन सैकड़ों मवेशी मैदान में जमा होकर गोबर और अन्य गंदगी फैलाते हैं। इससे न केवल खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हो रहा है, बल्कि मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक करने वाले नागरिक भी परेशान हैं।
कांकेर का ऐतिहासिक नरहरदेव खेल मैदान बना गौठान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कांकेर शहर के हृदयस्थल में स्थित शासकीय नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का ऐतिहासिक खेल मैदान अब मवेशियों का ठिकाना बन चुका है। कभी जहां युवा खिलाड़ी क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल और अन्य खेलों का अभ्यास करते थे, आज वही मैदान गोबर और गंदगी से भरा गौठान बन गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हर दिन सैकड़ों मवेशी मैदान में जमा होकर गोबर और अन्य गंदगी फैलाते हैं। इससे न केवल खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हो रहा है, बल्कि मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक करने वाले नागरिक भी परेशान हैं। मैदान में जमा गंदे नाले का पानी और दुर्गंध स्थिति को और विकराल बना रहा है। कांकेर का यह मैदान शहर का एकमात्र बड़ा खेल मैदान है, जहां सभी प्रमुख खेल आयोजित होते थे। अब हालात यह हैं कि खेलने के लिए न तो जगह बची है और न ही सुरक्षित वातावरण। कई खेल आयोजन स्थगित हो चुके हैं और खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने पड़ रहे हैं।
सड़क और मैदान दोनों पर खतरा
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि मवेशी कभी खेल मैदान में और कभी सड़कों पर भटकते देखे जा रहे हैं। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। मैदान में बैठे मवेशी बच्चों और खिलाड़ियों के लिए भी खतरा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का कहना है कि यह समस्या महीनों से जारी है, लेकिन नगर पालिका और जिला प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जनता पूछ रही है कि कब तक प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करता रहेगा।
जनता की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि ऐसे पशु मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं। साथ ही, खेल मैदान की तत्काल सफाई कराकर इसे खिलाड़ियों और आम जनता के लिए पुनः उपयोगी बनाया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि कांकेर जैसे उभरते शहर में खेल मैदान ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो युवा प्रतिभाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा। प्रशासन से उम्मीद है कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता में लेकर जल्द ही आवश्यक कदम उठाएगा।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि हर दिन सैकड़ों मवेशी मैदान में जमा होकर गोबर और अन्य गंदगी फैलाते हैं। इससे न केवल खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हो रहा है, बल्कि मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक करने वाले नागरिक भी परेशान हैं। मैदान में जमा गंदे नाले का पानी और दुर्गंध स्थिति को और विकराल बना रहा है। कांकेर का यह मैदान शहर का एकमात्र बड़ा खेल मैदान है, जहां सभी प्रमुख खेल आयोजित होते थे। अब हालात यह हैं कि खेलने के लिए न तो जगह बची है और न ही सुरक्षित वातावरण। कई खेल आयोजन स्थगित हो चुके हैं और खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने पड़ रहे हैं।
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सड़क और मैदान दोनों पर खतरा
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि मवेशी कभी खेल मैदान में और कभी सड़कों पर भटकते देखे जा रहे हैं। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। मैदान में बैठे मवेशी बच्चों और खिलाड़ियों के लिए भी खतरा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का कहना है कि यह समस्या महीनों से जारी है, लेकिन नगर पालिका और जिला प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जनता पूछ रही है कि कब तक प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करता रहेगा।
जनता की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि ऐसे पशु मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं। साथ ही, खेल मैदान की तत्काल सफाई कराकर इसे खिलाड़ियों और आम जनता के लिए पुनः उपयोगी बनाया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि कांकेर जैसे उभरते शहर में खेल मैदान ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो युवा प्रतिभाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा। प्रशासन से उम्मीद है कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता में लेकर जल्द ही आवश्यक कदम उठाएगा।