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मातम में बदलीं खुशियां: ओझा परिवार में 16 साल बाद जुड़वां बच्चों ने लिया था जन्म, एक की मौत, लापरवाही का आरोप
Sun, 19 Jul 2026 01:22 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2026 01:22 PM IST
सार
कोरबा में शादी के लगभग 16 साल बाद ओझा परिवार में खुशियों की दस्तक हुई थी, लेकिन वह खुशी चंद दिनों में मातम में बदल गई। आयुष्मान चिकित्सालय शारदा विहार में जन्मे जुड़वा बच्चों में से एक की मौत हो गई।
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विस्तार
कोरबा में शादी के लगभग 16 साल बाद ओझा परिवार में खुशियों की दस्तक हुई थी, लेकिन वह खुशी चंद दिनों में मातम में बदल गई। आयुष्मान चिकित्सालय शारदा विहार में जन्मे जुड़वा बच्चों में से एक की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समय रहते बच्चे को बेहतर इलाज के लिए रेफर नहीं किया गया। जहा जमकर हंगामा हुआ।इसकी सूचना पुलिस को भी दी गई जहा मौके पर पहुची।
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परशुराम नगर दादर निवासी शशिकांत ओझा की पत्नी ने 17 जुलाई को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। लंबे इंतजार के बाद घर में दो नन्हे मेहमान आने से पूरा परिवार खुश था। दोनों बच्चों का वजन भी सामान्य था। लेकिन जन्म के कुछ घंटे बाद ही एक बच्चे के शरीर पर पीलिया के लक्षण दिखने लगे। परिजनों ने तुरंत इसकी जानकारी ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों को दी।
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परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद चिकित्सकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और कहा कि हम लोग हैं ना, घबराइए मत। इसके बाद बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई। जब स्थिति ज्यादा खराब हुई तो परिजनों के दबाव में आकर अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को रेफर किया। आनन-फानन में बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
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ओझा परिवार का कहना है कि अगर समय रहते बच्चे को उचित इलाज के लिए बड़े अस्पताल भेज दिया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने और मरीजों की गंभीरता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। परिजन चाहते हैं कि मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नवजात की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पीलिया के लक्षण दिखते ही उचित उपचार शुरू किया गया था। स्थिति गंभीर होने पर ही बच्चे को रेफर किया गया। हालांकि परिजन इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं।
एक ओर जहां 15 साल बाद घर में जुड़वा बच्चों के जन्म से खुशी का माहौल था, वहीं एक बच्चे की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। इस घटना के बाद इलाके में अस्पतालों की व्यवस्था और नवजातों के इलाज को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल परिजनों ने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही है। वहीं पुलिस का कहना है कि यदि परिजन लिखित शिकायत देंगे तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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