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कोरबा: विद्युत सहायक अभियंता 50,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, नाश्ता-पानी के नाम पर मांगी थी घूस
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 07:25 PM IST
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सार
कोरबा में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की बिलासपुर इकाई ने कोरबा जिले के दीपका में बिजली विभाग के सहायक अभियंता सत्येंद्र दिवाकर को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
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विस्तार
कोरबा में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की बिलासपुर इकाई ने कोरबा जिले के दीपका में बिजली विभाग के सहायक अभियंता सत्येंद्र दिवाकर को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बुधवार दोपहर को की गई। एसीबी के डीएसपी अजितेश सिंह ने बताया कि यह गिरफ्तारी श्यामता टंडन निवासी ग्राम रलिया, जिला कोरबा की शिकायत पर हुई।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि ग्राम दर्री, जिला कोरबा में उसके मित्र के पिता की कृषि जमीन पर ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए मित्र के पिता ने उसे बिजली विभाग, दीपका के अधिकारियों से संपर्क करने को कहा था। ट्रांसफार्मर लगवाने के आवेदन के बाद, सहायक अभियंता सत्येंद्र दिवाकर ने मौके का निरीक्षण किया। इसके बाद, उन्होंने ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए चालान की राशि के अतिरिक्त, नाश्ता-पानी के नाम पर 80,000 रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने पहले ही 30,000 रुपये दे दिए थे, लेकिन शेष 50,000 रुपये की रिश्वत राशि नहीं देना चाहता था और अभियंता को पकड़वाना चाहता था।
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एसीबी इकाई बिलासपुर ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इसके बाद, ट्रैप की योजना तैयार की गई। 28 जनवरी 2026 को, शिकायतकर्ता द्वारा व्यवस्था की गई 50,000 रुपये की रिश्वत राशि आरोपी अभियंता सत्येंद्र दिवाकर को उसके दीपका, कोरबा स्थित कार्यालय में दी गई। जैसे ही अभियंता ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, एसीबी टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत के रूप में ली गई 50,000 रुपये की राशि बरामद कर ली गई।
पकड़े गए सहायक अभियंता सत्येंद्र दिवाकर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है। एसीबी द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है, और यह कार्रवाई इसी कड़ी का हिस्सा है। एसीबी ने किसी भी विभाग के लोकसेवक द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर तत्काल सूचना देने की अपील की है, ताकि ऐसे भ्रष्ट आचरण पर अंकुश लगाया जा सके। यह घटना सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर एक बार फिर इशारा करती है।