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Korba News: पसान में साढ़े चार घंटे थमा रहा रास्ता, डॉक्टर-बिजली समेत 5 मांगों को लेकर ग्रामीणों का चक्का जाम
Tue, 11 Aug 2026 04:30 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2026 04:30 PM IST
सार
स्वास्थ्य, बिजली और क्षेत्रीय विकास की मांगों को लेकर ग्रामीणों ने चक्का जाम किया। प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशन, कॉलेज निर्माण और उदेरदा पिकनिक स्पॉट के विकास को लेकर 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
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पसान में स्वास्थ्य, बिजली को लेकर चक्काजाम
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विस्तार
कोरबा जिले के पसान क्षेत्र में मंगलवार सुबह बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। पसान बस स्टैंड के पास ग्रामीणों, स्थानीय व्यापारियों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सुबह 7 बजे से चक्का जाम कर दिया। करीब साढ़े चार घंटे तक चले प्रदर्शन के कारण पसान मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही। प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद सुबह करीब 11:30 बजे आंदोलन समाप्त किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पसान क्षेत्र लंबे समय से स्वास्थ्य और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। इन समस्याओं को लेकर करीब एक सप्ताह पहले तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर समाधान की मांग की गई थी। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग पसान स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी MBBS डॉक्टर की पदस्थापना है। ग्रामीणों के मुताबिक डॉक्टर की नियमित उपलब्धता नहीं होने के कारण गंभीर स्थिति में मरीजों को दूसरे शहरों की ओर ले जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने पसान में निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि क्षेत्र में बार-बार बिजली ट्रिपिंग, लो वोल्टेज और फीडर से जुड़ी समस्याएं बनी रहती हैं। प्रदर्शनकारियों ने पसान फीडर को अलग करने के साथ खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने, जर्जर विद्युत तारों को दुरुस्त करने और कमजोर व ढीले खंभों को बदलने की मांग रखी।
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रेलवे स्टेशन और कॉलेज का मुद्दा भी उठा
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास से जुड़े अन्य मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। इनमें पसान में प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का लंबित निर्माण, पिछले करीब पांच वर्षों से बंद पड़े कॉलेज निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करना और उदेरदा पिकनिक स्पॉट के विकास की मांग शामिल है। ग्रामीणों ने पिकनिक स्पॉट तक पहुंचने वाले रेलवे लाइन से बंद रास्ते को फिर से खोलने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी।
मौके पर पहुंचे तहसीलदार, मिला लिखित आश्वासन
चक्का जाम की सूचना मिलने पर तहसीलदार वीरेंद्र सिंह श्याम पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच मांगों को लेकर बातचीत हुई। तहसीलदार ने बताया कि आंदोलन में स्वास्थ्य और बिजली से संबंधित मांगें प्रमुख थीं। विद्युत विभाग से चर्चा के बाद पसान फीडर को अलग करने का प्रस्ताव शासन को भेजने की बात कही गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर MBBS डॉक्टर की पदस्थापना की प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया गया।
ग्रामीण युसूफ खान के अनुसार, BMO के निर्देश पर PHC में डॉक्टर की स्थायी पदस्थापना की बात कही गई है। विद्युत विभाग ने भी बिजली से जुड़ी मांगों को छह महीने के भीतर पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया है। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशन, कॉलेज निर्माण और उदेरदा पिकनिक स्पॉट से जुड़ी मांगों को लेकर प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है। उनका कहना है कि तय अवधि में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा आंदोलन किया जाएगा और इस बार प्रदर्शन को और व्यापक किया जा सकता है।
चक्का जाम में पसान के अलावा बैरा, कोटमरा, सड़ामार, तेलियामार और कुम्हारीसानी सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। स्थानीय व्यापारियों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
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ग्रामीणों का कहना है कि पसान क्षेत्र लंबे समय से स्वास्थ्य और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। इन समस्याओं को लेकर करीब एक सप्ताह पहले तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर समाधान की मांग की गई थी। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग पसान स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी MBBS डॉक्टर की पदस्थापना है। ग्रामीणों के मुताबिक डॉक्टर की नियमित उपलब्धता नहीं होने के कारण गंभीर स्थिति में मरीजों को दूसरे शहरों की ओर ले जाना पड़ता है।
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ग्रामीणों ने पसान में निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि क्षेत्र में बार-बार बिजली ट्रिपिंग, लो वोल्टेज और फीडर से जुड़ी समस्याएं बनी रहती हैं। प्रदर्शनकारियों ने पसान फीडर को अलग करने के साथ खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने, जर्जर विद्युत तारों को दुरुस्त करने और कमजोर व ढीले खंभों को बदलने की मांग रखी।
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रेलवे स्टेशन और कॉलेज का मुद्दा भी उठा
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास से जुड़े अन्य मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। इनमें पसान में प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का लंबित निर्माण, पिछले करीब पांच वर्षों से बंद पड़े कॉलेज निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करना और उदेरदा पिकनिक स्पॉट के विकास की मांग शामिल है। ग्रामीणों ने पिकनिक स्पॉट तक पहुंचने वाले रेलवे लाइन से बंद रास्ते को फिर से खोलने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी।
मौके पर पहुंचे तहसीलदार, मिला लिखित आश्वासन
चक्का जाम की सूचना मिलने पर तहसीलदार वीरेंद्र सिंह श्याम पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच मांगों को लेकर बातचीत हुई। तहसीलदार ने बताया कि आंदोलन में स्वास्थ्य और बिजली से संबंधित मांगें प्रमुख थीं। विद्युत विभाग से चर्चा के बाद पसान फीडर को अलग करने का प्रस्ताव शासन को भेजने की बात कही गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर MBBS डॉक्टर की पदस्थापना की प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया गया।
ग्रामीण युसूफ खान के अनुसार, BMO के निर्देश पर PHC में डॉक्टर की स्थायी पदस्थापना की बात कही गई है। विद्युत विभाग ने भी बिजली से जुड़ी मांगों को छह महीने के भीतर पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया है। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशन, कॉलेज निर्माण और उदेरदा पिकनिक स्पॉट से जुड़ी मांगों को लेकर प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है। उनका कहना है कि तय अवधि में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा आंदोलन किया जाएगा और इस बार प्रदर्शन को और व्यापक किया जा सकता है।
चक्का जाम में पसान के अलावा बैरा, कोटमरा, सड़ामार, तेलियामार और कुम्हारीसानी सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। स्थानीय व्यापारियों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।