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Korba: घर पर खपरैल में कुंडली मार बैठा था 10 फिट का किंग कोबरा, टॉर्च की रोशनी में रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा
Thu, 13 Aug 2026 12:04 PM IST
कोरबा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोरबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 12:04 PM IST
सार
रजगामार के केसला गांव में घर की बाड़ी में करीब 10 फीट लंबा किंग कोबरा खपरैल के बीच छिपा मिला। सूचना पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।
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किंग कोबरा का रेस्क्यू करते टीम के साथी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के रजगामार क्षेत्र के केसला गांव में बुधवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब किसान मगत राम के घर की बाड़ी में रखे खपरैल के बीच करीब 10 फीट लंबा किंग कोबरा (पहाड़ चित्ती) दिखाई दिया। सांप घर के देवस्थल के पास छिपा हुआ था। विशालकाय सांप को देखते ही परिवार में दहशत फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर जुट गए।
बिजली गुल होने से बढ़ी चुनौती
घर मालिक ने बिना जोखिम उठाए तत्काल वन विभाग को सूचना दी। साथ ही रेस्क्यू टीम प्रमुख और नोवा नेचर के सदस्य जितेंद्र सारथी को भी जानकारी दी गई। रेस्क्यू के दौरान पूरे गांव में बिजली गुल थी। ऐसे में खपरैल के बीच छिपे विशाल किंग कोबरा को सुरक्षित बाहर निकालना टीम के लिए चुनौतीपूर्ण था। थोड़ी सी लापरवाही रेस्क्यू टीम और आसपास मौजूद लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकती थी।
ये भी पढ़ें: Durg-Bhilai News: ब्रांडेड सिगरेट के नाम पर धोखाधड़ी का खेल, दो लाख की नकली सिगरेट जब्त, दो व्यापारी गिरफ्तार
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टॉर्च की रोशनी में किया सुरक्षित रेस्क्यू
वन मंडलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी रामसिंह राठिया के मार्गदर्शन में वन विभाग के कर्मचारियों और रेस्क्यू टीम ने कार्रवाई शुरू की। रेस्क्यू टीम के जितेंद्र सारथी और बॉबी श्रीवास ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए टॉर्च की रोशनी में काफी मशक्कत के बाद किंग कोबरा को सुरक्षित बाहर निकाला और उसे थैले में रखा। इसके बाद नियमानुसार पंचनामा तैयार कर किंग कोबरा को उसके प्राकृतिक रहवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
वन विभाग ने ग्रामीणों से की अपील
रजगामार प्रभारी कमलेश कुम्हार ने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें। तत्काल वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों या अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि वन्यजीव को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किंग कोबरा पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सांपों की आबादी को नियंत्रित करने में योगदान देता है। ऐसे में घरों या आबादी वाले क्षेत्रों में इसके पहुंचने पर घबराने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेना ही सुरक्षित और जिम्मेदार कदम है। इस सफल रेस्क्यू अभियान के दौरान केसला के सरपंच, वन विभाग के कर्मचारी और आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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बिजली गुल होने से बढ़ी चुनौती
घर मालिक ने बिना जोखिम उठाए तत्काल वन विभाग को सूचना दी। साथ ही रेस्क्यू टीम प्रमुख और नोवा नेचर के सदस्य जितेंद्र सारथी को भी जानकारी दी गई। रेस्क्यू के दौरान पूरे गांव में बिजली गुल थी। ऐसे में खपरैल के बीच छिपे विशाल किंग कोबरा को सुरक्षित बाहर निकालना टीम के लिए चुनौतीपूर्ण था। थोड़ी सी लापरवाही रेस्क्यू टीम और आसपास मौजूद लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकती थी।
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टॉर्च की रोशनी में किया सुरक्षित रेस्क्यू
वन मंडलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी रामसिंह राठिया के मार्गदर्शन में वन विभाग के कर्मचारियों और रेस्क्यू टीम ने कार्रवाई शुरू की। रेस्क्यू टीम के जितेंद्र सारथी और बॉबी श्रीवास ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए टॉर्च की रोशनी में काफी मशक्कत के बाद किंग कोबरा को सुरक्षित बाहर निकाला और उसे थैले में रखा। इसके बाद नियमानुसार पंचनामा तैयार कर किंग कोबरा को उसके प्राकृतिक रहवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
वन विभाग ने ग्रामीणों से की अपील
रजगामार प्रभारी कमलेश कुम्हार ने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें। तत्काल वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों या अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि वन्यजीव को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किंग कोबरा पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सांपों की आबादी को नियंत्रित करने में योगदान देता है। ऐसे में घरों या आबादी वाले क्षेत्रों में इसके पहुंचने पर घबराने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेना ही सुरक्षित और जिम्मेदार कदम है। इस सफल रेस्क्यू अभियान के दौरान केसला के सरपंच, वन विभाग के कर्मचारी और आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।