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CG Road Accident: कोयला लोड ट्रेलर हुआ कंट्रोल से बाहर, टला हादसा, लोगों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 09 Jan 2026 08:43 PM IST
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सार
कोरबा में आज एक बड़ा हादसा टल गया। मुड़ापार बायपास रोड के पास एक कोयला लोड ट्रेलर अनियंत्रित होकर पलट गया। गनीमत रही कि चालक और आसपास से गुजर रहे राहगीर इस घटना में बाल-बाल बच गए।
लोड ट्रेलर अनियंत्रित होकर पलटा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शुक्रवार की रात मानिकपुर चौकी क्षेत्र में एक बड़ा हादसा टल गया। मुड़ापार बायपास रोड के पास एक कोयला लोड ट्रेलर अनियंत्रित होकर पलट गया। गनीमत रही कि चालक और आसपास से गुजर रहे राहगीर इस घटना में बाल-बाल बच गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रेलर चालक नशे की हालत में था और तेज रफ्तार के कारण वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और सूचना मिलते ही मानिकपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंच कर स्थिति को संभाला।
भारी वाहनों के दबाव से लगातार हादसे का खतरा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव अत्यधिक है और वाहनों की गति भी काफी तेज रहती है। इसी कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। भारी वाहन टीपी नगर, बुधवार फाटक, मुड़ापार, अमरियापारा, रामनगर, रेलवे कॉलोनी होते हुए इमली डुग्गू फाटक तक शहर के बीच से गुजरते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना काफी बढ़ गई है, जो लोगों की जान के लिए खतरा पैदा कर सकती है। पूर्व में लोगों की शिकायतों के बाद इस मार्ग पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई थी, जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिली थी। हालांकि, अब एक बार फिर इन भारी वाहनों का परिचालन शुरू हो गया है, जिससे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। नो एंट्री खुलने से पहले ही इन वाहनों को रेलवे कॉलोनी फाटक और टीपी नगर के आसपास सड़क किनारे खड़ा कर दिया जाता है, जिससे आमजन परेशान होते हैं।
परेशानियों का सामना और पूर्व में हुआ विरोध
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से होकर कई लोग रेलवे स्टेशन की दूसरी एंट्री से ट्रेन पकड़ने जाते हैं। भारी वाहनों के दबाव के कारण नो एंट्री खुलते ही ये वाहन अनियंत्रित रूप से खड़े हो जाते हैं, जिससे स्टेशन तक पहुंचने में परेशानी होती है और कई बार लोगों की ट्रेन भी छूट जाती है। जब इस मार्ग पर भारी वाहनों का परिचालन दोबारा शुरू हुआ था, तब ट्रक एसोसिएशन ने इसका विरोध किया था। उन्होंने प्रेस वार्ता कर कहा था कि यदि इस मार्ग पर वाहनों के परिचालन के बाद कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
जनप्रतिनिधियों की मांग और भविष्य की चिंता
वार्ड नंबर 26 के पार्षद गोपाल कुर्रे ने बताया कि उन्होंने पहले भी जिला प्रशासन से भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की शिकायत की थी। इस मार्ग पर परिचालन फिर से शुरू होने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। आबादी वाले क्षेत्र से भारी वाहनों का गुजरना अत्यंत खतरनाक है। पार्षद गोपाल कुर्रे ने सुझाव दिया कि जब जिला प्रशासन ने बाईपास मार्ग बना दिया है, तो भारी वाहनों के लिए उसी मार्ग का उपयोग किया जाना चाहिए। स्कूल, कॉलेज और अत्यधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में भारी वाहनों के परिचालन को बंद किया जाना चाहिए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस बार एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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भारी वाहनों के दबाव से लगातार हादसे का खतरा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव अत्यधिक है और वाहनों की गति भी काफी तेज रहती है। इसी कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। भारी वाहन टीपी नगर, बुधवार फाटक, मुड़ापार, अमरियापारा, रामनगर, रेलवे कॉलोनी होते हुए इमली डुग्गू फाटक तक शहर के बीच से गुजरते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना काफी बढ़ गई है, जो लोगों की जान के लिए खतरा पैदा कर सकती है। पूर्व में लोगों की शिकायतों के बाद इस मार्ग पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई थी, जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिली थी। हालांकि, अब एक बार फिर इन भारी वाहनों का परिचालन शुरू हो गया है, जिससे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। नो एंट्री खुलने से पहले ही इन वाहनों को रेलवे कॉलोनी फाटक और टीपी नगर के आसपास सड़क किनारे खड़ा कर दिया जाता है, जिससे आमजन परेशान होते हैं।
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परेशानियों का सामना और पूर्व में हुआ विरोध
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से होकर कई लोग रेलवे स्टेशन की दूसरी एंट्री से ट्रेन पकड़ने जाते हैं। भारी वाहनों के दबाव के कारण नो एंट्री खुलते ही ये वाहन अनियंत्रित रूप से खड़े हो जाते हैं, जिससे स्टेशन तक पहुंचने में परेशानी होती है और कई बार लोगों की ट्रेन भी छूट जाती है। जब इस मार्ग पर भारी वाहनों का परिचालन दोबारा शुरू हुआ था, तब ट्रक एसोसिएशन ने इसका विरोध किया था। उन्होंने प्रेस वार्ता कर कहा था कि यदि इस मार्ग पर वाहनों के परिचालन के बाद कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
जनप्रतिनिधियों की मांग और भविष्य की चिंता
वार्ड नंबर 26 के पार्षद गोपाल कुर्रे ने बताया कि उन्होंने पहले भी जिला प्रशासन से भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की शिकायत की थी। इस मार्ग पर परिचालन फिर से शुरू होने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। आबादी वाले क्षेत्र से भारी वाहनों का गुजरना अत्यंत खतरनाक है। पार्षद गोपाल कुर्रे ने सुझाव दिया कि जब जिला प्रशासन ने बाईपास मार्ग बना दिया है, तो भारी वाहनों के लिए उसी मार्ग का उपयोग किया जाना चाहिए। स्कूल, कॉलेज और अत्यधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में भारी वाहनों के परिचालन को बंद किया जाना चाहिए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस बार एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।