CG News: SECL खदान में भारी वाहन की चपेट में ग्रामीण की मौत, उग्र प्रदर्शन के बाद 5 परिजनों को नौकरी का एलान
कोरबा की SECL कुसमुंडा खदान में भारी वाहन की चपेट में आने से 48 वर्षीय ग्रामीण बहारता उर्फ दीवान दास की मौत हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद प्रबंधन ने 5 लाख रुपये, पांच परिजनों को रोजगार और अन्य नियमानुसार लाभ देने का आश्वासन दिया।
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साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में मंगलवार देर शाम सतर्कता चौक के पास तेज रफ्तार भारी वाहन की चपेट में आने से जपेली निवासी बहारता उर्फ दीवान दास (48) की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद शव को कुसमुंडा अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया।
बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। स्थानीय ग्रामीणों, श्रमिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने सड़क पर उतरकर SECL प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के कारण आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। उनका कहना था कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो जान बचाई जा सकती थी।
धरने में शामिल लोगों ने मृतक के परिजनों को न्याय, उचित मुआवजा और परिवार के सदस्यों को रोजगार देने की मांग की। प्रदर्शन तेज होने पर SECL के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। लंबी वार्ता के बाद प्रबंधन ने मृतक के परिवार के पांच सदस्यों को रोजगार देने, तत्काल 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा दुर्घटना बीमा सहित नियमानुसार मिलने वाले सभी मुआवजे और अन्य लाभ देने की घोषणा की।
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SECL अधिकारियों के लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया। कुसमुंडा थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसकी लापरवाही रही।
धरना-प्रदर्शन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (गैर राजनीतिक संगठन) के प्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल, जिला संयोजक अतुल दास महंत, श्रम सेवा भू-स्थापित कामगार संगठन के संस्थापक अशोक पटेल, कुसमुंडा खदान अध्यक्ष कैलाश साहू, पीड़ित परिवार के सदस्य पवन दास महंत समेत आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण और श्रमिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई और हादसों पर रोक नहीं लगी, तो इससे भी बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।