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CG News: मौसी की बेटी से शादी अवैध; पत्नी को है गुजारा भत्ता पाने का अधिकार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Sat, 02 May 2026 09:22 PM IST
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सार
Chhattisgarh High Court Verdict छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मौसी की बेटी से शादी कानूनन अवैध है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
Chhattisgarh High Court Verdict छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मौसी की बेटी से शादी कानूनन अवैध है। निचली अदालत ने स्थानीय प्रथा का हवाला देते हुए इस विवाह को वैध माना था पर हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी शादी हिंदू विवाह कानून के तहत निषिद्ध संबंधों में आती है, इसलिए यह वैध नहीं मानी जा सकती। हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह भले ही शून्य घोषित कर दिया जाए, लेकिन महिला को गुजारा भत्ता लेने का अधिकार है, जो बना रहेगा।
स्थानीय प्रथा को किया खारिज
मामले की सुनवाई करते हुए परिवार न्यायालय ने स्थानीय प्रथा के अलावा पटेल समाज में ब्रह्म विवाह के नाम पर ऐसी शादियां प्रचलित होने का हवाला देते हुए इस विवाह को वैध माना और पति की याचिका को खारिज कर दिया। पत्नी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने फैमिली कोर्ट को बताया कि,पटेल समाज में पीढ़ी-दर-पीढ़ी ब्रम्ह विवाह की प्रथा प्रचलित है। विवाह सामाजिक रीति रिवाज से हुआ है, लिहाजा पति अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी शादी हिंदू विवाह कानून के तहत निषिद्ध संबंधों में आती है, इसलिए यह वैध नहीं मानी जा सकती। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पटेल समाज में ब्रम्ह विवाह की प्रथा जैसी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रथा को कानून का दर्जा पाने के लिए यह साबित करना जरूरी है। वह प्राचीन, निरंतर और सार्वजनिक नीति के अनुकूल अनुकूल हो।
हाईकोर्ट ने शादी को शून्य घोषित किया पर...
कोर्ट ने पाया कि मामले में ऐसी किसी रूढ़ि को पुख्तातौर पर साबित नहीं किया गया है, जिसके आधार पर प्रतिषिद्ध नातेदारी के भीतर विवाह को अनुमति दी जा सके। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 (iv) के अनुसार, प्रतिषिद्ध नातेदारी में शादी अवैध है। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने शादी को शून्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है। विवाह को शून्य घोषित करते हुए कोर्ट ने कहा कि शादी रद्द होने के बाद भी पीड़ित पक्ष पत्नी को धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है। पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के लिए आवेदन दायर करने की छूट दी है।
जानें क्या है मामला
मामला प्रदेश के जांजगीर-चांपा जिले का है, जहां वर्ष 2018 में एक युवक ने अपनी मौसी की बेटी से विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की। याचिकाकर्ता का तर्क था कि दोनों की माताएं सगी बहनें हैं, इसलिए यह विवाह कानून के दायरे में वैध नहीं है। बिलासपुर उच्च न्यायालय के इस फैसले को सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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स्थानीय प्रथा को किया खारिज
मामले की सुनवाई करते हुए परिवार न्यायालय ने स्थानीय प्रथा के अलावा पटेल समाज में ब्रह्म विवाह के नाम पर ऐसी शादियां प्रचलित होने का हवाला देते हुए इस विवाह को वैध माना और पति की याचिका को खारिज कर दिया। पत्नी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने फैमिली कोर्ट को बताया कि,पटेल समाज में पीढ़ी-दर-पीढ़ी ब्रम्ह विवाह की प्रथा प्रचलित है। विवाह सामाजिक रीति रिवाज से हुआ है, लिहाजा पति अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी शादी हिंदू विवाह कानून के तहत निषिद्ध संबंधों में आती है, इसलिए यह वैध नहीं मानी जा सकती। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पटेल समाज में ब्रम्ह विवाह की प्रथा जैसी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रथा को कानून का दर्जा पाने के लिए यह साबित करना जरूरी है। वह प्राचीन, निरंतर और सार्वजनिक नीति के अनुकूल अनुकूल हो।
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हाईकोर्ट ने शादी को शून्य घोषित किया पर...
कोर्ट ने पाया कि मामले में ऐसी किसी रूढ़ि को पुख्तातौर पर साबित नहीं किया गया है, जिसके आधार पर प्रतिषिद्ध नातेदारी के भीतर विवाह को अनुमति दी जा सके। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 (iv) के अनुसार, प्रतिषिद्ध नातेदारी में शादी अवैध है। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने शादी को शून्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है। विवाह को शून्य घोषित करते हुए कोर्ट ने कहा कि शादी रद्द होने के बाद भी पीड़ित पक्ष पत्नी को धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है। पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के लिए आवेदन दायर करने की छूट दी है।
जानें क्या है मामला
मामला प्रदेश के जांजगीर-चांपा जिले का है, जहां वर्ष 2018 में एक युवक ने अपनी मौसी की बेटी से विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की। याचिकाकर्ता का तर्क था कि दोनों की माताएं सगी बहनें हैं, इसलिए यह विवाह कानून के दायरे में वैध नहीं है। बिलासपुर उच्च न्यायालय के इस फैसले को सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
