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Dhamtari: धान की फसल में कीटों का बढ़ा प्रकोप, कृषि विभाग ने किसानों से की नियमित निरीक्षण की अपील
Fri, 31 Oct 2025 08:26 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 31 Oct 2025 08:26 PM IST
सार
इसी बीच पेनिकल माइट, तना छेदक और भूरा माहू जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग ने किसानों से खेतों का नियमित निरीक्षण करने और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है।
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धान की फसल में कीटों का बढ़ा प्रकोप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धमतरी जिले में खरीफ मौसम के तहत लगभग 1.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों की ओर से धान की खेती की गई है। वर्तमान में प्रारंभिक किस्मों की कटाई का दौर शुरू हो चुका है। इसी बीच पेनिकल माइट, तना छेदक और भूरा माहू जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग ने किसानों से खेतों का नियमित निरीक्षण करने और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पेनिकल माइट की शुरुआती अवस्था में पत्तियों पर आंख के आकार के छोटे धब्बे बनते हैं, जिनका अंदरूनी भाग भूरा और बाहरी किनारा गहरा भूरा होता है। धीरे-धीरे ये धब्बे मिलकर बड़े हो जाते हैं, जिससे पौधे पीले पड़ने लगते हैं। बाद में यह कीट गांठ और वालियों पर हमला कर उन्हें कमजोर और काला कर देता है, जिससे दाने नहीं भरते और वालियां टूट जाती हैं।
इसकी रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर हेक्सीथायाजोक्स 5.45 ई.सी. (मैडन, क्यूवैक्स, माईटोलिन या अन्य समकक्ष उत्पाद) 500 मिली + प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. (टिल्ट, बूस्ट, बम्पर, जिराक्स या अन्य समकक्ष उत्पाद) 500 मिली 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। या फिर प्रोपर्राजाईट 57 ई.सी. 750 मिली + प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इसके अलावा डाईफेन्यूरॉन 120 ग्राम एवं प्रोपिकोनाजोल 200 मिली प्रति एकड़ मात्रा में छिड़काव भी प्रभावी है।
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भूरा माहू के प्रकोप की स्थिति में पाईमेट्रोजिन 50 डब्ल्यू.जी. (अप्लाई, पाईमेट्रो, क्लू आदि) 300 ग्राम या डाइनेट्फ्यूरान 20 एस.जी. (ओसीन, टोकन आदि) 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।धान में झुलसा रोग (ब्लास्ट) दिखाई देने पर टेवुकोनाजोल + ट्राइफॉक्सीस्ट्रोबीन (नाटीवो 75 डब्ल्यू.जी.) 0.4 ग्राम प्रति लीटर या ट्राइसाइक्लाजोल (बीम, बान आदि) 6 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर 12 से 15 दिन के अंतर पर छिड़काव करें।
गंधी बग कीट नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 50 मिली या थायामेथोक्साम 25 डब्ल्यू.जी. 40 ग्राम प्रति एकड़ 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए कर्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 डब्ल्यू.पी. (काल्डेन, कैरीड, मोर्टार आदि) 1 कि.ग्रा. या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल (फटेरा, कोरेजन, फटेगोल्ड आदि) 150 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ ही तना छेदक की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 2 से 3 फिरोमोन ट्रैप लगाएं एवं प्रकोप अधिक होने पर 8 से 10 ट्रैप का उपयोग करें।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से पूर्व स्प्रेयर की अच्छी तरह सफाई अवश्य करें और उपयोग के समय सुरक्षा साधनों जैसे दस्ताने और चेहरे पर कपड़ा का प्रयोग करें। साथ ही जैविक कीटनाशकों का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया गया है, जिससे विषमुक्त खेती और स्वस्थ भोजन को प्रोत्साहन मिल सके। किसान कीट एवं रोग नियंत्रण से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान हेतु अपने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पेनिकल माइट की शुरुआती अवस्था में पत्तियों पर आंख के आकार के छोटे धब्बे बनते हैं, जिनका अंदरूनी भाग भूरा और बाहरी किनारा गहरा भूरा होता है। धीरे-धीरे ये धब्बे मिलकर बड़े हो जाते हैं, जिससे पौधे पीले पड़ने लगते हैं। बाद में यह कीट गांठ और वालियों पर हमला कर उन्हें कमजोर और काला कर देता है, जिससे दाने नहीं भरते और वालियां टूट जाती हैं।
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इसकी रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर हेक्सीथायाजोक्स 5.45 ई.सी. (मैडन, क्यूवैक्स, माईटोलिन या अन्य समकक्ष उत्पाद) 500 मिली + प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. (टिल्ट, बूस्ट, बम्पर, जिराक्स या अन्य समकक्ष उत्पाद) 500 मिली 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। या फिर प्रोपर्राजाईट 57 ई.सी. 750 मिली + प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इसके अलावा डाईफेन्यूरॉन 120 ग्राम एवं प्रोपिकोनाजोल 200 मिली प्रति एकड़ मात्रा में छिड़काव भी प्रभावी है।
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भूरा माहू के प्रकोप की स्थिति में पाईमेट्रोजिन 50 डब्ल्यू.जी. (अप्लाई, पाईमेट्रो, क्लू आदि) 300 ग्राम या डाइनेट्फ्यूरान 20 एस.जी. (ओसीन, टोकन आदि) 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।धान में झुलसा रोग (ब्लास्ट) दिखाई देने पर टेवुकोनाजोल + ट्राइफॉक्सीस्ट्रोबीन (नाटीवो 75 डब्ल्यू.जी.) 0.4 ग्राम प्रति लीटर या ट्राइसाइक्लाजोल (बीम, बान आदि) 6 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर 12 से 15 दिन के अंतर पर छिड़काव करें।
गंधी बग कीट नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 50 मिली या थायामेथोक्साम 25 डब्ल्यू.जी. 40 ग्राम प्रति एकड़ 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए कर्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 डब्ल्यू.पी. (काल्डेन, कैरीड, मोर्टार आदि) 1 कि.ग्रा. या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल (फटेरा, कोरेजन, फटेगोल्ड आदि) 150 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ ही तना छेदक की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 2 से 3 फिरोमोन ट्रैप लगाएं एवं प्रकोप अधिक होने पर 8 से 10 ट्रैप का उपयोग करें।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से पूर्व स्प्रेयर की अच्छी तरह सफाई अवश्य करें और उपयोग के समय सुरक्षा साधनों जैसे दस्ताने और चेहरे पर कपड़ा का प्रयोग करें। साथ ही जैविक कीटनाशकों का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया गया है, जिससे विषमुक्त खेती और स्वस्थ भोजन को प्रोत्साहन मिल सके। किसान कीट एवं रोग नियंत्रण से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान हेतु अपने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।