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Raigarh News: दो साल पुराने हत्याकांड में आया फैसला, महिला की गोली मारकर हत्या करने वाले भाई-बहन को उम्रकैद
Sat, 01 Aug 2026 03:06 PM IST
रायगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
Published by: रायगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 03:06 PM IST
सार
रायगढ़ जिले में वर्ष 2023 में हुई महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। पारिवारिक रंजिश में हत्या की साजिश रचने वाले सगे भाई-बहन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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भाई बहन को आजीवन कारावास की सजा
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पारिवारिक विवाद के चलते घर के बाहर सो रही महिला की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में दोषी पाए गए गोपाल यादव और उसकी बहन लक्ष्मी यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोनों को साक्ष्य छिपाने और अवैध हथियार रखने के मामले में पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा अर्थदंड से भी दंडित किया गया है।
अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि यह घटना 18 मई 2023 की है। लैलूंगा थाना क्षेत्र के ग्राम दियागढ़ निवासी हरिराम यादव ने रात करीब 2:15 बजे पुलिस को सूचना दी कि उसके घर के बाहर गोली चलने की आवाज आई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।
हरिराम ने पुलिस को बताया कि रात में भोजन करने के बाद वह अपने भाई के साथ घर के अंदर सो रहा था, जबकि उसकी मां दुरपति यादव घर के बाहर खाट पर सो रही थीं। रात करीब दो बजे कुत्ते के भौंकने और गोली चलने की आवाज सुनकर दोनों बाहर निकले। उन्होंने देखा कि गोपाल यादव और एक नाबालिग घटनास्थल से भाग रहे थे। वहीं उनकी मां खून से लथपथ पड़ी थीं, जिनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
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जांच में सामने आया कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हरिराम ने गोपाल यादव की चचेरी बहन पदमा से प्रेम विवाह किया था, जिसके बाद रिश्तों में खटास आ गई थी। इसके अलावा एक पुराने हत्या के मामले को लेकर भी दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मृतका दुरपति यादव और आरोपी लक्ष्मी यादव के बीच अक्सर विवाद होता था और लक्ष्मी उन्हें जान से मारने की धमकी देती थी।
विवेचना के दौरान पुलिस ने नाबालिग आरोपी को लक्ष्मी यादव के घर से पकड़ा, जबकि मुख्य आरोपी गोपाल यादव को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने पारिवारिक रंजिश के चलते हत्या की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या, साजिश, साक्ष्य मिटाने और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत चालान न्यायालय में पेश किया। नाबालिग आरोपी का मामला अलग से बाल न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
मामले की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर गोपाल यादव और लक्ष्मी यादव को हत्या के अपराध में दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही साक्ष्य छिपाने और बिना वैध अनुमति हथियार रखने के अपराध में पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की अतिरिक्त सजा दी। अदालत ने गोपाल यादव पर 5 हजार रुपये और लक्ष्मी यादव पर 4 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
इसके अलावा न्यायालय ने मृतका के परिजनों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है। मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की।
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अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि यह घटना 18 मई 2023 की है। लैलूंगा थाना क्षेत्र के ग्राम दियागढ़ निवासी हरिराम यादव ने रात करीब 2:15 बजे पुलिस को सूचना दी कि उसके घर के बाहर गोली चलने की आवाज आई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।
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हरिराम ने पुलिस को बताया कि रात में भोजन करने के बाद वह अपने भाई के साथ घर के अंदर सो रहा था, जबकि उसकी मां दुरपति यादव घर के बाहर खाट पर सो रही थीं। रात करीब दो बजे कुत्ते के भौंकने और गोली चलने की आवाज सुनकर दोनों बाहर निकले। उन्होंने देखा कि गोपाल यादव और एक नाबालिग घटनास्थल से भाग रहे थे। वहीं उनकी मां खून से लथपथ पड़ी थीं, जिनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
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जांच में सामने आया कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हरिराम ने गोपाल यादव की चचेरी बहन पदमा से प्रेम विवाह किया था, जिसके बाद रिश्तों में खटास आ गई थी। इसके अलावा एक पुराने हत्या के मामले को लेकर भी दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मृतका दुरपति यादव और आरोपी लक्ष्मी यादव के बीच अक्सर विवाद होता था और लक्ष्मी उन्हें जान से मारने की धमकी देती थी।
विवेचना के दौरान पुलिस ने नाबालिग आरोपी को लक्ष्मी यादव के घर से पकड़ा, जबकि मुख्य आरोपी गोपाल यादव को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने पारिवारिक रंजिश के चलते हत्या की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या, साजिश, साक्ष्य मिटाने और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत चालान न्यायालय में पेश किया। नाबालिग आरोपी का मामला अलग से बाल न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
मामले की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर गोपाल यादव और लक्ष्मी यादव को हत्या के अपराध में दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही साक्ष्य छिपाने और बिना वैध अनुमति हथियार रखने के अपराध में पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की अतिरिक्त सजा दी। अदालत ने गोपाल यादव पर 5 हजार रुपये और लक्ष्मी यादव पर 4 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
इसके अलावा न्यायालय ने मृतका के परिजनों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है। मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की।