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बस्तर को मिलेगा समुद्री कनेक्शन: रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर से चार घंटे में तय होगा सफर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 19 Apr 2026 08:34 PM IST
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सार
भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे बस्तर को सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट से जोड़ेगा, जिससे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर से चार घंटे में तय होगा सफर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के लिए रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे बस्तर को सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट से जोड़ेगा, जिससे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
फिलहाल जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक का सफर ओडिशा के पहाड़ी और घाटी मार्गों से होकर 7 से 9 घंटे में पूरा होता है। नए कॉरिडोर के बनने के बाद यही दूरी घटकर करीब 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी। इससे परिवहन लागत में कमी आएगी और माल ढुलाई तेज व सस्ती होगी।
कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से होकर गुजरेगा। जगदलपुर को इससे जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर में दासपुर इंटरचेंज अहम भूमिका निभाएगा, जहां से बस्तर का यातायात सीधे इस हाईवे में जुड़ सकेगा।
इस परियोजना का सबसे बड़ा असर बस्तर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यहां की अरेबिका कॉफी, इमली, महुआ उत्पाद और पारंपरिक ढोकरा शिल्प अब आसानी से बंदरगाह तक पहुंच सकेंगे, जिससे इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है।
बेहतर सड़क संपर्क से बस्तर और आसपास के जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की पहुंच भी मजबूत होगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
खनिज संपदा से समृद्ध बस्तर क्षेत्र के लिए यह कॉरिडोर निर्यात को भी गति देगा। लौह अयस्क सहित अन्य खनिजों को बंदरगाह तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन के लिहाज से भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफा, दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा जैसे प्रमुख आकर्षणों तक पहुंच आसान होगी, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
परियोजना में पर्यावरण संतुलन का भी ध्यान रखा गया है। कांकेर जिले के केशकाल क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है। साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास और ओवरपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
करीब 16,491 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा 464 किमी लंबा यह कॉरिडोर बस्तर को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के साथ ही राज्य के समग्र विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह परियोजना बस्तर सहित पूरे प्रदेश के लिए विकास का नया द्वार खोलेगी और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच देगी। वहीं उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने इसे कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को गति देने वाला कदम बताया।
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फिलहाल जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक का सफर ओडिशा के पहाड़ी और घाटी मार्गों से होकर 7 से 9 घंटे में पूरा होता है। नए कॉरिडोर के बनने के बाद यही दूरी घटकर करीब 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी। इससे परिवहन लागत में कमी आएगी और माल ढुलाई तेज व सस्ती होगी।
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कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से होकर गुजरेगा। जगदलपुर को इससे जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर में दासपुर इंटरचेंज अहम भूमिका निभाएगा, जहां से बस्तर का यातायात सीधे इस हाईवे में जुड़ सकेगा।
इस परियोजना का सबसे बड़ा असर बस्तर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यहां की अरेबिका कॉफी, इमली, महुआ उत्पाद और पारंपरिक ढोकरा शिल्प अब आसानी से बंदरगाह तक पहुंच सकेंगे, जिससे इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है।
बेहतर सड़क संपर्क से बस्तर और आसपास के जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की पहुंच भी मजबूत होगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
खनिज संपदा से समृद्ध बस्तर क्षेत्र के लिए यह कॉरिडोर निर्यात को भी गति देगा। लौह अयस्क सहित अन्य खनिजों को बंदरगाह तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन के लिहाज से भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफा, दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा जैसे प्रमुख आकर्षणों तक पहुंच आसान होगी, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
परियोजना में पर्यावरण संतुलन का भी ध्यान रखा गया है। कांकेर जिले के केशकाल क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है। साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास और ओवरपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
करीब 16,491 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा 464 किमी लंबा यह कॉरिडोर बस्तर को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के साथ ही राज्य के समग्र विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह परियोजना बस्तर सहित पूरे प्रदेश के लिए विकास का नया द्वार खोलेगी और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच देगी। वहीं उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने इसे कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को गति देने वाला कदम बताया।

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