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CG: विस में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने वाला कानून पास, आरोपियों को दस साल की जेल और एक करोड़ जुर्माना
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 20 Mar 2026 04:18 PM IST
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सार
नकल कराने वाले गिरोह, फर्जी अभ्यर्थी या तकनीकी उपकरणों के जरिए धोखाधड़ी करने वाले दोषियों को तीन से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम एक करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नया कानून पारित कर दिया है। 'लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम' से संबंधित इस विधेयक को सदन में सर्वसम्मति से मंजूरी मिली, जिससे साफ संकेत गया कि इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष दोनों एकमत हैं।
नए प्रावधानों के तहत अब परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नकल कराने वाले गिरोह, फर्जी अभ्यर्थी या तकनीकी उपकरणों के जरिए धोखाधड़ी करने वाले दोषियों को तीन से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम एक करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। साथ ही ऐसे अभ्यर्थियों को तीन वर्षों के लिए सभी भर्ती परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जाएगा।
सरकार ने इस कानून के दायरे को व्यापक बनाते हुए इसे सभी प्रमुख भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें राज्य लोक सेवा आयोग, व्यापमं और विभिन्न निगम-मंडलों द्वारा आयोजित परीक्षाएं भी शामिल होंगी। इसके अलावा, परीक्षा से जुड़े सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी भी तय की गई है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत की स्थिति में सीधे कार्रवाई की जा सके।
कानून में जांच प्रक्रिया को भी मजबूत बनाया गया है। ऐसे मामलों की जांच अब पुलिस उप निरीक्षक (SI) स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा, जिससे जांच की गंभीरता और पारदर्शिता बनी रहे। जरूरत पड़ने पर अन्य एजेंसियों की मदद भी ली जा सकेगी।
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह कानून नकल माफिया के खिलाफ निर्णायक कदम साबित होगा। वहीं, विपक्ष ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए इसे छात्रों के हित में महत्वपूर्ण बताया, हालांकि राजनीतिक टिप्पणियों से बचने की नसीहत भी दी।
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नए प्रावधानों के तहत अब परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नकल कराने वाले गिरोह, फर्जी अभ्यर्थी या तकनीकी उपकरणों के जरिए धोखाधड़ी करने वाले दोषियों को तीन से 10 वर्ष तक की सजा और अधिकतम एक करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। साथ ही ऐसे अभ्यर्थियों को तीन वर्षों के लिए सभी भर्ती परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जाएगा।
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सरकार ने इस कानून के दायरे को व्यापक बनाते हुए इसे सभी प्रमुख भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें राज्य लोक सेवा आयोग, व्यापमं और विभिन्न निगम-मंडलों द्वारा आयोजित परीक्षाएं भी शामिल होंगी। इसके अलावा, परीक्षा से जुड़े सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी भी तय की गई है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत की स्थिति में सीधे कार्रवाई की जा सके।
कानून में जांच प्रक्रिया को भी मजबूत बनाया गया है। ऐसे मामलों की जांच अब पुलिस उप निरीक्षक (SI) स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा, जिससे जांच की गंभीरता और पारदर्शिता बनी रहे। जरूरत पड़ने पर अन्य एजेंसियों की मदद भी ली जा सकेगी।
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह कानून नकल माफिया के खिलाफ निर्णायक कदम साबित होगा। वहीं, विपक्ष ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए इसे छात्रों के हित में महत्वपूर्ण बताया, हालांकि राजनीतिक टिप्पणियों से बचने की नसीहत भी दी।