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Raipur Crime News: फर्जी सिम रैकेट का पर्दाफाश, सात आरोपी गिरफ्तार; 300 से ज्यादा सिम का खुलासा
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 10 Apr 2026 07:00 PM IST
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सार
रायपुर रेंज पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन साइबर शील्ड' के तहत बड़ी सफलता मिली है। फर्जी सिम कार्ड के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रायपुर रेंज पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन साइबर शील्ड' के तहत बड़ी सफलता मिली है। फर्जी सिम कार्ड के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों से 300 से अधिक फर्जी सिम से जुड़ी अहम जानकारी भी मिली है, जिसका विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई रायपुर रेंज स्तर पर की गई, जिसमें वेस्ट बंगाल, रायपुर, दुर्ग और बलौदा बाजार से जुड़े आरोपियों को पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड बेचकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग म्यूल बैंक अकाउंट, टेलीग्राम टास्क, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, फेक सोशल मीडिया अकाउंट, शेयर ट्रेडिंग और सस्ते सामान के नाम पर ठगी जैसे मामलों में किया जा रहा था।
दो अलग-अलग मामलों में दर्ज साइबर ठगी की जांच के दौरान इस नेटवर्क का खुलासा हुआ। पहला मामला माना थाना क्षेत्र का है, जिसमें करीब 20.28 लाख रुपए की ठगी की शिकायत दर्ज हुई थी। दूसरा मामला आजाद चौक थाना क्षेत्र का है, जिसमें 6.42 लाख रुपए की धोखाधड़ी सामने आई थी। दोनों ही मामलों में मोबाइल सिम और म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने सिम सेवा प्रदाता कंपनियों से जानकारी जुटाई और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों की पहचान की। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे सिम लेने या पोर्ट कराने आए ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए अतिरिक्त सिम एक्टिवेट कर लेते थे। ई-केवाईसी और डी-केवाईसी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर ये सिम चालू किए जाते थे, जिन्हें बाद में साइबर अपराधियों को ऊंची कीमत पर बेचा जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई प्री-एक्टिवेटेड सिम और मोबाइल उपकरणों से संबंधित जानकारी मिली है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे सिम कार्ड लेते समय अपने दस्तावेजों का दुरुपयोग न होने दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
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पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई रायपुर रेंज स्तर पर की गई, जिसमें वेस्ट बंगाल, रायपुर, दुर्ग और बलौदा बाजार से जुड़े आरोपियों को पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड बेचकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग म्यूल बैंक अकाउंट, टेलीग्राम टास्क, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, फेक सोशल मीडिया अकाउंट, शेयर ट्रेडिंग और सस्ते सामान के नाम पर ठगी जैसे मामलों में किया जा रहा था।
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दो अलग-अलग मामलों में दर्ज साइबर ठगी की जांच के दौरान इस नेटवर्क का खुलासा हुआ। पहला मामला माना थाना क्षेत्र का है, जिसमें करीब 20.28 लाख रुपए की ठगी की शिकायत दर्ज हुई थी। दूसरा मामला आजाद चौक थाना क्षेत्र का है, जिसमें 6.42 लाख रुपए की धोखाधड़ी सामने आई थी। दोनों ही मामलों में मोबाइल सिम और म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने सिम सेवा प्रदाता कंपनियों से जानकारी जुटाई और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों की पहचान की। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे सिम लेने या पोर्ट कराने आए ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए अतिरिक्त सिम एक्टिवेट कर लेते थे। ई-केवाईसी और डी-केवाईसी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर ये सिम चालू किए जाते थे, जिन्हें बाद में साइबर अपराधियों को ऊंची कीमत पर बेचा जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई प्री-एक्टिवेटेड सिम और मोबाइल उपकरणों से संबंधित जानकारी मिली है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे सिम कार्ड लेते समय अपने दस्तावेजों का दुरुपयोग न होने दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।