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छत्तीसगढ़ में राशन वितरण की बदलेगी तस्वीर: रायपुर-दुर्ग-बिलासपुर में शुरू हुई 'अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम'
Sun, 09 Aug 2026 02:03 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:03 PM IST
सार
सार्वजनिक वितरण प्रणाली को तकनीक से जोड़ते हुए 'अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम' की शुरुआत की गई है। पहले चरण में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में तीन ग्रेन एटीएम स्थापित किए गए हैं।
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खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम का किया शुभारंभ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को तकनीक से जोड़ते हुए 'अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम' की शुरुआत की गई है। पहले चरण में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में तीन ग्रेन एटीएम स्थापित किए गए हैं। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने शनिवार को इन मशीनों का ऑनलाइन शुभारंभ किया। नई व्यवस्था के तहत राशनकार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में चावल लेने के लिए पारंपरिक राशन दुकानों पर लंबी कतार में खड़े होने की जरूरत कम होगी। आधार या राशनकार्ड नंबर दर्ज करने और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद मशीन से खाद्यान्न प्राप्त किया जा सकेगा।
ग्रेन एटीएम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हितग्राही अपनी सुविधा के अनुसार 24 घंटे राशन प्राप्त कर सकेंगे। इससे कामकाजी लोगों, श्रमिकों, बुजुर्गों और ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें राशन दुकान के निर्धारित समय में पहुंचने में परेशानी होती है। मशीन में हितग्राही की पहचान बायोमेट्रिक माध्यम से सत्यापित होने के बाद उसके राशन कार्ड में निर्धारित मात्रा के अनुसार चावल उपलब्ध कराया जाएगा।
छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में करीब 2.73 करोड़ लोग शामिल हैं। राज्य में वर्तमान में लगभग 82.18 लाख राशन कार्ड प्रचलित हैं। इनमें करीब 73.41 लाख प्राथमिकता वाले परिवारों को निःशुल्क चावल दिया जा रहा है, जबकि लगभग 8.50 लाख एपीएल राशन कार्डधारियों को रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराया जाता है। इतनी बड़ी आबादी वाली व्यवस्था में तकनीकी सुविधा जोड़ने से वितरण प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने का प्रयास किया गया है।
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‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम’ को वन नेशन, वन राशन कार्ड व्यवस्था से जोड़ा गया है। इसके चलते दूसरे राज्यों के पात्र राशनकार्डधारी भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए इन मशीनों से खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। इस सुविधा का लाभ विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों और दूसरे राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले पात्र हितग्राहियों को मिल सकता है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के सहयोग से स्थापित इन ग्रेन एटीएम की भंडारण क्षमता करीब 2500 किलोग्राम है। मशीन में चावल की लोडिंग स्वचालित प्रणाली से की जाएगी। हितग्राही की पहचान सत्यापित होने के बाद निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न मशीन से बाहर आएगा। तकनीक आधारित इस व्यवस्था का उद्देश्य राशन वितरण में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और खाद्यान्न की निगरानी एवं वितरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
राज्य सरकार का कहना है कि ग्रेन एटीएम केवल राशन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में शुरू हुई यह पहल देश के उन चुनिंदा राज्यों की व्यवस्था में शामिल हो गई है, जहां तकनीक आधारित ग्रेन एटीएम के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। आने वाले समय में इसके अनुभव के आधार पर इस व्यवस्था को और विस्तार देने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
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ग्रेन एटीएम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हितग्राही अपनी सुविधा के अनुसार 24 घंटे राशन प्राप्त कर सकेंगे। इससे कामकाजी लोगों, श्रमिकों, बुजुर्गों और ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें राशन दुकान के निर्धारित समय में पहुंचने में परेशानी होती है। मशीन में हितग्राही की पहचान बायोमेट्रिक माध्यम से सत्यापित होने के बाद उसके राशन कार्ड में निर्धारित मात्रा के अनुसार चावल उपलब्ध कराया जाएगा।
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छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में करीब 2.73 करोड़ लोग शामिल हैं। राज्य में वर्तमान में लगभग 82.18 लाख राशन कार्ड प्रचलित हैं। इनमें करीब 73.41 लाख प्राथमिकता वाले परिवारों को निःशुल्क चावल दिया जा रहा है, जबकि लगभग 8.50 लाख एपीएल राशन कार्डधारियों को रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराया जाता है। इतनी बड़ी आबादी वाली व्यवस्था में तकनीकी सुविधा जोड़ने से वितरण प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने का प्रयास किया गया है।
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‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम’ को वन नेशन, वन राशन कार्ड व्यवस्था से जोड़ा गया है। इसके चलते दूसरे राज्यों के पात्र राशनकार्डधारी भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए इन मशीनों से खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। इस सुविधा का लाभ विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों और दूसरे राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले पात्र हितग्राहियों को मिल सकता है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के सहयोग से स्थापित इन ग्रेन एटीएम की भंडारण क्षमता करीब 2500 किलोग्राम है। मशीन में चावल की लोडिंग स्वचालित प्रणाली से की जाएगी। हितग्राही की पहचान सत्यापित होने के बाद निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न मशीन से बाहर आएगा। तकनीक आधारित इस व्यवस्था का उद्देश्य राशन वितरण में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और खाद्यान्न की निगरानी एवं वितरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
राज्य सरकार का कहना है कि ग्रेन एटीएम केवल राशन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में शुरू हुई यह पहल देश के उन चुनिंदा राज्यों की व्यवस्था में शामिल हो गई है, जहां तकनीक आधारित ग्रेन एटीएम के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। आने वाले समय में इसके अनुभव के आधार पर इस व्यवस्था को और विस्तार देने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।