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हौसलों की उड़ान: रामानुजगंज की रूपा दास ने दिव्यांगता को दी मात, बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
अमर उजाला नेटवर्क, रामानुजगंज
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 13 Sep 2025 04:20 PM IST
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सार
रामानुजगंज नगर पालिका क्षेत्र की 24 वर्षीय रूपा दास कठिन परिस्थितियों और शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद अपनी हिम्मत और जज्बे से ऐसी मिसाल पेश कर रही हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गई है।
रामानुजगंज की रूपा दास ने दिव्यांगता को दी मात
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज नगर पालिका क्षेत्र की 24 वर्षीय रूपा दास कठिन परिस्थितियों और शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद अपनी हिम्मत और जज्बे से ऐसी मिसाल पेश कर रही हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गई है।
वार्ड क्रमांक 8 की रहने वाली रूपा के हाथ-पैर पूरी तरह काम नहीं करते, वह ठीक से बैठ भी नहीं सकतीं, लेकिन उनका हौसला और आत्मविश्वास किसी भी स्वस्थ व्यक्ति से कम नहीं है। बचपन से ही विकलांगता झेलने वाली रूपा ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रामानुजगंज से 12वीं तक पढ़ाई पूरी की और आज वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही वे मंगलसूत्र गुथने का काम भी करती हैं।
शनिवार को जितिया बाजार में रूपा अपनी मां गीत देवी के साथ बैठी हुई पूरे मनोयोग से काम करती नजर आईं। उनके पिता प्रवेश दास का पहले ही निधन हो चुका है, लेकिन मां के सहारे और अपनी लगन से रूपा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।
रूपा का कहना है कि यदि उन्हें लेखन या पठन-पाठन से जुड़े कार्य मिलें तो वे पूरी निष्ठा से उसे कर सकती हैं। वे शासन-प्रशासन से अपेक्षा करती हैं कि ऐसे दिव्यांग जनों के लिए विशेष योजनाएं बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
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वार्ड क्रमांक 8 की रहने वाली रूपा के हाथ-पैर पूरी तरह काम नहीं करते, वह ठीक से बैठ भी नहीं सकतीं, लेकिन उनका हौसला और आत्मविश्वास किसी भी स्वस्थ व्यक्ति से कम नहीं है। बचपन से ही विकलांगता झेलने वाली रूपा ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रामानुजगंज से 12वीं तक पढ़ाई पूरी की और आज वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही वे मंगलसूत्र गुथने का काम भी करती हैं।
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शनिवार को जितिया बाजार में रूपा अपनी मां गीत देवी के साथ बैठी हुई पूरे मनोयोग से काम करती नजर आईं। उनके पिता प्रवेश दास का पहले ही निधन हो चुका है, लेकिन मां के सहारे और अपनी लगन से रूपा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।
रूपा का कहना है कि यदि उन्हें लेखन या पठन-पाठन से जुड़े कार्य मिलें तो वे पूरी निष्ठा से उसे कर सकती हैं। वे शासन-प्रशासन से अपेक्षा करती हैं कि ऐसे दिव्यांग जनों के लिए विशेष योजनाएं बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।