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Chhattisgarh Liquor Scam: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दी राहत
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 03 Feb 2026 04:28 PM IST
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सार
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत में मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने लखमा को अंतरिम जमानत देने का आदेश पारित किया।
शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को मिली जमानत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत में मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने लखमा को अंतरिम जमानत देने का आदेश पारित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान कवासी लखमा छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे। हालांकि, कोर्ट में पेशी के लिए उन्हें राज्य में आने की अनुमति होगी। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना वर्तमान पता व मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य रहेगा।
बता दें कि शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा जेल में बंद थे। प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उन पर आरोप है कि शराब सिंडिकेट के जरिए हुए लगभग 70 करोड़ रुपये के घोटाले की राशि उन्हें कमीशन के रूप में मिली। सुप्रीम कोर्ट में ईडी और ईओडब्ल्यू से जुड़े मामलों की एक साथ सुनवाई हुई, जिसके बाद न्यायालय ने अंतरिम जमानत का फैसला सुनाया।
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान कवासी लखमा छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे। हालांकि, कोर्ट में पेशी के लिए उन्हें राज्य में आने की अनुमति होगी। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना वर्तमान पता व मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य रहेगा।
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बता दें कि शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा जेल में बंद थे। प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उन पर आरोप है कि शराब सिंडिकेट के जरिए हुए लगभग 70 करोड़ रुपये के घोटाले की राशि उन्हें कमीशन के रूप में मिली। सुप्रीम कोर्ट में ईडी और ईओडब्ल्यू से जुड़े मामलों की एक साथ सुनवाई हुई, जिसके बाद न्यायालय ने अंतरिम जमानत का फैसला सुनाया।
