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हाईकोर्ट के आदेश पर सुशील आनंद ने साय सरकार से पूछा सवाल: स्कूलों में मंत्रोच्चार का पाठन अनिवार्य है या नहीं?
Thu, 02 Jul 2026 06:20 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Thu, 02 Jul 2026 06:20 PM IST
सार
CG School: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि हाईकोर्ट का कहना है कि स्कूलों में प्रार्थना में मंत्रोच्चार करने की और भोजन मंत्र पढ़ने की या तमाम तरीके के मंत्र पढ़ने के आदेश छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया उसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, सीएम विष्णुदेव साय
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
CG School: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि हाईकोर्ट का कहना है कि स्कूलों में प्रार्थना में मंत्रोच्चार करने की और भोजन मंत्र पढ़ने की या तमाम तरीके के मंत्र पढ़ने के आदेश छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया उसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। अब सरकार ये स्पष्ट करे कि स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों के लिए मीडिया में मंत्रोच्चार पाठन की अनिवार्य करने का जो आदेश चल रहा है। वो सही है या नहीं। मीडिया में चल रहा यह आदेश काल्पनिक है या सही?
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उन्होंने कहा कि मीडिया में शिक्षा मंत्री का बयान आया है। इस मामले में हाईकोर्ट का निर्णय बेहद अचंभित करने वाला मामला है। हाईकोर्ट का इस मामले में यह कहना की मंत्र पढ़ाने की अनिवार्यता लागू करने के कोई प्रमाण नहीं प्रस्तुत नहीं किया गया। सरकार बताये क्या सरकार ने वास्तव में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है?
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प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शुक्ला ने कहा कि भाजपा सरकार स्कूलों को आरएसएस की शाखा में परिवर्तित करना चाह रही। भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों में सुबह दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, मध्यान्ह में भोजन मंत्र, शाम को छुट्टी होने पर गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का वाचन बच्चों से कराया जाना संविधान के खिलाफ है।
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प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 28(1) का संदर्भः भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28(1) के तहत पूर्णतः राज्य-निधि से संचालित (सरकारी) शिक्षण संस्थानों में किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा या विशिष्ट धार्मिक प्रार्थना आयोजित नहीं की जा सकती।
अनुच्छेद 28(3) एवं धार्मिक स्वतंत्रताः राज्य से मान्यता या सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों में किसी भी छात्र को उसकी या उसके अभिभावकों की सहमति के बिना किसी धार्मिक प्रार्थना में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। आदेश में ‘‘आयोजित किया जाना सुनिश्चित करें’’ शब्दावली से इसे अनिवार्य बनाने का आभास होता है, जो छात्रों के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 25) का उल्लंघन कर सकता है।
अल्पसंख्यक एवं अन्य समुदायः शासकीय और अर्ध-शासकीय शालाओं में विभिन्न धर्मों, पंथों और पृष्ठभूमि के छात्र अध्ययनरत हैं। किसी विशिष्ट पद्धति की प्रार्थनाओं की अनिवार्य करने से धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर प्रभाव पड़ता है।
शुक्ला ने कहा कि सरकारी स्कूलों में मंत्राचार को अनिवार्य करने से दूसरे धर्म के लोगों को ठेस पहुंचेगी। ऐसे में मुस्लिम धर्म के लोग कुरान की आयात तथा सिख धर्म के लोग गुरुवाणी तथा ईसाई धर्म के लोग बाइबल के अंशों को भी वाचन करने की मांग करेंगे। सभी धर्मों में हर दैनिक कार्य के लिए अलग-अलग धार्मिक व्यवस्थायें है। सभी धर्मों के लोग चाहेंगे कि उनकी धार्मिक पूजा पद्धति का अनुसरण हो तब सरकार क्या करेगी? सनातन परंपरा को गैर सनातनियों के बच्चे क्यों माने? उन्हें क्यों बाध्य किया जाए?