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रायपुर: कफ सिरप तस्करी मामले में तीन दोषियों को 20-20 साल की सजा
Thu, 29 Oct 2026 04:43 PM IST
अमन कोशले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 29 Oct 2026 04:43 PM IST
सार
रायपुर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप की तस्करी के मामले में तीन दोषियों को 20-20 साल के सश्रम कारावास और 2-2 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में चौथा आरोपी अब भी फरार है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रायपुर विशेष एनडीपीएस अदालत ने प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री और तस्करी के मामले में तीन दोषियों को 20-20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश किरण थवाईत की अदालत ने तीनों दोषियों पर दो-दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा न करने की स्थिति में दोषियों को दो-दो साल का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
विशेष एनडीपीएस अदालत ने जिन तीन अभियुक्तों को इस मामले में दोषी ठहराकर सजा सुनाई है, उनमें 24 वर्षीय युवराज सिंह चौहान, 29 वर्षीय वाजिद खान और 30 वर्षीय निहाल सिंह शामिल हैं। पुलिस ने जांच के दौरान अदालत के समक्ष वैज्ञानिक और तकनीकी प्रमाण पेश किए थे, जिनके आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया।
ई-रिक्शा से जब्त हुआ था नशीला सिरप
विशेष लोक अभियोजक भुवनलाल साहू के अनुसार यह मामला 15-16 अक्तूबर 2025 की रात का है। आमानाका पुलिस को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि टाटीबंध स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के गेट नंबर चार के पास एक ई-रिक्शा में सवार दो युवक प्रतिबंधित कफ सिरप बेचने की फिराक में ग्राहक की तलाश कर रहे हैं। सूचना मिलते ही आमानाका पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। पुलिस ने ई-रिक्शा में मौजूद युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान को हिरासत में लिया।
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पुलिसकर्मियों ने जब युवकों के पास मौजूद पिट्ठू बैग की तलाशी ली, तो उसमें से नशीले कोडीन फास्फेट सिरप की 40 शीशियां बरामद हुईं। फॉरेंसिक जांच और नापजोख में जब्त सिरप की कुल मात्रा चार हजार मिलीलीटर पाई गई। इसके पश्चात पुलिस ने प्रतिबंधित नशीले सिरप की अवैध खरीद-बिक्री तथा सप्लाई चेन से जुड़े इस पूरे आपराधिक मामले की जांच प्रारंभ की।
दुर्ग जिले से जुड़े थे तस्करी के तार
पुलिस पूछताछ में आरोपी युवराज सिंह और वाजिद खान ने खुलासा किया कि वे प्रतिबंधित सिरप दुर्ग जिले के बीएमवाय चरौदा निवासी निहाल सिंह से खरीदकर लाए थे। इसके बाद पुलिस ने निहाल सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने जांच दौरान नशीले सिरप की सप्लाई, वितरण तंत्र और आरोपियों के आपस में संपर्क से जुड़े विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक तथ्यों को बारी-बारी से जुटाया और आरोपियों के खिलाफ न्यायालय के समक्ष अभियोजन की कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा का एलान
अदालती सुनवाई में पुलिस ने न्यायालय में आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) और जब्त सिरप के नमूनों की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) जांच रिपोर्ट पेश की। अभियोजन पक्ष ने इन तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की आपराधिक भूमिका को अदालत के सामने मजबूती से रखा। विशेष एनडीपीएस अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत ने युवराज सिंह चौहान, वाजिद खान और निहाल सिंह को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सजा दिलवाई गई, जबकि प्रकरण का चौथा आरोपी घटना के बाद से अब तक फरार चल रहा है।
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विशेष एनडीपीएस अदालत ने जिन तीन अभियुक्तों को इस मामले में दोषी ठहराकर सजा सुनाई है, उनमें 24 वर्षीय युवराज सिंह चौहान, 29 वर्षीय वाजिद खान और 30 वर्षीय निहाल सिंह शामिल हैं। पुलिस ने जांच के दौरान अदालत के समक्ष वैज्ञानिक और तकनीकी प्रमाण पेश किए थे, जिनके आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया।
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ई-रिक्शा से जब्त हुआ था नशीला सिरप
विशेष लोक अभियोजक भुवनलाल साहू के अनुसार यह मामला 15-16 अक्तूबर 2025 की रात का है। आमानाका पुलिस को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि टाटीबंध स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के गेट नंबर चार के पास एक ई-रिक्शा में सवार दो युवक प्रतिबंधित कफ सिरप बेचने की फिराक में ग्राहक की तलाश कर रहे हैं। सूचना मिलते ही आमानाका पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। पुलिस ने ई-रिक्शा में मौजूद युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान को हिरासत में लिया।
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पुलिसकर्मियों ने जब युवकों के पास मौजूद पिट्ठू बैग की तलाशी ली, तो उसमें से नशीले कोडीन फास्फेट सिरप की 40 शीशियां बरामद हुईं। फॉरेंसिक जांच और नापजोख में जब्त सिरप की कुल मात्रा चार हजार मिलीलीटर पाई गई। इसके पश्चात पुलिस ने प्रतिबंधित नशीले सिरप की अवैध खरीद-बिक्री तथा सप्लाई चेन से जुड़े इस पूरे आपराधिक मामले की जांच प्रारंभ की।
दुर्ग जिले से जुड़े थे तस्करी के तार
पुलिस पूछताछ में आरोपी युवराज सिंह और वाजिद खान ने खुलासा किया कि वे प्रतिबंधित सिरप दुर्ग जिले के बीएमवाय चरौदा निवासी निहाल सिंह से खरीदकर लाए थे। इसके बाद पुलिस ने निहाल सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने जांच दौरान नशीले सिरप की सप्लाई, वितरण तंत्र और आरोपियों के आपस में संपर्क से जुड़े विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक तथ्यों को बारी-बारी से जुटाया और आरोपियों के खिलाफ न्यायालय के समक्ष अभियोजन की कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा का एलान
अदालती सुनवाई में पुलिस ने न्यायालय में आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) और जब्त सिरप के नमूनों की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) जांच रिपोर्ट पेश की। अभियोजन पक्ष ने इन तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की आपराधिक भूमिका को अदालत के सामने मजबूती से रखा। विशेष एनडीपीएस अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत ने युवराज सिंह चौहान, वाजिद खान और निहाल सिंह को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सजा दिलवाई गई, जबकि प्रकरण का चौथा आरोपी घटना के बाद से अब तक फरार चल रहा है।