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जगदलपुर: बस्तर में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद, ग्रामीणों के विरोध के बाद ईसाई कब्रिस्तान में दफनाया गया शव
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 07:45 PM IST
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सार
बस्तर के मोहलई गांव में मतांतरित महिला के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पारंपरिक मुक्तिधाम में ईसाई रीति से संस्कार का विरोध किया। बैठक के बाद मामला सुलझा और परिवार ने ईसाई कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार किया।
बस्तर में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बस्तर प्रखंड के ग्राम पंचायत मोहलई में एक ईसाई मतांतरित महिला फूलमनी बघेल के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की बैठक के बाद यह मामला सुलझा लिया गया। अंततः परिवार ने मृतका का अंतिम संस्कार ईसाई कब्रिस्तान में किया।
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मोहलई निवासी फूलमनी बघेल की मृत्यु के बाद, उनके परिजन ईसाई रीति-नीति से अंतिम संस्कार करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ग्राम के माहरा समाज के पारंपरिक मुक्तिधाम का उपयोग करने की योजना बनाई थी। ग्रामवासियों को इसकी जानकारी मिलते ही उन्होंने कड़ा विरोध किया। स्थिति को देखते हुए गांव में ग्राम और समाज संगठन की आपात बैठक हुई। इसमें विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। सामाजिक संगठनों और ग्रामवासियों ने कहा कि इस मुक्तिधाम में सदियों से सनातन परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार होता रहा है। किसी अन्य पंथ के रीति-रिवाजों से उनकी संस्कृति और मान्यताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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बजरंग दल विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप ने पारंपरिक मान्यताओं पर बाहरी हस्तक्षेप को अस्वीकार्य बताया। माहरा समाज के पदाधिकारी घनश्याम नाग ने कहा कि सामाजिक समरसता और पुरातन परंपराएं सर्वोपरि हैं। उन्होंने मुक्तिधाम के उपयोग को तय सामाजिक रीति-रिवाजों तक सीमित रखने पर जोर दिया। विहिप बस्तर प्रखंड अध्यक्ष विवेक शुक्ला ने धर्म परिवर्तन के बाद पारंपरिक संसाधनों पर अधिकार समाप्त होने की बात कही। ग्रामीणों और हिंदूवादी संगठनों के कड़े विरोध के बाद, परिवार ने अपनी योजना बदली और मृतका का अंतिम संस्कार ईसाई कब्रिस्तान में किया।
