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दूसरा पहलू: अमेरिका में पक्षियों की संख्या में तेज गिरावट, जानिए क्यों बढ़ रहा है खतरा?

कैटरीन आइन्हॉर्न Published by: Shivam Garg Updated Tue, 17 Mar 2026 07:03 AM IST
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सार

साइंस  पत्रिका के शोध के मुताबिक, अमेरिका में पक्षियों की आबादी में कमी आई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़े पैमाने पर खेती होती है।

Declining Bird Population in the U.S.: Causes and Implications
अमेरिका में पक्षियों की संख्या क्यों घट रही? - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार

अमेरिका में पक्षियों की संख्या लगातार घट रही है और अब यह गिरावट पहले से कहीं अधिक तेज होती जा रही है। साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, 1987 से 2021 के बीच पक्षियों की आबादी में उल्लेखनीय कमी आई है, खासकर उन क्षेत्रों में, जहां बड़े पैमाने पर खेती होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्म और तेजी से गर्म हो रहे इलाकों में यह गिरावट सबसे ज्यादा देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को बढ़ा सकता है। पक्षियों को पृथ्वी पर सबसे अधिक अध्ययन किए गए जीव समूहों में माना जाता है और वे पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत के संकेतक और प्रकृति के प्रहरी भी हैं। इसलिए, उनकी गिरती संख्या गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

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जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के पक्षी वैज्ञानिक पीटर पी मार्रा के अनुसार, जब हम जैव-विविधता और उन प्राकृतिक प्रणालियों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिन पर मानव जीवन निर्भर करता है, तो विकास का सपना धीरे-धीरे संकट में बदल जाता है। अध्ययन में नॉर्थ अमेरिकन ब्रीडिंग बर्ड सर्वे के आंकड़ों का उपयोग किया गया, जिसमें लगभग 25 मील लंबे तय मार्गों पर पक्षियों की नियमित गणना की जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि 1987 में प्रत्येक मार्ग पर औसतन 2,034 पक्षी दर्ज किए गए थे, पर 2017 तक इस संख्या में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट आई।
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शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि पक्षियों की गिरावट समय के साथ तेज होती गई। शुरुआती वर्षों में जहां एक मार्ग पर करीब 10 पक्षी प्रतिवर्ष कम हो रहे थे, वहीं अध्ययन के अंत तक यह संख्या बढ़कर लगभग 19 पक्षी प्रतिवर्ष तक पहुंच गई। वैज्ञानिकों ने 20 अलग-अलग कारकों की जांच की, जिनमें उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग तथा कृषि भूमि का विस्तार शामिल था। नतीजे बताते हैं कि कृषि से जुड़े लगभग सभी संकेतकों का संबंध पक्षियों की तेजी से घटती संख्या से है। हालांकि, उनका मानना है कि असली कारणों को समझने के लिए और शोध की जरूरत है।

कई वैज्ञानिकों का मानना है कि कीटों की घटती संख्या पक्षियों के लिए बड़ा संकट बन रही है। एक अध्ययन के अनुसार, 1970 के बाद जिन पक्षी प्रजातियों की संख्या में सर्वाधिक गिरावट आई, वे वही थीं, जो कीटों पर निर्भर रहती हैं। शहरीकरण, प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना, कांच की इमारतों से टकराव, शिकार व जलवायु परिवर्तन जैसे कई अन्य खतरे भी पक्षियों की संख्या को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि, वनों में रहने वाली कुछ पक्षी प्रजातियों की आबादी स्थिर या बढ़ती हुई दिखाई दी। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि पक्षियों की तेजी से घटती संख्या केवल एक प्रजाति का संकट नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।   ©The New York Times 2026

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