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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: टूट सकता है टीएमसी का अल्पसंख्यक फिक्स्ड वोटबैंक

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सार

चुनाव का मौसम आते ही नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। पार्टी भले ही कोई भी हो, लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने के ट्रेंड से कोई अछूता नहीं रह जाता है। पश्चिम बंगाल चुनावों में भी इसकी छवि स्पष्ट तौर पर देखी जा रही है।

west bengal elections 2026 Trinamool Congress dropped many legislators and shifted MLA
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI Photos
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विस्तार

बंगाल में अल्पसंख्यकों को टीएमसी का फिक्स्ड वोटबैंक माना जाता है। बावजूद इसके काफी संख्या में अल्पसंख्यक विधायकों का टिकट कटा है और चुनाव क्षेत्र भी बदला गया है।

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टिकट से वंचित होने वालों में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर से अब्दुल करीम चौधरी, मालदा के हरिश्चंद्रपुर से तजमुल होसेन, सुजापुर से अब्दुल गनी, मुर्शिदाबाद के फरक्का से मनिरुल इस्लाम, लालगोला से मोहम्मद अली, बेलडांगा से हसनुजम्मा शेख, जलंगी से अब्दुल रज्जाक, उत्तर 24 परगना के बादुरिया से अब्दुल रहीम दिलू, आमडांगा से रफीकुर इस्लाम, देगंगा से रहीमा बीबी, हरोवा से रबीउल इस्लाम, बसिरहाट उत्तर से रफीकुल रहमान, दक्षिण 24 परगना के मगराहाट पश्चिम से गियासुद्दीन लस्कर, पूर्वी मिदनापुर के पांसकूड़ा पश्चिम से फिरोजा बीबी और मुर्शिदाबाद के भरतपुर से पार्टी से निलंबित हुमांयू कबीर शामिल हैं। 
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विधानसभा क्षेत्र बदले जाने वाले अल्पसंख्यक विधायकों की संख्या भी कहीं से कम नहीं है। सबीना याशमीन मालदा के मोथाबारी से सुजापुर, अमीरुल इस्लाम मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज से फरक्का, रुकबानूर रहमान नदिया के चपरा से पलाशीपाड़ा, आईपीएस हुमांयू कबीर को डेबरा से डोमकल और दक्षिण 24 परगना के कैनिंग ईस्ट से भांगर सीट से शौकत मोल्ला को टिकट दिया गया है। इसे लेकर दोनों ही सीटों पर भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है।

भांगर से टिकट के प्रबल दावेदार और पूर्व विधायक आराबुल इस्लाम पहले से ही अलग मोर्चा खोले हुए थे। वैसे भी पार्टी से निलंबन, निष्कासन और वापसी के कारण पिछले कुछ वर्षों में आराबुल इस्लाम और तृणमूल कांग्रेस के बीच दूरियां निरंतर बढ़ रही थी। बार-बार विवादों के चलते आराबुल इस्लाम, तृणमूल कांग्रेस में अपनी अहमियत खो बैठे थे, अंततः महत्वहीन हो जाने के कारण उन्होंने इस्तीफा देकर आईएसएफ जॉइन कर लिया है।

चुनाव से पहले दलबदल की राजनीति

वैसे भी चुनाव का मौसम आते ही नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। पार्टी भले ही कोई भी हो, लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने के ट्रेंड से कोई अछूता नहीं रह जाता है। 

हुमायूं कबीर पहले ही अपनी पार्टी बनाकर चुनावी जंग में कूद चुके हैं। आईएसएफ और एआईएमआईएम, ममता बनर्जी के अल्पसंख्यक वोटबैंक में सेंघ लगा ही रहे थे कि पार्टी के अल्पसंख्यक नेता भी राह को मुश्किल बना रहे हैं। दूसरी तरफ वाममोर्चा और कांग्रेस भी बगैर गठबंधन में गए अलग अलग चुनाव लड़ रहे हैं।

आम जनता उन्नयन पार्टी में हुमायूं कबीर और आईएसएफ में नौशाद सिद्दीकी जैसा बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा है ही, साथ ही वाममोर्चा का नेतृत्व सीपीएम के सचिव और पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम कर रहे हैं। ऐसे में अल्पसंख्यकों का फिक्स्ड वोटबैंक इस बार टूट भी सकता है।

आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक और निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि चुनाव बाद बंगाल में मुस्लिम डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनेगा और मैं मुसलमानों का नेतृत्व करूंगा। हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस पर मुस्लिम समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि तृणमूल कांग्रेस डर गई है इसलिए एससी, ओबीसी और आदिवासियों को अच्छी जगह दी है।

2011 की तुलना में 2016 में मुस्लिम उम्मीदवार कम थे, 2021 में और कम, और 2026 में सबसे कम। दरअसल, उन्हें पता चल गया है कि मुसलमान उनके लिए वोट नहीं करेंगे, इसलिए टिकट नहीं दिए हैं।

निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर यह भी कह रहे हैं कि सरकार बनाने के लिए पार्टी लॉन्च किये हैं, ममता बनर्जी को समर्थन देने के लिए नहीं। साफ कह रहे हैं कि इनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को सरकार बनाने में समर्थन नहीं देगी और ममता बनर्जी के विरुद्ध भवानीपुर में गैर-बंगाली मुस्लिम यानी हिंदी-उर्दू भाषी मुस्लिम उम्मीदवार देगी।

गौरतलब है कि 4 दिसंबर 2025 को इन्हें तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किया गया था, जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई। पिछले साल उन्होंने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बहरहाल, आईएसएफ, एआईएमआईएम, आम जनता उन्नयन पार्टी, सीपीएम और कांग्रेस को अल्पसंख्यक वोट जो भी मिलेगा वह टीएमसी के अल्पसंख्यक वोटबैंक से ही मिलेगा।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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