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अशोक खरात विवाद: ढोंगी बाबाओं के जाल में फंसी ‘रूपालियों’ के चेहरे बेनकाब होने ही चाहिए

Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Mon, 23 Mar 2026 05:54 PM IST
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सार

जिन्हें समाज का रहनुमा माना जाता है, जिन पर देश और प्रदेश और चलाने की जिम्मेदारी है, वो इन ढोंगी बाबाओं के अंधभक्त बनकर आम लोगों को क्या संदेश दे रहे हैं? महाराष्ट्र में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर के इस्तीफे के बाद से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

Kharat controversy Maharashtra State Women Commission Chairperson Rupali Chakankar resignation
रूपाली चाकणकर, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का इस्तीफा - फोटो : mscw.org.in
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विस्तार

यूं राजनीति में आजकल इस्तीफे अमूमन कम ही होते हैं और किसी ढोंगी बाबा से संदिग्ध रिश्तों के कारण किसी महिला नेत्री के त्यागपत्र का संभवत: यह पहला मामला है। ऐसे में महाराष्ट्र में वहां की राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर के इस्तीफे का स्वागत इसलिए किया जाना चाहिए, क्योंकि यह इस्तीफा जिस कारण से इस्तीफा लिया गया है, वह हमारे समाज की संड़ाध का आईना है।

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रूपाली चाकणकर पर आरोप है कि उनके महाराष्ट्र के एक ढोंगी बाबा ‘कैप्टन अशोक खरात’ के साथ संदिग्ध रिश्ते रहे हैं। खुद को ‘गॉडमैन’ और न्यूमरोलॉजिस्ट बताने वाले इस कथित बाबा को हाल में महाराष्ट्र पुलिस ने एक महिला को तीन साल तक नशीली दवाएं पिलाकर रेप करने तथा उसके पास से 58 अश्लील वीडियो बरामद होने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
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पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने कहा कि उसकी शादी के बाद 2022 में खरात ने उसे अपने कार्यालय में बुलाया और कहा कि महिला की ज्योतिषीय गणना उसके पति के जीवन को खतरे की ओर इशारा करती हैं। इससे बचने के लिए कुछ अनुष्ठान करने की आवश्यकता है।

महिला के अनुसार खरात ने उसे बेहोशी की दवा मिला पेय पिला कर दुष्कर्म किया। वह तीन साल तक उसका यौन उत्पीड़न करता रहा। इसी बीच खुलासा हुआ कि इस फर्जी के बाबा के समर्पित भक्तों में रूपाली चाकणकर भी हैं। कहा जाता है कि रूपाली और उनके कारोबारी पति ने हाल में बाबा के कहने पर एक तांत्रिक अनुष्ठान भी किया, जिसके लिए जरूरी रक्त रूपाली ने अपनी अनामिका को काट कर दिया।

रूपाली एक पढ़ी-लिखी महिला हैं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की महिला राज्य इकाई की भी अध्यक्ष भी हैं। वो राजनीतिक परिवार से हैं। उनकी सास भी पूर्व में राकांपा से पार्षद रहीं हैं। लेकिन रूपाली ने भी राजनीति में आगे बढ़ने के लिए ढोंगी बाबा का सहारा लिया। 

फर्जी साधुओं और ढोंगी बाबा का फैला जाल

रूपाली तो एक उदाहरण हैं। इस देश में कई राजनेता फर्जी साधुओं और ढोंगी बाबा के जाल में बुरी तरह उलझे हैं। गहराई से पड़ताल करें तो तकरीबन हर पार्टी में दस-बीस चेहरे आप को मिल जाएंगे, जो अपने राजनीतिक, व्यावसायिक अथवा सत्ता स्वार्थों को पूरा करने के लिए ऐसे ढोंगी बाबाओं की शरण में हैं और उन पर पैसा लुटाते हैं।

कुछ यह काम खुलेआम करते हैं तो कई चोरी छिपे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यह देश आगे जा रहा है या पीछे? वैसे भी इस मुल्क में आजादी के बाद जो धंधा सबसे ज्यादा फला-फूला है, वो बाबाओं और साधुओं का है। 

इनमें से ज्यादातर तो वो हैं, जिनकी न कोई धार्मिक वैधता है और न ही जिनके पास कोई गहरा धार्मिक ज्ञान है, लेकिन वो लोगों की भावनाओं और मजबूरियों का शोषण करने में पीएचडी से भी ज्यादा योग्यता रखते हैं। खास बात ये कि इस धंधे में कभी मंदी नहीं आती, क्योंकि यहां लाखों लोग आस्था के नाम पर मूर्ख बनने और अपना सब कुछ गंवाने के लिए उधार बैठे हैं। 

यूं भी आजकल ढोंगी (और कई असली भी!) बाबाओं का धंधा चमकाने और राजनेताओं को अपनी दुकान चलाते रहने के लिए ऐसे बाबाओं का आश्रय लेना जरूरी लगता है। ये रिश्ता परस्परपूरक है। राजनेताओं की दिलचस्पी बाबा की सिद्धी  और साधना से ज्यादा उसके भीड़ जुटाने के कौशल में रहती है तो बाबा राजनेताओं से इसलिए वैधता चाहते हैं कि इससे उनके धंधे को सुरक्षा कवच और विस्तार  मिल जाता है।

राजनेता किसी सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़ा हो तो और अच्छा तथा ऐसे किसी बाबा का किसी धर्मस्थल पर कब्जा हो तो सोने में सुहागा। क्योंकि इससे आम श्रद्धालु के मन की रही सही शंका भी दफन हो जाती है और बाबा के हर कृत्य को वह ‘गौमाता के पवित्र’ भाव से देखता है, भले ही उसकी भीतरी तस्वीर कितनी ही गंदी क्यों न हो। 

Kharat controversy Maharashtra State Women Commission Chairperson Rupali Chakankar resignation
आरोपी अशोक खरात - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

ढोंगी बाबा अशोक खरात की कहानी

ढोंगी बाबा अशोक खरात की कहानी भी कुछ ऐसी है। वह अपने नाम के आगे ‘कैप्टन’ लिखता है। बताते हैं कि वह कभी मर्चेंट नेवी में रहा था। उस कठिन नौकरी से बाहर आने के बाद उसने बाबागिरी के सौ टंच फायदे वाले धंधे में कदम रखा। वह खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट (अंकशास्त्री) बताकर दूसरों का भविष्य बताने लगा।

बाबा की इस तरक्की के पीछे उस पर महाराष्ट्र के सभी राजनीतिक दलों की मेहरबानी रही है। बाबागिरी के धंधे में उतरने के बाद खरात ने नासिक जिले के मिरगांव में ईशान्येश्वर मंदिर की स्थापना की। इसे शिवनिका संस्थान के नाम से जाना जाता है।

अशोक खरात इस ‘श्री ईशान्येश्वर देवस्थान ट्रस्ट’ का अध्यक्ष बना और रूपाली भी इसमें ट्रस्टी थी। खरात का सरकार में इतना असर था कि उसके संस्थान  को गंगापुर बांध से पानी देने का फैसला हुआ। इसके लिए 48 किमी लंबी पाइपलाइन भी डाली गई। हालांकि सरकार ने अब इस आदेश को रद्द कर इसकी जांच की घोषणा की है। लेकिन इसके पीछे महाराष्ट्र के तत्कालीन जल संसाधन मंत्री और शरद पवार के करीबी जयंत पाटिल का नाम सामने आ रहा है।

इससे इतना तो साफ है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस में खरात की गहरी पैठ थी। अशोक खरात ने अपने हुनर से जल्द ही महाराज का दर्जा का पा लिया, खासी दौलत कमाई और कई जगह निवेश भी किया। बाबा की ख्याति और अंध भक्तों की बढ़ती भीड़ नेताओं के चुनावी अरमानों को हवा देने लगती है। 

रूपाली भी राकांपा अजित पवार गुट में हैं। उन्हें महिला स्व सहायता समूह के लिए अच्छा काम करने के लिए पुरस्कार भी मिल चुका है। गठबंधन की राजनीति ने उसे महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्था का अध्यक्ष बना दिया। ऐसा संगठन जिस पर महिला अधिकारों की रक्षा का जिम्मा था, उसी की अध्यक्ष एक ढोंगी और बलात्कारी बाबा के जाल में फंसकर उसके लिए समर्पित थी। हालांकि अपने बचाव में रूपाली ने कहा कि उन्हें फंसाया गया है।

किसी बाबा के प्रति आस्था रखना उनका निजी मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि इस ‘षडयंत्र’ के पीछे कौन है, सरकार इसकी जांच कराए। हालांकि वो नैतिक आधार पर इस्तीफा दे रही हैं। रूपाली ने बचाव में कहा कि वह ढोंगी बाबा को 2019 से जानती हैं, लेकिन उसके काले कारनामों से अनजान थीं। अब इस भोली अदा पर कौन न मर जाए, ऐ खुदा।

रूपाली अकेली नहीं...

रूपाली तो एक उदाहरण है, जो सामने आ गया है। ऐसे नेताओं की लिस्ट लंबी है जो खुले या छुपे तौर पर ऐसे फर्जी बाबाओं के सेवादार अथवा उनके संरक्षक हैं। ढोंगी बाबा की गिरफ्तारी भी उसी महिला की रिपोर्ट  पर हुई है, जिसके साथ वह बलात्कार करता आ रहा था। पुलिस में रिपोर्ट करने के बाद बाबा ने उस महिला के पति की हत्या करवाने की धमकी भी दी।

उधर पुलिस ने नासिक के  'कनाडा कॉर्नर' स्थित अशोक खरात के कार्यालय "ओक्स प्रॉपर्टी डीलर एंड डेवलपर" पर छापा मारा तो कई अहम सबूत हाथ लगे। जिनमें 58 अश्लील वीडियो भी शामिल हैं, जिसमें कई हाई प्रोफाइल महिलाएं भी शामिल हैं। खरात की कई बड़े राजनेताओंके साथ तस्वीरें भी मिली हैं।

विपक्षी शिवसेना (उद्धव) की फायर ब्रांड नेता सुषमा अंधारे ने रूपाली चाकणकर और ढोंगी बाबा खरात के रिश्तों पर सवाल उठाए। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र नरबलि और अघोरी प्रथा एवं काला जादू निवारण अधिनियम का हवाला देते हुए ठाकरे ने कहा कि ‘यदि कानून का पालन करने वाले लोग ऐसे फर्जी बाबाओं का अनुसरण कर रहे हैं, तो राजनीति में दिखाई देने वाले ऐसे फर्जी अनुयायियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।’’ ऐसे लोगों में राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का नाम भी आ रहा है। 

उधर महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने मामले की गंभीरता  को देखते हुए एक आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। साथ ही खरात के खिलाफ बीएनएस की  विभिन्न धाराओं और 'महाराष्ट्र नरबलि और अन्य अमानवीय, अनिष्टकारी व अघोरी प्रथाएं और काला जादू रोकथाम अधिनियम, 2013' के तहत मामला दर्ज किया है।

ये धाराएं: 64(1) बलात्कार, 74, 352, और 351(1) हैं। साथ ही काला जादू अधिनियम: धारा 3(1) और 3(2) भी लगी है। उधर नासिक कोर्ट ने आरोपी अशोक खरात को 24 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब उन अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है जो खरात के डर से सामने नहीं आ पाई थीं।

यहां असल सवाल यह है कि जिन्हें समाज का रहनुमा माना जाता है, जिन पर देश और प्रदेश और चलाने की जिम्मेदारी है, वो इन ढोंगी बाबाओं के अंधभक्त बनकर आम लोगों को क्या संदेश दे रहे हैं?



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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