फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   history of world cinema Jenny Beavan British costume designer

विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: जेनी बीवन- कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग के लिए तीन ऑस्कर

Tue, 24 Mar 2026 07:52 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Tue, 24 Mar 2026 07:52 PM IST
सार

जेनी बीवन के नाम 76 फिल्म, 45 पुरस्कार हैं, जिनमें तीन ऑस्कर शामिल हैं। पहली बार 1985 में ऑस्कर मिला हॉर्वर्ड फास्ट लिखित उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘ए रूम विद ए व्यू’ के लिए

विज्ञापन
history of world cinema Jenny Beavan British costume designer
सिनेमा की दुनिया - फोटो : Freepik.com

विस्तार

एक स्त्री जिसने एलेक्जेंडर, मुसोलिनी, जेफरसन, आना, अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन, जेन ऑस्टीन आदि जैसे ऐतिहासिक राजनीतिज्ञ-साहित्यकार को वस्त्र पहनाए हैं। शरलक होम्स, एम्मा, जेन एयर जैसे साहित्यिक किरदारों को सजाया, उसको ऑस्कर क्यों न मिले? इस कॉस्ट्यूम डिजाइनर को ऑस्कर मिला, एक बार नहीं तीन बार मिला।

विज्ञापन


जेनी बीवन के नाम 76 फिल्म, 45 पुरस्कार हैं, जिनमें तीन ऑस्कर शामिल हैं।
 

  • पहली बार 1985 में ऑस्कर मिला हॉर्वर्ड फास्ट लिखित उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘ए रूम विद ए व्यू’ के लिए।
  • विज्ञापन
  • दूसरी बार 2015 में ‘मैड मैक्स: फ्यूरी रोड हेतु।
  • तीसरा ऑस्कर प्राप्त हुआ ‘क्रूएला’ के कॉस्ट्यूम डिजाइन के लिए 2021 में।


तीनों फिल्मों के लिए जेनी को बाफ्टा भी मिला एक बार और बाफ्टा मिला 2001 की फिल्म ‘गोस्फोर्ड पार्क’ में वस्त्र विन्यास केलिए। अमेरिका की साइंस फिक्शन, फैंटसी और हॉरर फिल्म्स अकादमी का सर्वोत्तम कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग का 1998 का अवार्ड उन्हें मिला ‘एवेर आफ्टर: ए सिंड्रेला स्टोरी’ केलिए।

विज्ञापन
विज्ञापन


ब्रिटिश एम्पायर का ऑफीसर ऑर्डर 2017 में नव वर्ष सम्मान से नवाजा गया। वैसे उनके सजाए ‘हॉवर्ड्स एंड’ (1992), ‘द रिमेन्स ऑफ द डे’ (1993), ‘सेंस एंड सेन्सिबिलिटी’ (1995) तथा ‘द किंग्स स्पीच’ (2010) पात्रों वाली अन्य चार सर्वोत्तम फिल्म ऑस्कर हेतु नामांकित हुईं।

‘क्रूएला’ का अकल्पनीय कॉस्ट्यूम समीक्षकों की नजर से न बच सका। मैट जोल्लेर सिट्ज इसे आई-ओपनिंग कॉस्ट्यूम की परेड कहते हैं, तो जोश बार्टन अपने रिव्यू में एक कदम आगे बढ़ कर भविष्य बांच देते हैं, उनके अनुसार जेनी बीवन कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग को एक भिन्न स्तर पर ले जाती हैं।

उन्होंने लिखा, आने वाले दिनों इसके साथ केश विन्यास एवं मेकअप विभाग के जितने भी अवार्ड इन विभागों केलिए हैं, वे अवश्य इनके लिए उकेरे जा चुके होंगे, ये सारे अवार्ड ले जाएंगे और ऐसा ही हुआ भी। एक-से-एक 28 पुरस्कार  इस फिल्म को प्राप्त हुए। मात्र कॉस्ट्यूम केलिए भी आप यह फिल्म बार-बार देख सकते हैं।

कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग और इसकी दुनिया

लंदन में 1985 को पैदा हुई जेनी बीवन कहती हैं, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग को फैशन की हवा-हवाई चमकीली दुनिया से जोड़ना सामान्य गलतफहमी है। लोग सोचते हैं, चमकती पोशाक, सितारों के साथ शैम्पेन यही है सब कुछ। मगर असल में यह बहुत ग्लैमर रहित काम है। खून-पसीना बहा कर तमाम दबावों के बीच, कम बजट में लोगों की आशाओं को पूरा करना होता है।

इसमें शक नहीं कि यह बड़ा काम है, मगर जैसा लोग सोचते हैं, यह केवल मजा करना नहीं है। फैशन में मॉडल से अधिक कपड़े देखे जाते हैं, क्योंकि मॉडल तो एक जैसी दुबली-पतली, लंबी लड़कियां होती हैं। मगर सिने कस्ट्यूम में लोग अभिनेता एवं वस्त्र को नहीं पात्र को देखते हैं।

अत: यहां फेब्रिक, रंग, डिजाइन, इतिहास, भगोल, समाज-संस्कृति सबका महत्व होता है। इन्हीं सबको साकार करना कस्टूम डिजाइनिंग है।

आधी सदी से अभिनेताओं को पात्र में परिवर्तित करती जेनी बीवन मानती हैं, वे अभी भी इस क्राफ्ट को सीखने की प्रक्रिया में हैं। हां, वे खुद को इस क्षेत्र में अब अनुभवी मानती हैं। उन्होंने कभी इस विभाग में आने की बात नहीं सोची थी। पढ़ाई की थी, सेट डिजाइनिंग की और अपने मेन्टोर राल्फ की भांति ‘लिटिल राल्फ’ बनने के सपने देखा करती थीं।

मगर बात-बात में संयोग से इस दिशा में मुड़ गईं और यह हुआ 1886 के हेनरी जेम्स के उपन्यास, रूथ झाबवाला के स्क्रीनप्ले आधारित जेम्स आइवरी निर्देशित ‘द बोस्टोनियाज’ (1984) की शूटिंग के दौरान। दो बार प्राइमटाइम एमी पाने वाली जेनी बीवन कहती हैं, ‘मैं एक्टर को उनकी कहानी कहने में कपड़ों द्वारा सहायता करती हूं।


भले ही क्स्ट्यूम डिजाइनर बनने के सपने न देखें हों पर अब वे अपने कैरियर से प्यार करती हैं। वे जिस दुनिया में रहती हैं, उसे प्यार करती हैं। ईमानदारी से काम करती हैं, क्योंकि उन्हें अपनी आजीविका केलिए कोई अन्य काम करना नहीं आता है। अत: वे इसका आनंद उठाती हैं, उठाती रहना चाहती हैं।


---------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed