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Gandhi Jayanti 2019: जिसे पढ़ कर वो बापू की आलोचना करते हैं, वो बातें खुद गांधी जी ने ही बताई हैं

Prachi Priyam Prachi Priyam
Updated Thu, 03 Oct 2019 10:55 AM IST
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Gandhi Jayanti 2019 Bapu life and criticism Mahatma Gandhi writing and ideology
गांधी जी जैसी स्नेहशीलता और दृढ़संकल्प का उदाहरण हमें शायद ही दुनिया के किसी और महापुरुष में मिले।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर उनके बारे में कुछ लिखने से अच्छा होता है उनका लिखा हुआ कुछ पढ़ना। गांधी जी का पूरा व्यक्तित्व ही हमें शिक्षा और संस्कार देने वाला है। दुनिया भर के बुद्धिजीवी भी उनके बारे में लिखने से पहले नतमस्तक होते हैं।

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गांधी जी जैसी स्नेहशीलता और दृढ़संकल्प का उदाहरण हमें शायद ही दुनिया के किसी और महापुरुष में मिले। खड़ाऊ और धोती पर अपने पूरे जीवन को खपा देने वाले, जीवन की प्रतिबद्धता से कभी समझौता नहीं करने वाले, सदभावना और अहिंसा के लिए समर्पित रहने वाले, आत्मनिर्भरता का संदेश देने वाले, स्वतंत्रता और समानता के दूत मां भारती के ऐसे लाल थे गांधी जी।
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गांधी जी का कहना था कि विचारों का प्रसार कठोरता और निर्ममता से नहीं प्रेम और संवाद से होना चाहिए, स्वयं का महिमामंडन न हो इसलिए गांधी जी ने ही था कि "मुझे भगवान मत बनाओ"। आज गांधी जी नहीं हैं लेकिन, उनके विचारों और उनके कामों को अनंतकाल तक याद रखा जायेगा और रखा जाना चाहिए।

राष्ट्रपिता होने के बावजूद कई बार अपने ही देश के लोगों को गांधी जी का विरोध करते देखा जाता है। गांधी जी के ही हवाले से लिखी गई पुस्तकों और उनकी जीवनी को आधार बनाकर कुछ लोग उनपर आज भी हमला करते हैं, उनकी आलोचना करते हैं और यहां तक कि सार्वजनिक जगहों पर उपहास उड़ाते हैं। 
 

Gandhi Jayanti 2019 Bapu life and criticism Mahatma Gandhi writing and ideology
गांधी जी से असहमति होना कोई अपराध नहीं है... असहमति होनी चाहिए - फोटो : फाइल फोटो

क्या यह सत्य नहीं कि बापू के जीवन का वह भाग जिसे पढ़कर कई लोग उनकी आलोचना करते हैं, उसे दुनिया के सामने स्वयं बापू ने ही रखा है। आलोचना करने वाले कथित बुद्धिजीवियों में से क्या कोई अपने अंदर ऐसी निष्ठा रखता है? सत्य यह है कि बापू के त्याग और प्रतिबद्धता के सामने जीवन का यह भाग उनके संघर्षों के आगे कहीं नहीं टिक पाता।

गांधी जी से असहमति होना कोई अपराध नहीं है... असहमति होनी चाहिए लेकिन, आलोचना करते समय हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि गांधी जी केवल देश तक सीमित नहीं हैं। वो दुनिया के लिए एक विचार हैं, एक आत्मा हैं जिसने विनम्रता और करुणा को हथियार बनाकर भारत को स्वतंत्र कराया था। उनसे असहमति स्वीकार की जा सकती है लेकिन, उनका अपमान स्वीकार्य नहीं है।

गांधी जी के जीवन संघर्षों से हमें बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है, एक व्यक्ति जो यूरोप में पढ़ाई करता है, जो दक्षिण अफ्रीका में वकालत करता है, आखिर क्यों वह व्यक्ति सब कुछ त्याग कर भारत आता है और देश की स्वतंत्रता के लिए अहिंसक आंदोलन करता है।

गांधी जी के सिद्धान्तों की तिलांजलि नहीं दी जा सकती है, क्योंकि यह देश की आत्मा में रचा बसा है, आवश्यक है कि हम गांधी जी को खूब पढ़ें और समझें तभी असल मायनों में हम 'गांधी' के साथ न्याय कर पाएंगे।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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