सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   The essence of love is expansion not possession formula for rising above expectations effective

जीवन धारा: प्रेम का अर्थ विस्तार है न कि अधिकार... अपेक्षाओं से ऊपर उठने का सूत्र कारगर

खलील जिब्रान Published by: Jyoti Bhaskar Updated Wed, 29 Apr 2026 08:55 AM IST
विज्ञापन
सार

प्रेम की खासियत यह है कि वह मनुष्य को पूर्ण नहीं करता, बल्कि उसे अपूर्णता का बोध कराता है। यही बोध उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, क्योंकि प्रेम में व्यक्ति जितना देता है, उतना ही वह स्वयं को खोजता भी है।

The essence of love is expansion not possession formula for rising above expectations effective
प्रेम का अर्थ विस्तार है - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

प्रेम उस शाश्वत स्वरूप की तरह है, जो मानव हृदय की गहराई में उतरकर उसे नया जीवन देता है। इसलिए, प्रेम जब भी पुकारे, तो उसके पीछे हो लेना चाहिए, भले ही उसके मार्ग कठिन और दुर्गम क्यों न हों। प्रेम व्यक्ति को अपने अधिकार में नहीं लेता, बल्कि उसे मुक्त करता है, क्योंकि प्रेम का स्वभाव बंधन नहीं, विस्तार है। यह विस्तार ही जीवन का सच्चा सौंदर्य बनता है। इसलिए, प्रेम के पंख जब आलिंगन करें, तो स्वयं को उसे सौंप देना चाहिए। प्रेम रूपी साधना में सुख और पीड़ा, दोनों साथ चलते हैं, क्योंकि प्रेम केवल आनंद देने के लिए नहीं आता, बल्कि आत्मा को तराशने के लिए भी आता है। जिस प्रकार वृक्ष अपने बीज को मिट्टी में दबाकर ही अंकुरित होता है, ठीक उसी तरह मनुष्य को भी अपने अहंकार को छोड़कर ही प्रेम के वास्तविक अर्थ को समझना पड़ता है। जब कोई प्रेम करता है, तब वह अपने भीतर की अनेक परतों को खोलता है और इसी से उसकी सच्ची पहचान जन्म लेती है। सच्चा प्रेम न तो किसी का स्वामित्व स्वीकार करता है और न ही स्वयं किसी का दास बनता है। वह दो आत्माओं के बीच एक ऐसा सेतु है, जहां दोनों अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए एक-दूसरे के साथ चलते हैं। प्रेम का अर्थ यह नहीं कि दो लोग एक ही हो जाएं, बल्कि यह है कि वे अलग-अलग रहते हुए भी एक ही दिशा में आगे बढ़ें और एक-दूसरे के जीवन को समृद्ध करें। इस प्रकार प्रेम में दूरी भी आवश्यक है, क्योंकि यही दूरी निकटता को अर्थ देती है और यही संतुलन संबंधों को स्थायी बनाता है।

Trending Videos


प्रेम की खासियत यह है कि वह मनुष्य को पूर्ण नहीं करता, बल्कि उसे अपूर्णता का बोध कराता है। यही बोध उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, क्योंकि प्रेम में व्यक्ति जितना देता है, उतना ही वह स्वयं को खोजता भी है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पाने की इच्छा धीरे-धीरे देने के आनंद में बदल जाती है और यही परिवर्तन प्रेम को आध्यात्मिक ऊंचाई तक ले जाता है। यह एक सतत प्रवाह है, जो बिना किसी अपेक्षा के बहता रहता है और इसी बहाव में जीवन का संगीत छिपा होता है। प्रेम का स्वभाव अनंत है और इसे किसी परिभाषा में नहीं समेटा जा सकता। इसलिए, जब कोई मनुष्य उसे समझने के बजाय नियंत्रित करने की कोशिश करता है, तब वह उसके सार से दूर हो जाता है। प्रेम को महसूस करने के लिए खुला हृदय चाहिए। इसी खुलेपन से होकर प्रेम भीतर प्रवेश करता है और जीवन को एक नई दिशा देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल, प्रेम एक ऐसी अनुभूति है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़ती है और उसे यह समझने में मदद करती है कि वह केवल एक शरीर नहीं, बल्कि एक व्यापक चेतना का हिस्सा है। जब व्यक्ति इस सत्य को स्वीकार करता है, तब उसका प्रेम सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समस्त सृष्टि तक फैल जाता है और यही विस्तार जीवन का सर्वोच्च अनुभव बन जाता है।

अपेक्षाओं से ऊपर उठने का सूत्र कारगर
प्रेम को महसूस करने की कला सीखें। प्रेम हमें बांधता नहीं, बल्कि भीतर से विस्तृत करता है और हमें स्वयं से मिलाता है। जब हम अपेक्षाओं को छोड़कर देने का आनंद सीखते हैं, तभी प्रेम अपनी सच्ची शक्ति दिखाता है। इसमें सुख और पीड़ा, दोनों शिक्षक बनकर आते हैं, जो हमारे अहंकार को तोड़कर आत्मा को निखारते हैं।

 -द प्रोफेट के अनूदित अंश

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed