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होर्मुज संकटः तेल के खेल में रूस के कूदने से भड़की एक और चिंगारी

Mon, 13 Jul 2026 07:07 PM IST
Hari Verma हरि वर्मा
Updated Mon, 13 Jul 2026 07:07 PM IST
सार

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और रूस की सक्रियता ने पूरी दुनिया की चिंता दोबारा बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। 

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Hormuz Crisis: How Rising Iran-US Tensions And Russia Entry Could Impact Global Oil Prices and Indias Energy
Straight Of Hormuz - फोटो : AI Generated

विस्तार

होर्मुज बंद है। तेल के खेल ने दुनिया के सामने फिर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। ताजा हमले के बाद अमेरिका-ईरान के बीच शांति की तमाम कूटनीतिक कोशिशें कमजोर पड़ गई हैं। रूस के खुलकर सामने आ जाने के बाद संघर्ष के अब और आक्रामक रुख अख्तियार करने के आसार बन गए हैं। पश्चिम एशिया के इस संघर्ष से दुनिया के साथ-साथ भारत भी प्रभावित है। ताजा संकट से उबरने के लिए देश के सामने कई चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

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रूस ने ईरान में अपना प्रलयंकारी विमान टीयू-214 पीवी (Tu-214 PV) तैनात कर दिया है। इस संघर्ष में रूस के खुलकर आने की अपनी वजह है। अमेरिका नहीं चाहता कि कोई रूस से तेल की खरीद करे क्योंकि वह रूस से तेल खरीद को यूक्रेन के खिलाफ रूस की आर्थिक मजबूती मानता है, इसलिए जब-तब अमेरिका ने रूस से तेल न खरीदने के लिए भारत पर दबाव बढ़ाया। टैरिफ बढ़ाने की धमकियां दीं। भारत ने ऊर्जा संकट को देखते हुए न केवल रूस से तेल खरीद जारी रखी बल्कि जून में तो रूस से 34 फीसदी ज्यादा तेल की खरीद की। अमेरिकी धमकियों को दरकिनार कर भारत ने कूटनीति की राह पर अमेरिका, वेनेजुएला और अफ्रीका से भी तेल खरीद जारी रखी।
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जून में भारत का आयात बढ़कर 31 फीसदी पहुंच गया जिसमें बड़ा योगदान कच्चा तेल मद का है। हालांकि भारत अभी 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है। इसमें रूस, अमेरिका, वेनेजुएला, अफ्रीका आदि हैं। रूस ने अमेरिका-ईरान के बीच ताजा संघर्ष में खुलकर कूदकर अमेरिका के खिलाफ पांव पसार दिया है। इस कदम के जरिए वह नाटो के एकाधिकार को भी चुनौती दे रहा है।
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इस संघर्ष से भारत को पहले भी काफी नुकसान झेलना पड़ा है। जून में संघर्ष के दौरान तीन भारतीय नाविक मारे गए। ताजा हमले में एक भारतीय नाविक लापता है। राहत रही कि दस सकुशल बचा लिए गए। जान-माल के नुकसान के अलावा तेल-गैस संकट बढ़ा। गैस एजेंसियों पर बैकलॉग की स्थिति पैदा हुई।

आम लोग त्राहि-त्राहि करते रहे। सरकार ने कीमत की कसौटी पर आम लोगों को 1700 वाला एलपीजी गैस सिलिंडर 950-1000 रुपये में उपलब्ध कराया। अमेरिका-ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही सामान्य होने पर दुनिया के साथ-साथ भारत ने भी राहत की सांस ली थी। 

बरास्ते होर्मुज 60 फीसदी कच्चा तेल, 90 फीसदी एलपीजी की आपूर्ति होती है। जून में भारत ने रूस से अधिक तेल खरीद कर और होर्मुज में आवाजाही सामान्य होने पर तेल, गैस, ऊर्जा का ताजा भंडारण संतोषजनक स्थिति में ला दिया था। ताजा संकट से भले 60 दिनों तक के स्टॉक के कारण देश में तत्काल परेशानी न हो लेकिन यदि यह संघर्ष नहीं थमा तो भविष्य में तेल-गैस के संकट के साथ-साथ महंगाई की मार पड़ना तय है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक 2008 में भी मध्य-पूर्व के भू-राजनीतिक संकट ने तेल के दाम काफी बढ़ा दिए थे।

2010 में तेल उत्पादक देशों ने यह संकट झेला। यूं भी देश में ई-20 (इथेनॉल पेट्रोल) को लेकर विवाद की स्थिति पैदा है। वाहनों के माइलेज से लेकर इंजन के नुकसान को लेकर बहस छिड़ी है। वैश्विक हालात के चलते ऊर्जा संकट झेल रहे देश में ई-20 पेट्रोल को लेकर चुनौती है। अब ताजा संघर्ष के आक्रामक होने पर देश में ऊर्जा संकट के बीच तेल-गैस की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतें नियंत्रित रखना चुनौती बन गई है।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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