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दूसरा पहलू: अंतरिक्ष में तैर रहे वे छत्तीस हजार टुकड़े
Mon, 13 Jul 2026 06:58 AM IST
अमन तिवारी
ऐलिस गोरमैन
ऐलिस गोरमैन
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 13 Jul 2026 06:58 AM IST
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अंतरिक्ष में तैर रहे टुकड़े
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
सत्तर साल पहले तक पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा था। आज पृथ्वी की कक्षा में 15 हजार से अधिक उपग्रह मौजूद हैं, जिनमें लगभग 10 हजार केवल एलन मस्क के स्पेसएक्स के हैं। आने वाले वर्षों में उनके द्वारा लाखों नए उपग्रह लॉन्च करने की योजनाएं इस भीड़ को और बढ़ा सकती हैं। लेकिन, इस विस्तार के साथ अंतरिक्ष में कचरे का संकट भी तेजी से गहराता जा रहा है।इस चुनौती के समाधान के लिए तीन स्तरों पर समानांतर प्रयास जरूरी हैं-अत्याधुनिक तकनीक, प्रभावी नीतियां और जिम्मेदार सोच। अंतरिक्ष कचरे में निष्क्रिय उपग्रह, इस्तेमाल हो चुके रॉकेटों के हिस्से और टूटे हुए अंतरिक्ष यानों के टुकड़े शामिल हैं। पृथ्वी की कक्षा में 10 सेंटीमीटर से बड़े करीब 36 हजार टुकड़े व करोड़ों सूक्ष्म कण मौजूद हैं। ये लगभग सात किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं। इतनी तेज गति के कारण एक छोटी-सी टक्कर भी हजारों नए टुकड़ों को जन्म दे सकती है। यही स्थिति ‘केसलर सिंड्रोम’ का कारण बनती है, जिसमें एक टक्कर से पैदा हुआ मलबा दूसरी टक्करों को जन्म देता है। यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। इसी कारण, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को भी हर वर्ष मलबे से बचने के लिए अपनी दिशा बदलनी पड़ती है। अब तक पुरानी अंतरिक्षीय वस्तुओं को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कराकर जलाना सबसे सामान्य समाधान माना जाता रहा है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रक्रिया से निकलने वाली कालिख और एल्युमिना के कण ओजोन परत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए वैज्ञानिक सक्रिय मलबा निष्कासन (एक्टिव डेब्रिस रिमूवल) तकनीक पर काम कर रहे हैं। चुंबक, हारपून व अन्य आधुनिक प्रणालियों की मदद से निष्क्रिय उपग्रहों को हटाने के प्रयास जारी हैं। साथ ही, ऐसे उपग्रह विकसित किए जा रहे हैं, जो अधिक टिकाऊ हों या मिशन पूरा होने के बाद आसानी से नष्ट किए जा सकें। दूसरी ओर, अंतरिक्ष मलबा नियंत्रण और स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी नीतियों को भी मजबूती दी जा रही है। फिर भी, सबसे बड़ा बदलाव हमारी सोच में आना चाहिए। यदि हम पृथ्वी के साथ-साथ अंतरिक्ष के प्रति भी जिम्मेदारी नहीं निभाते, तो भविष्य में अंतरिक्ष तक हमारी पहुंच भी संकट में पड़ सकती है। इसलिए, अंतरिक्ष के कचरे का मुद्दा पूरी मानवता के सुरक्षित भविष्य से जुड़ी एक बड़ी चुनौती है।
-द कन्वर्सेशन