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दूसरी पारी: अकेले हैं, कमजोर नहीं; आपातकालीन परिस्थितियों के लिए क्या करें तैयारी
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Fri, 19 Jun 2026 08:09 AM IST
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सार
मैं और मेरी पत्नी दोनों साठ पार हैं। बेटा विदेश में है और हम दोनों अकेले एक फ्लैट में रहते हैं। पत्नी थोड़ी बीमार रहती है, इसलिए चिंता होती है कि कोई आकस्मिकता आ गई, तो क्या करूंगा? सोसाइटी में अकेले रह रहे बुजुर्गों को सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. पवन पाठक ने कुछ यों सलाह दी।
लंबी उम्र
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
बुजुर्ग दंपती में से किसी की भी तबीयत अचानक बिगड़ जाए, तो सबसे पहले शांत रहकर स्थिति का आकलन करना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि व्यक्ति होश में है या नहीं तथा उसकी सांस सामान्य रूप से चल रही है अथवा नहीं। यदि चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाए, हाथ-पैरों में अचानक कमजोरी आ जाए या बोलने में कठिनाई हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। सीने में दर्द, सांस फूलना या अत्यधिक पसीना आना हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। ऐसी किसी भी आपातकालीन स्थिति में बिना देर किए अस्पताल पहुंचना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर तुरंत एंबुलेंस (108/112) को कॉल करें। बुजुर्गों की नियमित दवाइयां, मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टर के संपर्क नंबर आसानी से उपलब्ध होने वाली जगहों पर रखना चाहिए।
बुजुर्गों में चोट लगने और अस्पताल में भर्ती होने का एक प्रमुख कारण असंतुलित होकर गिरना है। इसलिए, घर को सुरक्षित बनाना अत्यंत आवश्यक है। बाथरूम और रसोई में एंटी-स्किड मैट बिछानी चाहिए तथा शौचालय व बाथरूम में ग्रैब बार या हैंडरेल लगाए जाने चाहिए। रात में रास्तों को रोशन रखने के लिए नाइट लाइट का उपयोग किया जा सकता है। ढीले कालीन, खुले तार और रास्ते में आने वाली बाधाओं को हटा देना चाहिए। सुनिश्चित करें कि सीढ़ियों पर मजबूत रेलिंग और पर्याप्त रोशनी हो। नॉन-स्लिप चप्पल या जूते पहनने की आदत डालें तथा बिस्तर व कुर्सियों की ऊंचाई ऐसी होनी चाहिए कि उठने-बैठने में आसानी हो।
आपातकालीन परिस्थितियों के लिए घर में कुछ आवश्यक स्वास्थ्य उपकरण और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। इनमें वजन मापने की मशीन, डिजिटल थर्मामीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर और टॉर्च आदि शामिल हैं। फर्स्ट एड किट में कॉटन, गॉज, बैंडेज, मेडिकल टेप, एंटीसेप्टिक क्रीम, कैंची, डिस्पोजेबल दस्ताने तथा आवश्यक प्राथमिक दवाइयां रखी जानी चाहिए। डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखना चाहिए तथा उनकी सूची, समय और खुराक सुरक्षित स्थान पर लिखकर रखें। डॉक्टर की सलाह केे बगैर कोई नई दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। बुजुर्गों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
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अपार्टमेंट के एकाकी बुजुर्गों की सूची बने
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।
बुजुर्गों में चोट लगने और अस्पताल में भर्ती होने का एक प्रमुख कारण असंतुलित होकर गिरना है। इसलिए, घर को सुरक्षित बनाना अत्यंत आवश्यक है। बाथरूम और रसोई में एंटी-स्किड मैट बिछानी चाहिए तथा शौचालय व बाथरूम में ग्रैब बार या हैंडरेल लगाए जाने चाहिए। रात में रास्तों को रोशन रखने के लिए नाइट लाइट का उपयोग किया जा सकता है। ढीले कालीन, खुले तार और रास्ते में आने वाली बाधाओं को हटा देना चाहिए। सुनिश्चित करें कि सीढ़ियों पर मजबूत रेलिंग और पर्याप्त रोशनी हो। नॉन-स्लिप चप्पल या जूते पहनने की आदत डालें तथा बिस्तर व कुर्सियों की ऊंचाई ऐसी होनी चाहिए कि उठने-बैठने में आसानी हो।
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आपातकालीन परिस्थितियों के लिए घर में कुछ आवश्यक स्वास्थ्य उपकरण और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। इनमें वजन मापने की मशीन, डिजिटल थर्मामीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर और टॉर्च आदि शामिल हैं। फर्स्ट एड किट में कॉटन, गॉज, बैंडेज, मेडिकल टेप, एंटीसेप्टिक क्रीम, कैंची, डिस्पोजेबल दस्ताने तथा आवश्यक प्राथमिक दवाइयां रखी जानी चाहिए। डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखना चाहिए तथा उनकी सूची, समय और खुराक सुरक्षित स्थान पर लिखकर रखें। डॉक्टर की सलाह केे बगैर कोई नई दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। बुजुर्गों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
अपार्टमेंट के एकाकी बुजुर्गों की सूची बने
- 5-10 जिम्मेदार युवाओं की एक स्वयंसेवी टीम बने, जो बुजुर्गों की नियमित देखभाल में सहयोग करे।
- सुरक्षा गार्डों को यह जिम्मेदारी दी जाए कि वे अकेले रहने वाले बुजुर्गों पर विशेष नजर रखें।
- नियमित स्वास्थ्य चेकअप की व्यवस्था हो।
- सोसाइटी में इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम उपलब्ध हो, जिससे संकट की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।
- परिसर में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर जैसी जरूरी सुविधाएं मौजूद हों।
- पड़ोसियों को समय-समय पर बुजुर्गों का हालचाल लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- यदि किसी बुजुर्ग के घर से लंबे समय तक कोई गतिविधि न दिखे, तो तुरंत जांच की जाए।
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।