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दूसरा पहलू: दूसरों को देख हमें भी जम्हाई क्यों आती है? आमतौर पर लोग दिन में इतनी बार यह प्रतिक्रिया करते हैं
अमर उजाला
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 14 Jan 2026 07:11 AM IST
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सार
Why We Yawn: क्या आपने गौर किया है कि किसी को जम्हाई लेते देखते ही आपको भी जम्हाई आने लगती है? वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रतिक्रिया सामाजिक जुड़ाव और मानसिक तालमेल का संकेत मानी जाती है। आइए जम्हाई से जुड़ी हुई सभी बातों को जानते हैं।
जम्हाई आने के कारण
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
जम्हाई लेना एक बिल्कुल सहज प्रक्रिया है। इसमें आप अपना मुंह खोलते हैं, गहरी सांस लेते हैं और अनजाने में हवा अंदर खींच लेते हैं। यह तब भी हो सकता है जब आप थके हों, ऊब महसूस कर रहे हों या बस जाग रहे हों। आमतौर पर एक व्यक्ति दिन में छह से 23 बार तक जम्हाई लेता है और यह आदत सिर्फ इन्सानों तक सीमित नहीं, जानवर भी जम्हाई लेते हैं।
आपने शायद देखा होगा कि जब आप किसी और को जम्हाई लेते हुए देखते हैं, तो आपको भी अक्सर जम्हाई आती है। यह अपने आप होने वाली ऐसी प्रतिक्रिया लगती है, मानो जिस पर हमारा कोई बस न हो। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पूरी तरह जन्मजात नहीं होती। हम इसके साथ पैदा नहीं होते, बल्कि इसे धीरे-धीरे सीखते हैं। असल में एक-दूसरे को देखकर जम्हाई लेना लगभग चार या पांच साल की उम्र में शुरू होता है, जब बच्चे दूसरों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझना शुरू करते हैं।
इसलिए, बिना सोचे-समझे, किसी को जम्हाई लेते देखकर आपको भी जम्हाई लेने का मन कर सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, लोग ज्यादा जम्हाई तब लेते हैं, जब वे किसी ऐसे व्यक्ति को ऐसा करते हुए देखते हैं, जिसे वे अच्छी तरह से जानते हैं, जैसे कोई दोस्त या माता-पिता। जब आप किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को जम्हाई लेते हुए देखते हैं, तो आपका दिमाग उनकी भावनाओं को समझता है, और आप भी वैसा करने लगते हैं।
पक्षी, सरीसृप और मछलियां भी जम्हाई लेती हैं। कुछ अन्य जानवर जैसे कुत्ते और चिंपैंजी भी एक-दूसरे को देखकर जम्हाई लेते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन्सानों को सिर्फ अपने पालतू जानवरों से ही नहीं, बल्कि अन्य जानवरों को देखकर भी जम्हाई आ सकती है, चाहे वे उससे परिचित हों या नहीं। इससे पता चलता है कि जम्हाई हमें एक-दूसरे से जोड़ने और समझने में मदद करती है, चाहे वह कोई इन्सान हो या कोई जानवर।
दरअसल, हमारे मस्तिष्क में कुछ खास कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें ‘मिरर न्यूरॉन्स’ कहा जाता है। ये न्यूरॉन्स तब सक्रिय होती हैं, जब हम किसी को कोई काम करते हुए देखते हैं, और ये कोशिकाएं हमें भी वही काम करने का एहसास दिलाती हैं, जैसे जम्हाई लेना। ऐसा लगता है, जैसे हमारा दिमाग सामने वाले व्यक्ति की क्रिया की नकल कर रहा हो। तो, अगली बार जब आप किसी को जम्हाई लेते हुए देखें और आपको भी जम्हाई लेने का मन करे, तो आप समझ जाएं कि यह आपके दिमाग का दोस्तों, परिवार और यहां तक कि पालतू जानवरों के साथ कनेक्शन बनाने का एक तरीका है।
जोहाना सिम्किन
एक-दूसरे को देखकर जम्हाई लेना लगभग बचपन में शुरू होता है, जब बच्चे दूसरों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझना शुरू करते हैं। हमारे मस्तिष्क में पाए जाने वाले ‘मिरर न्यूरॉन्स’ तब सक्रिय होते हैं, जब हम किसी को कोई काम करते हुए देखते हैं, और ये हमें भी वही काम करने का एहसास दिलाते हैं, जैसे जम्हाई लेना।
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आपने शायद देखा होगा कि जब आप किसी और को जम्हाई लेते हुए देखते हैं, तो आपको भी अक्सर जम्हाई आती है। यह अपने आप होने वाली ऐसी प्रतिक्रिया लगती है, मानो जिस पर हमारा कोई बस न हो। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पूरी तरह जन्मजात नहीं होती। हम इसके साथ पैदा नहीं होते, बल्कि इसे धीरे-धीरे सीखते हैं। असल में एक-दूसरे को देखकर जम्हाई लेना लगभग चार या पांच साल की उम्र में शुरू होता है, जब बच्चे दूसरों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझना शुरू करते हैं।
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इसलिए, बिना सोचे-समझे, किसी को जम्हाई लेते देखकर आपको भी जम्हाई लेने का मन कर सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, लोग ज्यादा जम्हाई तब लेते हैं, जब वे किसी ऐसे व्यक्ति को ऐसा करते हुए देखते हैं, जिसे वे अच्छी तरह से जानते हैं, जैसे कोई दोस्त या माता-पिता। जब आप किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को जम्हाई लेते हुए देखते हैं, तो आपका दिमाग उनकी भावनाओं को समझता है, और आप भी वैसा करने लगते हैं।
पक्षी, सरीसृप और मछलियां भी जम्हाई लेती हैं। कुछ अन्य जानवर जैसे कुत्ते और चिंपैंजी भी एक-दूसरे को देखकर जम्हाई लेते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन्सानों को सिर्फ अपने पालतू जानवरों से ही नहीं, बल्कि अन्य जानवरों को देखकर भी जम्हाई आ सकती है, चाहे वे उससे परिचित हों या नहीं। इससे पता चलता है कि जम्हाई हमें एक-दूसरे से जोड़ने और समझने में मदद करती है, चाहे वह कोई इन्सान हो या कोई जानवर।
दरअसल, हमारे मस्तिष्क में कुछ खास कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें ‘मिरर न्यूरॉन्स’ कहा जाता है। ये न्यूरॉन्स तब सक्रिय होती हैं, जब हम किसी को कोई काम करते हुए देखते हैं, और ये कोशिकाएं हमें भी वही काम करने का एहसास दिलाती हैं, जैसे जम्हाई लेना। ऐसा लगता है, जैसे हमारा दिमाग सामने वाले व्यक्ति की क्रिया की नकल कर रहा हो। तो, अगली बार जब आप किसी को जम्हाई लेते हुए देखें और आपको भी जम्हाई लेने का मन करे, तो आप समझ जाएं कि यह आपके दिमाग का दोस्तों, परिवार और यहां तक कि पालतू जानवरों के साथ कनेक्शन बनाने का एक तरीका है।
जोहाना सिम्किन
एक-दूसरे को देखकर जम्हाई लेना लगभग बचपन में शुरू होता है, जब बच्चे दूसरों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझना शुरू करते हैं। हमारे मस्तिष्क में पाए जाने वाले ‘मिरर न्यूरॉन्स’ तब सक्रिय होते हैं, जब हम किसी को कोई काम करते हुए देखते हैं, और ये हमें भी वही काम करने का एहसास दिलाते हैं, जैसे जम्हाई लेना।