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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   World Book Day: The Special Significance of Books in Our Ancient Culture

विश्व पुस्तक दिवस : हमारी प्राचीन संस्कृति में पुस्तकों का विशेष महत्व

Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Thu, 23 Apr 2026 06:34 AM IST
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सार

विश्व पुस्तक दिवस पहली बार 23 अप्रैल 1995 को मनाया गया था और तब से हर वर्ष इसी तिथि को मनाया जाता है। आज के समय में जागरूक पाठकों की आवश्यकता पहले से अधिक है। ऐसे में विश्व पुस्तक दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।

World Book Day: The Special Significance of Books in Our Ancient Culture
बदलते समय में भी कायम पाठकों की रुचि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हमारी प्राचीन संस्कृति में पुस्तकों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पौराणिक ग्रंथ और पांडुलिपियाँ इसके जीवंत उदाहरण हैं। शहरों में अब ग्रंथालय धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 1995 से प्रतिवर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य पुस्तकों के महत्व को समझाना, कॉपीराइट के प्रति जागरूकता फैलाना तथा प्रकाशन को बढ़ावा देना है।

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आज का दौर मोबाइल और डिजिटल माध्यमों का है। ऐसे में युवाओं की पुस्तकों के प्रति घटती रुचि चिंता का विषय बन गई है। दो-तीन दशक पहले शहर में अनेक पुस्तकालय थे, जहाँ पाठकों की भीड़ यह दर्शाती थी कि यह पढ़ने-लिखने वालों का शहर है। समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ी और कई पुस्तकालयों के साथ-साथ साहित्यिक पुस्तकों की दुकानें भी बंद हो गईं।

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हालांकि, यह भी सत्य है कि आज भी पुस्तकों की खरीद हो रही है और पाठक उन्हें पढ़ रहे हैं। भारत पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में विश्व में छठे स्थान पर है, जबकि अंग्रेजी साहित्य के प्रकाशन में अमेरिका के बाद भारत का दूसरा स्थान है।

अक्सर कहा जाता है कि लोग पुस्तकों से दूर हो रहे हैं, लेकिन भव्य पुस्तक दुकानों और मेलों में उमड़ती भीड़ इस धारणा को गलत साबित करती है। शहर में आज भी कई पुस्तक दुकानें पाँच-छह दशकों से संचालित हो रही हैं। हाल ही में आयोजित पुस्तक मेलों में पाठकों की भीड़ ने यह प्रमाणित किया है कि पढ़ने की रुचि अभी भी जीवित है।

वर्ष 2025 में पुणे में आयोजित पुस्तक महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि पुस्तकों का भविष्य उज्ज्वल है। इस नौ दिवसीय मेले में लगभग 13 लाख पुस्तक प्रेमियों ने भाग लिया और 50 करोड़ रुपये से अधिक की पुस्तकों की बिक्री हुई, जो एक रिकॉर्ड है। दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में भी बड़ी संख्या में पाठकों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि पुस्तकें आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

पुस्तक विक्रेताओं की राय
शहर की सबसे पुरानी पुस्तक दुकान ‘रूपायन’ के संचालक हितेश रूपायन का कहना है कि पुस्तकों का भविष्य आज भी सुरक्षित है। उनके अनुसार, उनके नियमित ग्राहक हैं और दुकान का 60 वर्षों से अधिक समय तक संचालित रहना इसका प्रमाण है।

इसी प्रकार ‘रीडर्स पैराडाइज’ के जुनेद भाई अपने दादाजी की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियाँ इस व्यवसाय से जुड़ी हैं। वहीं ‘सर्वोदय साहित्य भंडार’ आज भी हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

खजुरी बाजार में रविवार को लगने वाले पुराने पुस्तकों के बाजार में विनोद जोशी दुर्लभ और ऐतिहासिक पुस्तकों को एकत्र कर पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनके अनुसार, कई पुस्तक प्रेमी विशेष पुस्तकों के लिए सीधे उनके घर से ही संपर्क करते हैं।

ग्रंथपालों का दृष्टिकोण
अहिल्या लाइब्रेरी के ग्रंथपाल जी. डी. अग्रवाल का कहना है कि यह धारणा गलत है कि लोग पुस्तकें नहीं पढ़ते। उनके अनुसार, आज भी लोग पुस्तकें खोजने आते हैं और उन्हें पढ़ने के लिए ले जाते हैं। हिंदी साहित्य समिति के ग्रंथालय में भी कई दुर्लभ पुस्तकें उपलब्ध हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए शोधार्थी आते हैं। विश्वविद्यालयों और आधुनिक रीडिंग लाइब्रेरी में आज भी विद्यार्थियों और पाठकों की भीड़ देखी जा सकती है।

साहित्यकारों की सोच
प्रख्यात साहित्यकार सूर्यकांत नागर का मानना है कि लिखे हुए शब्दों का महत्व कभी समाप्त नहीं होगा। उनके अनुसार, “सौ बार कहा गया एक बार लिखे हुए के बराबर नहीं होता।” लिखित शब्द हमेशा प्रमाण के रूप में मौजूद रहते हैं और पुस्तकों का प्रकाशन तथा अध्ययन निरंतर चलता रहेगा।

क्यों मनाया जाता है विश्व पुस्तक दिवस
विश्व पुस्तक दिवस, जिसे पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस भी कहा जाता है, का उद्देश्य पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना, प्रकाशन उद्योग को प्रोत्साहित करना और कॉपीराइट के प्रति जागरूकता फैलाना है। पहली बार यह दिवस 23 अप्रैल 1995 को मनाया गया था और तब से हर वर्ष इसी तिथि को मनाया जाता है। आज के समय में जागरूक पाठकों की आवश्यकता पहले से अधिक है। ऐसे में विश्व पुस्तक दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।

अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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