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मंजिलें और भी हैं : भूखे और जरूरतमंदों को हर वक्त मिलता है खाना
Wed, 21 Aug 2019 12:44 AM IST
मीनू पॉलिन
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Published by: मीनू पॉलिन
Updated Wed, 21 Aug 2019 12:44 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
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मैं केरल के एर्नाकुलम जिले की रहने वाली हूं। पढ़ाई के बाद मैं एक बैंक में नौकरी करने लगी। हालांकि थोड़े समय बाद ही मेरा मन नौकरी से उचट गया। जनवरी, 2014 में मैंने जब नौकरी छोड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचा, उस समय मेरा इरादा था कि व्यवसाय के साथ-साथ गरीबों के लिए भी कुछ कर सकूं। नौकरी छोड़ने के बाद मैंने पाप्पडवडा रेस्तरां की स्थापना की। रेस्त्रां ठीक से चल रहा था।
एक दिन मैं रेस्तरां से बाहर निकल रही थी, तभी देखा कि एक महिला रेस्तरां के ट्रैश-बिन में फेंका गया खाना उठाकर एक प्लेट में रख रही थी, इसके बाद प्लेट से निकालकर वह उसे खाने लगी। रेस्तरां के ठीक सामने हुई इस घटना ने मुझे हिलाकर रख दिया। मैं कुछ देर सोचती रही, फिर एक विचार दिमाग में आया और मैंने इस मुहिम कि शुरुआत की। मैंने उन सभी को, जिन्हें साफ-सुथरा खाना नहीं मिल पाता है, प्रतिदिन खाना मुहैया कराने का निर्णय लिया।
मैंने अपने रेस्तरां के बाहर एक फ्रिज लगाया, जिसमें कोई भी साफ खाना लाकर रख सकता है और कोई भी भूखा उसमें से खाना निकालकर खा सकता है। इस मुहिम का नाम मैंने 'रेफ्रिजरेटर ऑफ लव' रखा। यानी एक ऐसा फ्रिज, जहां किसी को भी मुफ्त में भोजन मिल सकता है।
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इस फ्रिज से खाना खाने के लिए व्यक्ति को पैसे की जगह थोड़ी-सी दुआ देनी होती है और टिप के नाम पर थोड़ा-सा प्यार। इस मुहिम का मकसद गरीबों को मुफ्त भोजन कराना और समाज में हो रही खाने की बर्बादी को रोकना है।
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एक दिन मैं रेस्तरां से बाहर निकल रही थी, तभी देखा कि एक महिला रेस्तरां के ट्रैश-बिन में फेंका गया खाना उठाकर एक प्लेट में रख रही थी, इसके बाद प्लेट से निकालकर वह उसे खाने लगी। रेस्तरां के ठीक सामने हुई इस घटना ने मुझे हिलाकर रख दिया। मैं कुछ देर सोचती रही, फिर एक विचार दिमाग में आया और मैंने इस मुहिम कि शुरुआत की। मैंने उन सभी को, जिन्हें साफ-सुथरा खाना नहीं मिल पाता है, प्रतिदिन खाना मुहैया कराने का निर्णय लिया।
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मैंने अपने रेस्तरां के बाहर एक फ्रिज लगाया, जिसमें कोई भी साफ खाना लाकर रख सकता है और कोई भी भूखा उसमें से खाना निकालकर खा सकता है। इस मुहिम का नाम मैंने 'रेफ्रिजरेटर ऑफ लव' रखा। यानी एक ऐसा फ्रिज, जहां किसी को भी मुफ्त में भोजन मिल सकता है।
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इस फ्रिज से खाना खाने के लिए व्यक्ति को पैसे की जगह थोड़ी-सी दुआ देनी होती है और टिप के नाम पर थोड़ा-सा प्यार। इस मुहिम का मकसद गरीबों को मुफ्त भोजन कराना और समाज में हो रही खाने की बर्बादी को रोकना है।
एक तरफ जहां मेरे रेस्तरां में संपन्न लोग आते हैं और पैसे देकर भोजन करते हैं, वहीं बाहर इस कम्युनिटी रेफ्रिजरेटर में हर वक्त खाद्य पदार्थ खाने के लिए मौजूद रहता है। यहां के गरीब और जरूरतमंदों को इस बात की जानकारी भी है और वे अपनी जरूरत के हिसाब से फ्रिज से सामान निकालकर खाते हैं। इस फ्रिज में कोई भी अपने घर से खाने की सामग्री लाकर रख सकता है, इसके अलावा इसमें रेस्त्रां में बचा हुआ साफ खाना भी रखा जाता है।
फ्रिज में रखे खाने को सिर्फ गरीब एवं जरूरतमंद लोग ही खा सकते हैं। रेफ्रिजरेटर में रोजाना पचास से सौ पैकेट खाना रखा जाता है। इसके साथ ही मैंने इवेंट मैनेजर्स, पार्टी मेकर्स और अन्य रेस्तरां मालिकों से बचे हुए, पर ताजा और खाने लायक खाने को तरीके से पैक कर 'रेफ्रिजरेटर ऑफ लव' में जमा करने की भी अपील की है। इस 420 लीटर के रेफ्रिजरेटर को 24 घंटे चलाने के लिए बिजली का खर्चा मेरा रेस्तरां ही उठाता है।
इस कम्युनिटी रेफ्रिजरेटर के पास एक सीसीटीवी कैमरा और सुरक्षा गार्ड्स भी तैनात किए गए हैं, जो रेस्तरां के साथ इसकी सुरक्षा करते हैं। इनकी मदद से खाने-खिलाने का यह सिलसिला निर्बाध रूप से हफ्ते के सातों दिन और चौबीसों घंटे चलता रहता है। खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए हमने लोगों से खाने के पैकेट्स पर खाना बनाए जाने की तारीख लिखने का आग्रह किया है, जिससे खराब खाने को हटाया जा सके।
हम अक्सर रेस्तरां जाते हैं और कई बार वहां खाना बच जाता है, जो अंत में फेंक दिया जाता है। मैं खाने की इस बर्बादी को रोकना चाहती थी और इससे अच्छा तरीका नहीं हो सकता था कि मैं बचे हुए खाने को फेंकने के बजाय गरीबों एवं जरूरतमंदों में बांट दूं। भोजन प्रकृति का अनमोल उपहार है, और लोगों को इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए। इस पहल का एकमात्र उद्देश्य वैसे लोगों को भोजन देना है, जो इसे खरीद नहीं सकते हैं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।
फ्रिज में रखे खाने को सिर्फ गरीब एवं जरूरतमंद लोग ही खा सकते हैं। रेफ्रिजरेटर में रोजाना पचास से सौ पैकेट खाना रखा जाता है। इसके साथ ही मैंने इवेंट मैनेजर्स, पार्टी मेकर्स और अन्य रेस्तरां मालिकों से बचे हुए, पर ताजा और खाने लायक खाने को तरीके से पैक कर 'रेफ्रिजरेटर ऑफ लव' में जमा करने की भी अपील की है। इस 420 लीटर के रेफ्रिजरेटर को 24 घंटे चलाने के लिए बिजली का खर्चा मेरा रेस्तरां ही उठाता है।
इस कम्युनिटी रेफ्रिजरेटर के पास एक सीसीटीवी कैमरा और सुरक्षा गार्ड्स भी तैनात किए गए हैं, जो रेस्तरां के साथ इसकी सुरक्षा करते हैं। इनकी मदद से खाने-खिलाने का यह सिलसिला निर्बाध रूप से हफ्ते के सातों दिन और चौबीसों घंटे चलता रहता है। खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए हमने लोगों से खाने के पैकेट्स पर खाना बनाए जाने की तारीख लिखने का आग्रह किया है, जिससे खराब खाने को हटाया जा सके।
हम अक्सर रेस्तरां जाते हैं और कई बार वहां खाना बच जाता है, जो अंत में फेंक दिया जाता है। मैं खाने की इस बर्बादी को रोकना चाहती थी और इससे अच्छा तरीका नहीं हो सकता था कि मैं बचे हुए खाने को फेंकने के बजाय गरीबों एवं जरूरतमंदों में बांट दूं। भोजन प्रकृति का अनमोल उपहार है, और लोगों को इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए। इस पहल का एकमात्र उद्देश्य वैसे लोगों को भोजन देना है, जो इसे खरीद नहीं सकते हैं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।