जीवन धारा: मुश्किल वक्त में ही चरित्र की पहचान होती है, हालात से ऊपर उठना ही कारगर सूत्र
युद्ध हो या शांति, समृद्धि हो या अभाव, सफलता हो या असफलता, मनुष्य का वास्तविक चरित्र इस बात से सामने आता है कि वह इन परिस्थितियों के बीच कैसा व्यवहार करता है।
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मनुष्य अक्सर यह सोचकर जीवन जीता है कि यदि परिस्थितियां उसके अनुकूल होंगी, तभी वह सुखी और सफल हो सकेगा। वह चाहता है कि रास्ते में कोई बाधा न आए, लोग उसके अनुसार व्यवहार करें और भविष्य उसकी योजनाओं के मुताबिक आगे बढ़े। लेकिन, जीवन कभी इतना सरल नहीं होता। हमारे सामने ऐसी घटनाएं आती रहती हैं, जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। हम दूसरों के निर्णयों को नहीं बदल सकते और हर कठिनाई को अपनी इच्छानुसार समाप्त नहीं कर सकते। फिर भी, इन सबके बीच हमारे पास एक ऐसी स्वतंत्रता रहती है, जिसे कोई परिस्थिति हमसे नहीं छीन सकती। वह है अपने आचरण को चुनने की स्वतंत्रता। युद्ध हो या शांति, समृद्धि हो या अभाव, सफलता हो या असफलता, मनुष्य का वास्तविक चरित्र इस बात से सामने आता है कि वह इन परिस्थितियों के बीच कैसा व्यवहार करता है। अनुकूल समय में शांत और विनम्र बने रहना आसान हो सकता है, लेकिन मुश्किल समय में भी अपने भीतर की मानवता को बचाए रखना कहीं अधिक कठिन है।
जब जीवन हमारी योजनाओं को तोड़ देता है, तब हमारे सामने एक नया प्रश्न खड़ा होता है कि अब हम क्या करेंगे? क्या हम परिस्थितियों को दोष देते रहेंगे, या जो कुछ हमारे हाथ में है, उसके आधार पर आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे? कई बार हमें लगता है कि हमारा जीवन दूसरों के निर्णयों से तय हो रहा है। कोई हमारा विश्वास तोड़ देता है और कभी ऐसी घटना घट जाती है, जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की होती। उस समय मनुष्य स्वयं को परिस्थितियों का शिकार समझने लगता है। लेकिन, कठिनाइयों के बीच भी उसके पास अपने व्यवहार को नियंत्रित करने और यह तय करने की शक्ति होती है कि वह अपने भीतर कड़वाहट को जगह देगा या समझ व धैर्य को।
जीवन की सबसे बड़ी भूल शायद यही है कि हम परिणामों को अपने नियंत्रण में मान लेते हैं। हम मेहनत कर सकते हैं, लेकिन सफलता की गारंटी नहीं दे सकते। हम प्रेम कर सकते हैं, लेकिन सामने वाला उसी तरह प्रेम करेगा, यह तय नहीं कर सकते। इसलिए, जीवन की शांति इस बात में नहीं है कि हमारे साथ हमेशा वही हो, जो हम चाहते हैं। शांति इस समझ में है कि जो हमारे हाथ में है, उसे पूरी ईमानदारी से करें और जो हमारे हाथ में नहीं है, उसे स्वीकार करना सीखें।
परिस्थितियां हमारे जीवन की कहानी का एक हिस्सा लिख सकती हैं, लेकिन उस कहानी में हम किस तरह के मनुष्य बने रहेंगे, इसका चुनाव काफी हद तक हमारा अपना होता है। इसलिए, जीवन को केवल उन घटनाओं की शृंखला के रूप में नहीं देखना चाहिए, जिन्हें हम बदलना चाहते हैं। उसे उन अवसरों के रूप में भी देखना चाहिए, जिनमें हम अपने चरित्र को आकार देते हैं। हम हर परिस्थिति को नहीं चुन सकते, लेकिन उसके बीच अपने आचरण को चुन सकते हैं। और, कई बार यही छोटा-सा चुनाव हमारे पूरे जीवन का अर्थ बदल देता है। -वॉर एंड पीस के अनूदित अंश
सूत्र: हालात से ऊपर उठें
परिस्थितियां हमारे अनुकूल हों, यह जरूरी नहीं; लेकिन उनके बीच हमारा आचरण हमारे हाथ में होता है। सफलता मिले तो विनम्र रहें, असफलता मिले तो सीखें, और जो बदल नहीं सकते, उसे स्वीकार करना सीखें। परिस्थितियां हमारी कहानी लिख सकती हैं, लेकिन उस कहानी में हम कैसे मनुष्य बनेंगे, इसका चुनाव हमारा है।