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एक और छात्र आंदोलन: शिक्षा-परीक्षा तंत्र में बीमारी की गहरी पैठ, आरोप-प्रत्यारोप से परे धांधलीमुक्त बनना जरूरी

Thu, 06 Aug 2026 04:48 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 06 Aug 2026 04:48 AM IST
सार

जंतर-मंतर के जेन जी आंदोलन की गूंज अभी थमी ही थी कि अब रांची में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन देश के शिक्षा व परीक्षा तंत्र में गहरे तक पैठ जमाई बीमारी का एक और संकेत है, जो किसी एक राज्य की समस्या नहीं रह गई है।

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Jharkhand student protest education exam system Deep malaise beyond blame game malpractice-free process vital
झारखंड में छात्र आंदोलन - फोटो : एएनआई

विस्तार

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (यूजी) पेपर लीक के खिलाफ चले जेन जी आंदोलन की गूंज अभी थमी ही थी कि अब झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और धांधली के खिलाफ छात्रों के आंदोलन ने तेजी से लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है, जो शिक्षा एवं परीक्षा तंत्र की बदहाली को ही दर्शाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार निशाने पर केंद्र नहीं, बल्कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार है।

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गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कुछ छात्र अनिश्चितकालीन धरने और आमरण अनशन पर बैठे हैं। छात्रों की मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक एवं भ्रष्टाचार पर रोक लगे, भर्ती घोटालों की निगरानी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की देखरेख में हो, चयन प्रणाली डिजिटल व पारदर्शी हो, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और पूरे मामले की जांच सीबीआई व ईडी से भी कराई जाए।
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों को निष्पक्ष जांच व न्याय का भरोसा दिया है और छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित भी किया है। इस आंदोलन को कई राजनीतिक, सामाजिक एवं छात्र संगठनों के साथ जंतर-मंतर पर आंदोलन का चेहरा बने सोनम वांगचुक से भी समर्थन मिलने लगा है, जिससे हेमंत सोरेन सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है और वह बैकफुट पर भी दिख रही है।
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जंतर-मंतर के बाद अब रांची की सड़कों पर भी जो आंदोलन दिख रहा है, वह दरअसल देश के शिक्षा तंत्र में गहरे तक पैठ जमाई बीमारी का लक्षण है। देशभर के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और योग्यता के अनुरूप नौकरियों की कमी के कारण व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ी है। यह किसी एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में ऐसी धांधली की शिकायतें पिछले कुछ वर्षों से लगातार सुनने को मिल रही हैं।

पंजाब में फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां छात्र सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जता रहे हैं। इन आंदोलनों के संदर्भ में राजनीतिक पक्ष भी उतना ही विचारणीय है। अगर एक राज्य में छात्र आंदोलन का समर्थन और दूसरे राज्यों में उन्हीं मुद्दों पर मौन राजनीतिक सुविधा के आधार पर तय होगा, तो इससे राजनीतिक दलों की नैतिक साख ही कमजोर होगी।


शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे होकर केंद्र, राज्य सरकारों और सभी राजनीतिक दलों को भी देश के छात्रों व युवाओं के हित में शिक्षा व परीक्षा प्रणाली को स्वच्छ व धांधलीमुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

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