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टाइपराइटर और जिंदगी: काम करने का तरीका उसे छोटा या बड़ा बनाता है, रचनात्मक लोग लंबी आयु जीते हैं
कर्ट स्ट्रीटर, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 11 Jan 2026 07:09 AM IST
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विस्तार
पॉल लुंडी कंपनी में अच्छे पद पर थे, सैलरी भी अच्छी थी, लेकिन उन्हें अपने भीतर एक खोखलापन महसूस होता था कि वह, वह काम नहीं कर रहे, जिसमें उनकी आत्मा बसती है। तब उनकी मुलाकात एक 90 वर्षीय व्यक्ति से होती है, जो टाइपराइटर की मरम्मत का काम करता था। उस बुजुर्ग ने पॉल को समझाया कि टाइपराइटर पास में हो, काम करने का अर्थ पता हो, तो जिंदगी ध्यान बन जाती है।ग्यारह साल पहले, पॉल लुंडी एक मजदूर की तरह धीरे-धीरे अंत की ओर बढ़ रहे थे। तीन दशकों तक, उन्होंने एक कंपनी में फैसिलिटी मैनेजर का काम किया-जो उन्हें तब तक पीसता रहा, जब तक कि उनके पास पैसा नहीं आ गया, पर उनकी आत्मा खोखली हो रही थी। वह अपने काम में बेहतर थे, लेकिन फैसिलिटी मैनेजमेंट का काम करने वाले लोग जरूरी होने के बावजूद लगभग अदृश्य होते हैं। जब तक कहीं कोई गड़बड़ी नहीं होती, उन पर कोई ध्यान भी नहीं देता। 65 साल की उम्र में उन्हें सेवानिवृत्त होना था, लेकिन अभी उसमें समय था।
वर्ष 2014 में रविवार की एक सुबह, उन्होंने द सिएटल टाइम्स में 92 साल के बॉब मोंटगोमरी के बारे में एक फीचर स्टोरी देखी। वह लेख एक खत्म हो रहे पेशे (टाइपराइटर ठीक करने) के लिए शोक संदेश जैसा था, जिसमें कहा गया था कि जब मिस्टर मोंटगोमरी चले जाएंगे, तो सात दशकों की विशेषज्ञता डिजिटल दुनिया में गायब हो जाएगी। पॉल लुंडी को महसूस हुआ कि इस आदमी से मिलना चाहिए। अगले सप्ताहांत वह ब्रेमरटन गए। इमारत पर कोई संकेत नहीं था, जो बताए कि अंदर, पांच मंजिल ऊपर, एक माहिर कारीगर ऐसी कला को जिंदा रखे हुए था, जो कंप्यूटर युग से भी पहले की थी। ऊपर जाने के लिए ऐसी लिफ्ट लेनी पड़ती थी, जो आवाज करती थी। जब दरवाजे खुले, तो तुरंत पता चल गया कि सही जगह पर पहुंचे हैं : एक 1916 का रॉयल मॉडल 10 टाइपराइटर खुले दरवाजे के बाहर पहरा दे रहा था, और हवा में तेल की गंध पसरी थी। अंदर जाने पर, एक ऐसी दुकान दिखी, जो टाइपराइटरों से भरी हुई थी। वहां एक बेंच पर मिस्टर मोंटगोमरी बैठे थे। वह छोटे और कमजोर थे, तथा इतने झुके हुए थे कि ‘उनका शरीर 90 डिग्री का कोण बनाता था।’ लेकिन उनके हाथ बड़ी आसानी से सामने रखे टाइपराइटर पर चल रहे थे। लुंडी महज 20 मिनट के लिए आए थे, पर चार घंटे रुके रहे। जिस चीज ने उन्हें रोके रखा, वह था मोंटगोमरी के काम करने का ढंग।
मिस्टर मोंटगोमरी मंदी के दौर के सिएटल में पले-बढ़े थे, वह एक टाइपराइटर ठीक करने वाले के बेटे थे। जब वह काम नहीं सीख रहे होते थे, तो थिएटर देखने जाते थे, जिससे उनके अंदर परफॉर्मेंस के लिए प्यार जागा, जिसने उनकी जिंदगी को टाइपराइटर जितना ही प्रभावित किया। फिर दूसरा विश्वयुद्ध हुआ। उन्हें सेना में भर्ती किया गया, तो लगा कि यूरोप में राइफल लेकर लड़ना होगा। लेकिन सेना ने उन्हें टाइपराइटर ठीक करने का काम दिया। लुंडी कहते हैं, ‘शायद इससे उनकी जान बच गई।’ युद्ध के बाद, उनके परिवार ने 1947 में ब्रेमरटन ऑफिस मशीन की कंपनी खोली। अगले 70 वर्षों तक, मिस्टर मोंटगोमरी टाइपराइटर ठीक करते रहे, भले ही दुनिया ने उन्हें भुला दिया था। मिस्टर मोंटगोमरी का खाना ध्यान करने जैसा था। वह हर कौर के बीच कहानियां सुनाते थे और स्वाद ऐसे लेते थे, जैसे गरीबी में जिंदगी बिताई हो। वह लगभग पूरी तरह से सिस्टम से बाहर थे।
एक दिन लुंडी ने उनसे पूछा, ‘क्या मैं मदद कर सकता हूं?’ मिस्टर मोंटगोमरी ने कहा, ‘क्यों नहीं।’ लुंडी अपनी नौकरी के बाद सीधे उनकी दुकान पर आने लगे। मिस्टर मोंटगोमरी ने उनके लिए एक टाइपराइटर और रिपेयर मैनुअल के पन्नों के साथ एक बेंच लगा दी। उन्होंने उन्हें खुद ही चीजों को समझने के लिए छोड़ दिया। एयर-कंडीशनिंग सिस्टम को संभालने के आदी लुंडी के हाथों को एक नई भाषा सीखनी पड़ी। जब उन्हें लगता कि कोई टाइपराइटर दुरुस्त हो गया है, तो वह उसे मिस्टर मोंटगोमरी को दिखाते, जो उसकी जांच करते और सही रास्ता दिखाते। एक शनिवार लुंडी दुकान पर पहुंचे, तो देखा कि कुछ लोग मिस्टर मोंटगोमरी का सामान दुकान से निकाल रहे थे और उन्हें कूड़ेदान में फेंकने की तैयारी कर रहे थे; 13 महीने का बिना चुकाया किराया अंततः भारी पड़ गया था। लुंडी को यह ठीक नहीं लगा कि इतना सारा ज्ञान, इतना सारा हुनर और इतिहास सब बर्बाद हो जाएगा। बिल्डिंग मैनेजर ने खर्च बताया : 13 महीने के लिए 200 डॉलर प्रति महीना, यानी कुल 2,600 डॉलर। लुंडी ने मैनेजर से कहा, ‘मैं इनकी दुकान खरीद लेता हूं, तो इसका पिछला किराया चुका दूंगा और आगे से हर महीने किराया देता रहूंगा।’ सौदा तय हो गया। बेदखल करने वाली टीम चली गई। लुंडी ने 2014 के आखिर में वह व्यवसाय खरीद लिया। जल्द ही, उन्होंने नौकरी भी छोड़ दी। उनके साथियों को लगा कि वह पागल हो गए हैं, पर लुंडी जानते थे कि वह सुरक्षा के बदले मकसद, और अनुमानित जिंदगी के बदले संभावनाओं को चुन रहे थे। अगले कुछ वर्षों तक, लुंडी और मिस्टर मोंटगोमरी उस तंग पांचवीं मंजिल की दुकान में साथ-साथ काम करते रहे।
मिस्टर मोंटगोमरी अब भी उनके उस्ताद थे, लेकिन उनकी रफ्तार धीमी हो रही थी। सिखाने का काम जारी रहा, पर उम्र उन पर हावी होने लगी थी। उनके दोस्तों ने उन्हें पूर्व सैनिक और सामाजिक सुरक्षा लाभ के लिए आवेदन करने में मदद की, जिनका उन्होंने कभी दावा नहीं किया था, और पास के एक रिटायरमेंट होम में उनके लिए रियायती घर ढूंढ दिया-दशकों में यह उनका पहला असली घर था। लेकिन वह रोजाना दुकान आते रहे। सुबह बस से आते थे। बस ड्राइवर मिस्टर मोंटगोमरी को जानते थे और अगर उन्हें थोड़ी देर हो जाती थी, तो वे इंतजार करते थे। एक दिन मिस्टर मोंटगोमरी गिर गए और उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई। उनकी सेहत तेजी से बिगड़ने लगी। सितंबर, 2018 में 96 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। कब्रिस्तान में पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। लुंडी ने शोक भाषण दिया-वह एक ऐसे आदमी थे, जिसने महामंदी और दूसरे विश्वयुद्ध को देखा था, जो 70 साल तक ऐसी मशीनें ठीक करता रहा, जिन्हें दुनिया भूल चुकी थी, जिसने आखिरी समय तक काम किया, क्योंकि काम ही उसकी पहचान थी।
फिर आया 2020। कोविड महामारी के कारण सब लोग घरों में फंस गए, हर जगह स्क्रीन ही स्क्रीन, जूम पर बात करते-करते थकान होने लगी। लोग कुछ ऐसी चीज चाहते थे, जिसे छू सकें। टाइपराइटर की बिक्री अचानक बहुत बढ़ गई। अक्तूबर 2025। पॉल लुंडी एक आईबीएम सेलेक्ट्रिक मशीन पर झुके हुए हैं, जो लगभग 50 साल पुरानी है, और उसके अंदरूनी हिस्सों को देख रहे हैं। यह मशीन कई बार गिर चुकी है। दशकों से तेल और धूल मिलकर गाढ़ा कीचड़ बन गए हैं। वह की-बोर्ड की गंदगी को कचरा नहीं मानते, बल्कि उसे बीते जीवन का जमा रिकॉर्ड मानते हैं-एक शादी के प्रस्ताव, पहला उपन्यास, एक सैन्य आदेश, वसीयत। अब उनकी दुकान दूसरी जगह है। ज्यादा चमकदार, ज्यादा हवादार। मिस्टर मोंटगोमरी की मौत के बाद उन्होंने छह साल तक उस छोटी-सी पांचवीं मंजिल की जगह में व्यवसाय चलाया था। मिस्टर मोंटगोमरी की आत्मा यहां बसी हुई है। 1916 का रॉयल मॉडल 10, जो पुरानी दुकान पर पहरा देता था, अब यहां खड़ा है। उनकी ऊनी टोपी भी यहीं है। यहां उनके कम्युनिटी थिएटर अवॉर्ड्स हैं-बेस्ट डायरेक्टर, जो परफॉर्मेंस के प्रति उनके प्यार का सबूत है। वहां उनके नोट्स, रिपेयर मैनुअल और औजार रखे हैं। मिस्टर मोंटगोमरी की बेंच पर ही लुंडी काम करते हैं। अब लुंडी ही प्रशिक्षुकों को काम सिखाते हैं। वह उसी तरह सिखाते हैं, जैसे मिस्टर मोंटगोमरी सिखाते थे : धैर्य से गलतियां होने देते हैं, क्योंकि गलतियों से ही सबसे अच्छा सीखा जाता है। व्यवसाय करने का यह तरीका कि ग्राहक हमेशा सही होता है।
इस साल, पॉल लुंडी 65 साल के हो गए। अगर वह अपनी पुरानी नौकरी में होते, तो शायद अपने जन्मदिन पर रिटायर हो जाते। इसके बजाय, वह हफ्ते में छह दिन काम कर रहे हैं और मुस्कुराते हुए कहते हैं : ‘मैं काम बंद करने के बारे में सोच भी नहीं सकता।’