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Budget: बजट में विचारों की कमी नहीं, सरकार ने असहज करने वाली 'कुछ करने की बेचैनी' से बनाई दूरी
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निर्मला सीतारमण
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अमर उजाला
विस्तार
अरंडी की खली बनाने वाले उत्पादक खुश होंगे। यह बजट उस तरह का नहीं है, जो फ्यूचर और ऑप्शंस ट्रेडर्स की मदद कर सके। विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित इकाइयों (जो देसी बीजों से देसी मशीनरी पर अरंडी की खली बनाती हैं) को कस्टम ड्यूटी से छूट मिलती है, अगर उत्पादन का इस्तेमाल घरेलू बाजार में किया जाता है। इस छूट से निर्यात इकाइयों की जीवंतता बनी रहती है और घरेलू बाजार में उर्वरक बनाने वालों के लिए उपलब्धता बढ़ती है। बजट 2026 ऐसे कई सटीक कदमों से परिभाषित होता है।निर्मला सीतारमण का नौवां बजट उत्साह और उम्मीदों के बीच आया है। बजट ने 1991 जैसे बड़े बदलाव की उम्मीद जगाने वाले शोर को शांत कर दिया है। इसने शेयर बाजार के उन सट्टेबाजों को भी निराश किया है, जो बूस्टर शॉट्स की उम्मीद कर रहे थे और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडर्स की उस भीड़ के व्यवसाय मॉडल को और खराब कर दिया है, जो जल्दी अमीर बनने की उम्मीद में थे। सरकार ने 2025 में ही उपभोग मांग को बढ़ावा दिया है–फरवरी में आय कर में बदलाव किया और उसके बाद अक्तूबर में जीएसटी दरों को फिर से तय किया। बजट से पहले सवाल यह था कि सरकार डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरावट को कैसे रोकेगी, विदेशी पोर्टफोलियो
निवेशकों की बिकवाली को कैसे रोकेगी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सुस्ती को कैसे सुधारेगी।
संकट की तरह कोई भी चीज रणनीति को स्पष्ट नहीं करती, और संकट से होने वाले बदलावों के इतिहास को देखते हुए बड़े कदमों की उम्मीद थी। बजट 2026 ने सुरक्षित रास्ता चुना है, और सरकारों को असहज करने वाली 'कुछ करने की बेचैनी' से बचा है। इसने परखे हुए सिद्धांत पर टिके रहने और आर्थिक रूप से समझदारी वाले रास्ते पर चलने का फैसला किया है। बजट वादा करता है कि वह सरकार की आय और खर्च के बीच के अंतर को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखेगा, जिसका मतलब है कि सरकार की कुल उधारी लगभग 17 लाख करोड़ रुपये होगी। सरकार हर दिन 3,800 करोड़ रुपये से अधिक या हर घंटे 160 करोड़ रुपये ब्याज के भुगतान पर खर्च करेगी।
पिछले पांच वर्षों में सरकार का बुनियादी तरीका–निजी निवेश की कमी के बावजूद–भौतिक अवसंरचना पर खर्च बढ़ाकर विकास की रफ्तार बनाए रखना रहा है–इस साल के लिए इस मद में आवंटन 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है और रक्षा आधुनिकीकरण के लिए आवंटन बढ़ाकर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (जिनके लिए बजट और समय-सीमा अभी बताई नहीं गई है) कनेक्टिविटी बढ़ा सकते हैं और विकास को बढ़ावा दे सकते हैं। पांच वर्षों के लिए 5,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ आर्थिक क्षेत्र के तौर पर सिटी क्लस्टर का भी एक अस्पष्ट आइडिया है। सवाल यह है: क्या सरकार स्मार्ट सिटी प्रोग्राम में जो हुआ, उसे होने से रोक पाएगी?
बजट में आर्थिक विकास और निवेश को सहारा देने की कोशिश दिखती है। जब भारतीय जहाज द्वारा ईईजेड में गहरे समुद्र में पकड़ी गई मछली को विदेशी बंदरगाह पर उतारा जाएगा, तो उसे निर्यात माना जाएगा। चमड़े या टेक्सटाइल कपड़ों के निर्यातकों के लिए अंतिम उत्पाद के निर्यात की समय-सीमा मौजूदा छह महीने से बढ़ाकर एक साल की गई है। दुर्लभ खनिजों की वैश्विक होड़ को देखते हुए बजट में खनिज समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित दुर्लभ खनिज गलियारे स्थापित करने में सहायता देने का प्रस्ताव है। रसायनों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए, बजट में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने में राज्यों को सहायता देने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रॉनिक घटकों के विनिर्माण के लिए आवंटन बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है।
ऐसा नहीं है कि ये योजनाएं ध्यान देने योग्य नहीं हैं। वृद्ध और बीमार लोगों के लिए सहायक उपकरणों के केंद्र के रूप में भारत को बढ़ावा देने की योजना में उन्नत अर्थव्यवस्थाओं जैसी क्षमता है, बशर्ते वह गुणवत्ता परीक्षण में कामयाब हो जाए। कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज को बढ़ावा देने की योजना, जो भारत-ईयू व्यापार समझौते और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है, के लिए बीस हजार करोड़ रुपये का आवंटन है। वस्त्र पार्कों, खेल सामग्री निर्यात को बढ़ावा देने और खादी को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए संस्थान की योजना भी है।
हालांकि तकरीबन आधी कार्यबल कृषि पर निर्भर होने के कारण सरकार के सामने किसानों की आय बढ़ाने के वादे को पूरा करने की चुनौती है। कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए एआई-सक्षम एग्री स्टैक पोर्टल का विचार आशाजनक है। हालांकि विचारों को नतीजों में तब्दील करने का रिकॉर्ड काफी कमजोर है। शहरी चुनौती निधि और अनुसंधान एवं विकास निधि का भविष्य अभी अनिश्चित है। पिछले बजट में विनिर्माण के लिए एक मिशन की घोषणा की गई थी। इस वर्ष भी नई समितियां गठित की गई हैं। स्पष्ट रूप देखा जाए, तो बजट रुपये के अवमूल्यन, विदेशी निवेशकों के बर्हिवाह और अनिच्छुक निजी पूंजी निर्माण के मुद्दे को संबोधित नहीं करता है। वैश्विक अनिश्चितताओं और असंतोषों का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन चिंता साफ तौर पर महसूस की जा सकती है। उम्मीद है कि सोमवार को जब दुनिया भर के बाजार खुलेंगे, तो सूचकांकों में और गिरावट आ सकती है, रुपये में गिरावट आ सकती है और सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसमें विचारों और हस्तक्षेपों की कमी नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि वे सूक्ष्म विवरणों के कोहरे में खो जाते हैं।
