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Venezuela: वेनेजुएला अब भी संभावना, ट्रंप का निर्णायक कदम सफल रहा

मैथ्यू क्रोनिग Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 09 Jan 2026 07:28 AM IST
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सार
ट्रंप के वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई की निंदा के बावजूद, मादुरो का हटना देश में बेहतर शासन, मजबूत अर्थव्यवस्था और आशावान भविष्य की संभावना खोल सकता है।
 
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Venezuela still has potential Trump decisive move was successful
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : ANI

विस्तार
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हाल ही में, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा किए गए सैन्य हमले की चौतरफा और तीखी आलोचना हुई। किसी ने इसे ‘गैर-कानूनी और अविवेकपूर्ण’ करार दिया, तो किसी ने ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन’ बताया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने तो इस कार्रवाई को एक ‘खतरनाक मिसाल’ कहा। लेकिन ट्रंप ने यह सही कदम उठाया है। इसके पीछे कई ठोस व निर्विवाद कारण हैं।


मादुरो पर अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी के गंभीर आरोप थे। उनकी नीतियों ने वेनेजुएला के लाखों लोगों को पलायन के लिए मजबूर किया, जिससे अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर आप्रवासन का संकट पैदा हो गया। उन्होंने चीन, रूस और ईरान जैसे अमेरिका के दुश्मनों को अमेरिका के पड़ोस में पैठ जमाने का अवसर दिया। अब, जब मादुरो सत्ता से बाहर हैं, तो इसका लाभ न केवल अमेरिका को, बल्कि वेनेजुएला सहित पूरे लैटिन अमेरिका और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को मिलने की संभावना है। मादुरो का हटना वेनेजुएला की जनता के लिए बेहतर शासन, सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और एक आशावान भविष्य की संभावना खोलता है। यह सही है कि काराकस में भावी सत्ता को लेकर अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं, पर यह कल्पना करना कठिन है कि आने वाले नेता मादुरो से अधिक खराब होंगे।


कई विश्लेषकों ने इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की तुलना 1989 में पनामा पर किए गए उस हमले से की है, जिसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से हटाया था। हालांकि, इस तुलना का एक महत्वपूर्ण पहलू अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। माना जाता है कि बुश उस अभियान से एक स्पष्ट सैन्य जीत हासिल करना चाहते थे, ताकि राष्ट्र-जनता और सशस्त्र बल, दोनों का आत्मविश्वास बहाल हो सके और वियतनाम युद्ध की पीड़ा से उबरा जा सके। अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई इस बात का ठोस प्रमाण है कि महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के युग में खतरों से निपटने में अमेरिकी बल, खासकर अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज, कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इस कार्रवाई की सबसे तीखी आलोचना इसकी संदिग्ध कानूनी वैधता को लेकर हुई है, लेकिन दोनों प्रमुख दलों के राष्ट्रपतियों ने अतीत में भी संसद की अनुमति के बिना सैन्य शक्ति का प्रयोग किया है।

बेशक यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उस मूल सिद्धांत के विपरीत है, जो एक देश द्वारा दूसरे देश के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है। पर इस कार्रवाई की वैधता के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से प्रस्ताव पारित कराना होता, जिसका अर्थ होता व्लादिमीर पुतिन की मंजूरी पाना। रूसी नेतृत्व से यह उम्मीद करना कि वह अमेरिका के हितों को ध्यान में रखेगा, एक भ्रम है। अगर ट्रंप नौसैनिक बेड़ा कैरेबियाई सागर में तैनात कर फिर अंतिम क्षण में सैनिकों को लौटने का आदेश देते, तो परिणाम भयावह हो सकते थे।  वेनेजुएला की जनता को एक खतरनाक और अक्षम शासक के हवाले छोड़ दिया जाता, अमेरिकी सेना और सरकार की साख को गहरा आघात पहुंचता तथा अमेरिका के विरोधियों को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिल जाता।

इसके उलट, ट्रंप ने एक साहसिक और निर्णायक कदम उठाया और वह सफल भी रहा। नाटो सहयोगियों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव बनाने और ईरान का परमाणु कार्यक्रम सीमित करने के प्रयासों के साथ, मादुरो के खिलाफ यह कार्रवाई ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की तीन सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जा सकती है।
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