Ajinkya Rahane Retirement: 'देश को हमेशा खुद से ऊपर रखा...', अजिंक्य रहाणे ने भावुक संदेश के साथ लिया संन्यास
भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास का एलान कर दिया। विदाई संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा देश और टीम को खुद से ऊपर रखा। 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जिताने वाले रहाणे ने अपने दो दशक लंबे क्रिकेट सफर को भावुक अंदाज में अलविदा कहा।
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भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, भरोसेमंद और जुझारू खिलाड़ियों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का एलान कर दिया। सोशल मीडिया पर जारी भावुक वीडियो में रहाणे ने अपने दो दशक लंबे सफर को याद करते हुए कहा कि उनके लिए हमेशा देश और टीम सबसे पहले रहे। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले इस बल्लेबाज की विदाई ने करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों को भावुक कर दिया।
'हर शुरुआत का एक अंत होता है'
संन्यास का एलान करते हुए रहाणे ने कहा, 'जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज की शुरुआत होती है और हर चीज का अंत भी होता है। जब वह समय आता है तो हमें उसका सम्मान करते हुए आगे बढ़ जाना चाहिए। बल्लेबाजी में मैंने हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया है और उसकी अहमियत को समझा है। आज मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास लेने के लिए यही सही समय है।'
डोंबिवली से टीम इंडिया तक का सफर
अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए रहाणे ने कहा कि डोंबिवली से शुरू हुआ उनका सफर सिर्फ एक सपना पूरा करने के लिए था। उन्होंने कहा, 'डोंबिवली से एक छोटे लड़के के रूप में सिर्फ अभ्यास करने के लिए सफर शुरू किया था। मैंने इस खेल को अपना सब कुछ दिया। हर दिन, हर पारी और बल्लेबाजी का हर मौका मेरे लिए भारत की कैप पहनने के सपने से जुड़ा था।'
देश और टीम हमेशा सबसे पहले रहे
रहाणे ने क्रिकेट के प्रति अपने समर्पण के बारे में बताते हुए कहा, 'मैंने हमेशा एक ही नियम अपनाया, अपने देश और अपनी टीम को खुद से ऊपर रखा। मैंने पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला और हमेशा यह माना कि अगर आपकी नीयत सही है तो खेल हमेशा आपका साथ देता है।'
20 साल तक भारतीय क्रिकेट का हिस्सा बनने पर गर्व
रहाणे ने भावुक होकर कहा, 'जब से मैंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया, तब से लेकर आज तक भारतीय क्रिकेट ने जबरदस्त तरक्की की है। पिछले 20 वर्षों तक इस सफर का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है। भारतीय क्रिकेटर के रूप में मेरा अध्याय भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन क्रिकेट के साथ मेरा सफर यहीं खत्म नहीं होगा। अब मैं अगली पीढ़ी की मदद करने, इस खेल से मिले मूल्यों को साझा करने और उस क्रिकेट को कुछ लौटाने के लिए उत्सुक हूं, जिसने मुझे सब कुछ दिया।'
जीत-हार से बढ़कर रहीं यादें
रहाणे ने अपने सफर को लेकर कहा, 'मुंबई के एक युवा खिलाड़ी के रूप में शुरुआत करने से लेकर भारत के लिए खेलने तक का सफर मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान रहा। इस दौरान जीत भी मिली, हार भी मिली, लेकिन क्रिकेट खेलने की खुशी, अलग-अलग टीमों का हिस्सा बनने का अनुभव और जिंदगी भर की यादें ही मेरे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि और सबसे बड़ी संतुष्टि हैं।'
शुभचिंतकों का जताया आभार
विदाई वीडियो में रहाणे अपने परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों का शुक्रिया अदा करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा, 'मैं बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए), अपने सभी साथियों, कोचों, आईपीएल की हर फ्रेंचाइजी, राधिका, अपने पूरे परिवार, दोस्तों और उन सभी लोगों का दिल से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया।'
'मैं आपके दिलों में कभी नहीं हारा'
रहाणे ने आखिर में अपने फैंस को भी धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा, 'क्रिकेट के उन सभी प्रशंसकों का विशेष धन्यवाद, जिन्होंने मेरे हर अच्छे और बुरे दौर में मेरा साथ दिया। 'अजिंक्य' का मतलब होता है 'अजेय', लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हार का सामना करना सिखाया। एक क्रिकेटर के तौर पर हम जितनी बार सफल होते हैं, उससे कहीं ज्यादा बार असफल होते हैं। मेरी टीम भी मैच हारी, मुझसे भी गलतियां हुईं, लेकिन एक जगह मैं कभी नहीं हारा और वह आपके दिल थे। आपने हमेशा मुझे अपना माना। आपके प्यार, भरोसे और समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद। कैप नंबर 278... अब यहीं तक।'
मेलबर्न की पारी हमेशा रहेगी यादगार
रहाणे के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रहा। विराट कोहली की गैरमौजूदगी में उन्होंने चोटों से जूझ रही भारतीय टीम की कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शतक जड़कर भारत की वापसी कराई। इसके बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार टेस्ट सीरीज में से एक अपने नाम की।
