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Ajinkya Rahane Story: वह भारतीय कप्तान, जिसकी कप्तानी में टेस्ट-ODI में कभी नहीं हारा भारत, रहे सबसे शांत नायक

Thu, 30 Jul 2026 12:35 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 30 Jul 2026 12:35 PM IST
सार

क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने वाले अजिंक्य रहाणे सिर्फ एक शानदार बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि भारत के सबसे सफल और शांत कप्तानों में भी शामिल रहे। उनकी कप्तानी में भारत टेस्ट और वनडे में एक भी मैच नहीं हारा, जबकि टी20 में सिर्फ एक मुकाबला गंवाया। डोंबिवली की लोकल ट्रेन से शुरू हुआ उनका सफर गाबा में ऐतिहासिक जीत तक पहुंचा। यह कहानी है एक ऐसे खिलाड़ी की, जिसने हमेशा देश को खुद से ऊपर रखा।

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Ajinkya Rahane Story: The Quiet Captain Who Rarely Lost and Always Put India First
रहाणे का कप्तानी रिकॉर्ड उनकी नेतृत्व क्षमता की गवाही देता है। - फोटो : ANI

विस्तार

अजिंक्य रहाणे ने जब क्रिकेट से संन्यास का एलान किया तो सिर्फ एक बल्लेबाज का करियर खत्म नहीं हुआ, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, भरोसेमंद और सम्मानित अध्यायों में से एक का अंत भी हुआ। संन्यास लेते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा अपने देश और टीम को खुद से ऊपर रखा।' शायद यही एक वाक्य उनके पूरे करियर का सबसे सही परिचय है। डोंबिवली की लोकल ट्रेन में सफर करने वाला एक साधारण लड़का आगे चलकर ऐसा कप्तान बना, जिसकी कप्तानी में भारत टेस्ट और वनडे में एक भी मैच नहीं हारा और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार जीत दर्ज की।

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Ajinkya Rahane Story: The Quiet Captain Who Rarely Lost and Always Put India First
रहाणे का परिवार - फोटो : instagram

डोंबिवली से शुरू हुआ सपना, पिता ने चुपचाप निभाया साथ
छह जून 1988 को महाराष्ट्र के अश्वी में जन्मे रहाणे का परिवार बेहतर भविष्य की तलाश में डोंबिवली आकर बस गया। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। मां सुजाता रहाणे बच्चों की देखभाल का काम करती थीं, जबकि पिता मधुकर रहाणे ने बेटे के क्रिकेट सपने के लिए हर संभव त्याग किया। सात साल की उम्र में रहाणे को एक छोटे से क्रिकेट कैंप में दाखिल कराया गया। पहले दिन पिता उन्हें लोकल ट्रेन से अकादमी लेकर गए। दूसरे दिन कहा, 'अब तुम्हें अकेले जाना होगा।'

रहाणे कई साल तक यही समझते रहे कि वह अकेले सफर कर रहे हैं। लेकिन पांच-छह साल बाद पिता ने बताया कि वह रोज दूसरे डिब्बे में बैठकर चुपचाप उनका पीछा करते थे, ताकि बेटे का आत्मविश्वास भी बना रहे और उसकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। यह बात सुनकर रहाणे भावुक हो गए और उसी दिन तय किया कि उनकी हर उपलब्धि सबसे पहले माता-पिता के नाम होगी।

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रहाणे का परिवार - फोटो : instagram

घरेलू क्रिकेट में भी छोड़ी गहरी छाप

  • रहाणे ने 2007 में मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास), लिस्ट-ए और टी20 क्रिकेट में डेब्यू किया और शुरुआती दिनों से ही अपनी तकनीकी बल्लेबाजी से पहचान बनाई। उनका पहला प्रथम श्रेणी मैच सितंबर 2007 में कराची अर्बा के खिलाफ था, जबकि आखिरी मुकाबला नवंबर 2025 में रणजी ट्रॉफी में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ खेला।
  • लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने मार्च 2007 में दिल्ली के खिलाफ डेब्यू किया और अगस्त 2024 में समरसेट के खिलाफ अपना आखिरी मैच खेला। वहीं घरेलू टी20 क्रिकेट में अप्रैल 2007 में बड़ौदा के खिलाफ पहला मुकाबला खेलने वाले रहाणे ने मई 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच आईपीएल मैच के साथ अपने प्रतिस्पर्धी टी20 करियर का अंत किया।
  • रणजी ट्रॉफी में दूसरे ही सीजन में रहाणे ने 1000 से ज्यादा रन बनाकर उन्होंने मुंबई को रिकॉर्ड 38वां खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वह लंबे समय तक मुंबई की बल्लेबाजी की रीढ़ बने रहे।
  • प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रहाणे ने 190 से अधिक मैच खेलकर 13 हजार से ज्यादा रन बनाए और करीब 46.5 की औसत से 39 शतक जड़े। वहीं घरेलू टी20 क्रिकेट में भी उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं।
  • 2022-23 सीजन में उनकी कप्तानी में मुंबई ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब जीता, जिससे एक बार फिर उनकी नेतृत्व क्षमता साबित हुई। घरेलू क्रिकेट में घरेलू क्रिकेट में उनका सफर इस बात का उदाहरण रहा कि मजबूत बुनियाद ही किसी खिलाड़ी को लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिकाए रखती है।
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Ajinkya Rahane Story: The Quiet Captain Who Rarely Lost and Always Put India First
रहाणे का संन्यास - फोटो : ANI

2013 में रहाणे ने किया टेस्ट डेब्यू
घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें 2013 में भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली। कई महीनों तक टीम के साथ रहने के बाद उन्हें टेस्ट डेब्यू का मौका मिला। रहाणे ने टेस्ट डेब्यू 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में किया था। हालांकि, इससे पहले 2011 में वह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे और टी20 डेब्यू कर चुके थे। अपने तीसरे ही टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में उन्होंने पहली पारी में नाबाद 51 और दूसरी पारी में 96 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

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रहाणे का संन्यास - फोटो : ANI

रहाणे के करियर के कुछ शानदार पल
 

  • लॉर्ड्स में शतक से बने विदेशी सरजमीं के हीरो: फरवरी 2014 में वेलिंगटन टेस्ट में रहाणे ने अपना पहला टेस्ट शतक लगाया। यह मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने सभी का ध्यान खींचा। इसके महज पांच महीने बाद उन्होंने लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में 103 रन की शानदार पारी खेली और भारत को लगभग तीन दशक बाद लॉर्ड्स में ऐतिहासिक जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसी दौरे पर उन्होंने एजबेस्टन में अपना पहला वनडे शतक भी लगाया और भारत ने इंग्लैंड को वनडे सीरीज में 3-1 से हराया।
  • ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका में भी चमके: रहाणे का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी रहा। उन्होंने मेलबर्न और कोलंबो में भी शतक लगाए। 2015-16 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में उन्होंने दोनों पारियों में शतक जड़े। उस पूरी सीरीज में किसी अन्य बल्लेबाज ने शतक नहीं लगाया था, जिससे उनकी पारी का महत्व और बढ़ गया।
  • पुजारा के साथ साझेदारी ने बदल दी सीरीज: 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा के साथ रहाणे की महत्वपूर्ण साझेदारी ने भारत को मैच जिताया और सीरीज 1-1 से बराबर करा दी। बाद में भारत ने सीरीज 2-1 से अपने नाम की। उस सीरीज के आखिरी टेस्ट में विराट कोहली की गैरमौजूदगी में रहाणे ने कप्तानी भी की।
  • वापसी करते रहे, लेकिन कभी हार नहीं मानी: 2018 के दक्षिण अफ्रीका दौरे में शुरुआती दो टेस्ट से बाहर किए जाने के बाद जोहानिसबर्ग टेस्ट में रहाणे ने दूसरी पारी में मैच का रुख बदलने वाली शानदार पारी खेली। हालांकि, इस दौर तक वह पहले जैसी निरंतरता नहीं दिखा पा रहे थे।
  • 36 रन के सदमे के बाद मेलबर्न में लिखा इतिहास: दिसंबर 2020 में एडिलेड टेस्ट में भारत सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हो गया। पहले टेस्ट के बाद विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर स्वदेश लौट गए और कप्तानी की जिम्मेदारी रहाणे को मिली। इसके बाद मेलबर्न टेस्ट में उन्होंने कप्तानी पारी खेलते हुए शानदार शतक लगाया। उनकी इस पारी ने पूरी टीम का आत्मविश्वास लौटाया और भारत ने चोटों से जूझती टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने नाम की।
  • ड्रॉप हुए, फिर लौटे और WTC फाइनल में चमके: 2022 में रहाणे को टेस्ट टीम से बाहर कर दिया गया, लेकिन आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल के लिए टीम में वापसी की। फाइनल में भारत को ऑस्ट्रेलिया से हार मिली, लेकिन रहाणे भारतीय टीम के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।

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पुजारा और रहाणे - फोटो : BCCI

टी20 में भी बदला अपना अंदाज
पारंपरिक तकनीक वाले बल्लेबाज माने जाने वाले रहाणे ने टी20 क्रिकेट में भी खुद को सफल साबित किया। राजस्थान रॉयल्स के लिए उन्होंने दो आईपीएल सीजन में 500 से ज्यादा रन बनाए और टूर्नामेंट में दो शतक भी लगाए। 2022-23 में उन्होंने मुंबई की कप्तानी करते हुए टीम को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का चैंपियन बनाया। आईपीएल 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से मुंबई इंडियंस के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 27 गेंदों में 61 रन की विस्फोटक पारी खेलकर सभी को चौंका दिया।

अजिंक्य रहाणे का आईपीएल सफर
 

  • मुंबई इंडियंस से हुई शुरुआत: रहाणे 2008 में आईपीएल के पहले सीजन से ही इस लीग का हिस्सा रहे। शुरुआती दो सीजन उन्होंने मुंबई इंडियंस के लिए खेले, हालांकि उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। 2010 में उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।
  • राजस्थान रॉयल्स में मिली पहचान: 2011 से 2015 तक वह राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे। इस दौरान उन्होंने एक शतक और 15 अर्धशतक लगाए। 2012 और 2015 उनके सर्वश्रेष्ठ सीजन रहे, जब उन्होंने क्रमश: 560 और 540 रन बनाए।
  • राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स के लिए भी खेले: राजस्थान रॉयल्स पर प्रतिबंध लगने के बाद 2016 और 2017 में रहाणे राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स से जुड़े। 2016 में उन्होंने 14 मैचों में छह अर्धशतक लगाए। इसी सीजन स्टीव स्मिथ की गैरमौजूदगी में उन्होंने एक मैच में टीम की कप्तानी भी की।
  • दिल्ली और केकेआर में रहा संघर्ष: आईपीएल 2020 से पहले वह दिल्ली कैपिटल्स में पहुंचे, लेकिन अगले तीन सीजन उनके लिए बेहद साधारण रहे। 2022 में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए सात मैचों में उनका औसत सिर्फ 19 रहा। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी लगातार गिरा।
  • सीएसके ने बदली किस्मत: आईपीएल 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें नई भूमिका दी। आक्रामक बल्लेबाज के रूप में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और 172.48 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। इसी सीजन उन्होंने अपने करियर का पहला आईपीएल खिताब भी जीता। हालांकि, 2024 में वह इस प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके और उनका स्ट्राइक रेट 123.46 पर आ गया।
  • केकेआर के कप्तान बने: आईपीएल 2025 की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें 1.50 करोड़ रुपये में दोबारा खरीदा और श्रेयस अय्यर के जाने के बाद कप्तानी सौंपी। उन्होंने तीन अर्धशतक लगाए, 35 से अधिक की औसत और लगभग 148 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए, लेकिन टीम अंक तालिका में आठवें स्थान पर रही। इसके बावजूद फ्रेंचाइजी ने उन पर भरोसा जताते हुए आईपीएल 2026 के लिए भी कप्तानी बरकरार रखी।

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अजिंक्य रहाणे - फोटो : PTI

ऑरकुट से शुरू हुई प्रेम कहानी, शादी में टी-शर्ट पहन पहुंचे
क्रिकेट के साथ-साथ रहाणे की निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। मुलुंड में रहने वाली राधिका धोपावकर उनकी छोटी बहन की दोस्त थीं। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। यह वह दौर था जब सोशल मीडिया की जगह ऑरकुट का जमाना था। घरेलू क्रिकेट खेलने के दौरान दोनों घंटों चैट करते थे। सात साल तक रिश्ते को निभाने के बाद 26 सितंबर 2014 को दोनों ने पारंपरिक मराठी रीति-रिवाज से शादी की।शादी के दिन भी रहाणे अपनी सादगी नहीं छोड़ पाए। व्यस्त कार्यक्रम के कारण वह शादी स्थल पर टी-शर्ट और जींस पहनकर पहुंच गए। बाद में राधिका ने उन्हें वापस भेजा और फिर वह शेरवानी पहनकर मंडप में लौटे। आज दोनों के दो बच्चे, आर्या और राघव हैं।

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रहाणे का परिवार - फोटो : instagram

कप्तान के तौर पर भी रहा शानदार रिकॉर्ड
 

  • रहाणे सिर्फ भरोसेमंद बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि शांत और प्रभावशाली कप्तान भी रहे। उन्होंने भारत की कप्तानी में कुल 11 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में से सिर्फ एक मैच गंवाया।
  • टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 2017 से 2021 के बीच छह मैचों में कप्तानी की, जिसमें चार में भारत को जीत मिली, दो मुकाबले ड्रॉ रहे और टीम को एक भी हार नहीं मिली।
  • उनके नेतृत्व में भारत ने 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर इतिहास रचा।
  • वनडे में उन्होंने तीन मैचों में कप्तानी की और तीनों में भारत विजयी रहा। टी20 अंतरराष्ट्रीय में दो मैचों में कप्तानी करते हुए एक जीत और एक हार मिली।
  • शांत स्वभाव, सटीक फैसलों और खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी शैली ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल अंतरिम कप्तानों में शामिल किया।


'देश को हमेशा खुद से ऊपर रखा'
संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने कहा, 'मैंने हमेशा एक ही नियम अपनाया—अपने देश और अपनी टीम को खुद से ऊपर रखा। मैंने पूरी ईमानदारी से क्रिकेट खेला और मेरा मानना रहा कि अगर आपकी नीयत सही हो तो खेल हमेशा आपका साथ देता है।' उन्होंने आगे कहा कि भारतीय क्रिकेटर के रूप में उनका अध्याय भले खत्म हो गया हो, लेकिन क्रिकेट के साथ उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा। अब वह अगली पीढ़ी को अपने अनुभव और खेल से सीखे गए मूल्यों को देना चाहते हैं।

Ajinkya Rahane Story: The Quiet Captain Who Rarely Lost and Always Put India First
रहाणे - फोटो : ANI
रनों से कहीं बड़ी रही रहाणे की विरासत
अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर में 15 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए, 8,000 से ज्यादा रन बनाए और कई ऐतिहासिक जीतों के नायक बने। लेकिन उनकी सबसे बड़ी विरासत आंकड़े नहीं, बल्कि उनका चरित्र है। उन्होंने कभी शोर नहीं मचाया, कभी सुर्खियों के पीछे नहीं भागे, लेकिन हर बार जब टीम मुश्किल में थी, वह सबसे आगे खड़े मिले।

डोंबिवली की लोकल ट्रेन से शुरू हुआ यह सफर गाबा की ऐतिहासिक जीत तक पहुंचा। और शायद यही वजह है कि अजिंक्य रहाणे सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट में सादगी, धैर्य और नेतृत्व की मिसाल बनकर हमेशा याद किए जाएंगे।

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