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बांग्लादेश क्रिकेट में भूचाल: खिलाड़ियों ने क्यों की बगावत? नजमुल की छुट्टी के बाद बीपीएल की तारीखें भी बदलीं
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Fri, 16 Jan 2026 08:58 AM IST
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सार
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी एम. नजमुल इस्लाम द्वारा तमीम इकबाल को 'इंडियन एजेंट' कहने के बाद वरिष्ठ खिलाड़ियों ने बीपीएल का बहिष्कार कर दिया। इसके चलते बोर्ड ने आपात बैठक कर इस्लाम को फाइनेंस कमेटी से हटा दिया और बीपीएल का कार्यक्रम संशोधित करना पड़ा। हालांकि खिलाड़ी इस निर्णय को अधूरा मानते हैं और इस्लाम के सार्वजनिक माफी और बोर्ड से निष्कासन की मांग पर अड़े हैं। विवाद अभी शांत नहीं हुआ है।
नजमुल इस्लाम और बांग्लादेश टीम
- फोटो : ANI
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विस्तार
बांग्लादेश क्रिकेट इस समय एक बड़े और गंभीर विवाद में फंसा हुआ है। बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) 2026 को खिलाड़ियों के विरोध और बहिष्कार के कारण अचानक रोकना पड़ा, जिसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने आपात बैठक बुलाकर कार्यक्रम को पुनर्निर्धारित किया और एक वरिष्ठ अधिकारी को पद से हटाने का फैसला लिया। खिलाड़ियों के निशाने पर बोर्ड के फाइनेंस कमेटी प्रमुख और डायरेक्टर एम. नजमुल इस्लाम थे, जिन्होंने पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को 'इंडियन एजेंट' कहकर बवाल खड़ा कर दिया।
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तमीम इकबाल और नजमुल इस्लाम
- फोटो : PTI/Twitter
विवाद की जड़: तमीम को 'इंडियन एजेंट' कहना
- यह पूरा विवाद मुस्तफिजुर रहमान के आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने के बाद शुरू हुआ। कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें 9.2 करोड़ में खरीदा था। हालांकि, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के विरोध में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को खिलाने पर सवाल उठने लगे। इसके बाद बीसीसीआई के निर्देश पर रहमान को रिलीज कर दिया गया।
- इससे बीसीबी ने तेवर दिखाते हुए भारत में अपने टी20 विश्व कप मैच को खेलने से इनकार कर दिया और साथ ही आईसीसी से शिकायत की। हालांकि, आईसीसी ने बीसीबी को आइना दिखाते हुए कहा कि उन्हें अपने मुकाबले भारत में खेलने होंगे, नहीं तो अंक गंवाने होंगे।
- इसी मामले पर फिर तमीम इकबाल ने हाल ही में कहा था कि क्रिकेट के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा था, 'बांग्लादेश क्रिकेट का हित, भविष्य और बाकी सब चीजें सोचकर ही निर्णय होना चाहिए। अगर संवाद से कुछ सुलझ सकता है तो उससे बेहतर कुछ नहीं।'
- तमीम ने यह भी कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देने से पहले अंदरूनी चर्चा जरूरी होती है। उन्होंने कहा, 'जब आप सार्वजनिक टिप्पणी करते हैं तो वापस हटना मुश्किल हो जाता है। 90-95 प्रतिशत फंडिंग आईसीसी से आती है, इसलिए फैसले वही होने चाहिए जो बांग्लादेश क्रिकेट को फायदा दें।'
- इसके बाद बीसीबी के वरिष्ठ पदाधिकारी (बीसीबी के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट) एम. नजमुल इस्लाम ने टिप्पणी की थी कि तमीम इकबाल भारत के पक्ष में खड़े हैं और भारत, आईसीसी और बीसीबी के बीच चल रहे टी20 विश्व कप 2026 वेन्यू विवाद पर बातचीत की वकालत कर रहे हैं।
- यहां तक कि नजमुल ने तमीम को भारत का एजेंट तक बता दिया। इसने आग में घी डालने का काम किया। नजमुल ने अन्य बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर आरोप लगाते हुए कहा था कि खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट जीत नहीं पाए और इसलिए बीसीबी उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं दे भी क्यों? उनकी इस टिप्पणी ने तुरंत आग भड़का दी।
- मीडिया से लेकर ड्रेसिंग रूम तक गुस्सा फैल गया। वरिष्ठ खिलाड़ियों, विशेष रूप से कप्तान नजमुल हुसैन शान्तो और मेहदी हसन मिराज ने क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश (CWAB) की अगुआई में मैदान पर उतरने से इनकार कर दिया। उसी दिन खेले जाने वाले दो बीपीएल मैचों के लिए टीमें टॉस के समय तक मैदान में नहीं पहुंचीं।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस करते बांग्लादेशी खिलाड़ी और नजमुल
- फोटो : Twitter
खिलाड़ियों की मांग: सार्वजनिक माफी और बोर्ड से बाहर का रास्ता
खिलाड़ियों की मुख्य मांग दो थीं:
- एम. नजमुल इस्लाम का सार्वजनिक रूप से माफी मांगना
- बोर्ड से उनका पूर्ण निष्कासन
प्रेस रिलीज में क्या कहा गया था?
- क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश ने प्रेस रिलीज में साफ कहा, 'अगर नजमुल सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हैं और उनके डायरेक्टरशिप पर कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो हम शुक्रवार से खेलने के लिए तैयार होंगे।'
- क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश ने यह भी साफ किया कि उनके विरोध के कारण पुरुष, महिला और अंडर-19 टीमों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर रहे हैं। बयान में लिखा था, 'हमारी महिलाएं विश्व कप क्वालिफायर खेल रही हैं, पुरुष टीम के सामने टी20 विश्व कप है और अंडर-19 टीम भी विश्व कप में है। क्रिकेट रोकना इनके लिए ठीक नहीं।'
तमीम इकबाल और नजमुल
- फोटो : Twitter
बोर्ड की कार्रवाई: नजमुल की कुर्सी गई, पर विवाद शांत नहीं
- खिलाड़ियों के दबाव और टूर्नामेंट के ठप होने के बाद बीसीबी ने आपात बैठक बुलाई। बैठक के बाद बोर्ड ने तत्काल प्रभाव से इस्लाम को फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन पद से हटा दिया, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह रही कि उन्हें बोर्ड डायरेक्टर के पद से नहीं हटाया गया, जिससे खिलाड़ियों की नाराजगी बनी रही।
- बीसीबी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'यह निर्णय बोर्ड के कार्यों के सुचारू और प्रभावी संचालन को जारी रखने के लिए लिया गया है।' साथ ही बोर्ड ने खिलाड़ियों के मान-सम्मान को प्राथमिकता देने की बात भी कही।
बांग्लादेश टीम
- फोटो : ANI
बीपीएल कार्यक्रम प्रभावित: नई तारीखें जारी
बोर्ड के दफ्तर में चल रहे इस औपचारिक ड्रामे का सीधा असर बीपीएल पर पड़ा। 15 जनवरी के मैच टल गए और बाद में बोर्ड ने संशोधित कार्यक्रम जारी कर दिया। बोर्ड की ओर से जारी नोटिस में कहा गया, '15 जनवरी 2026 के मैच अब 16 जनवरी को खेले जाएंगे। 16 और 17 जनवरी के मैच क्रमशः 17 और 18 जनवरी को होंगे। 19 जनवरी को होने वाले एलिमिनेटर और क्वालिफायर अब 20 जनवरी को आयोजित होंगे।' यानी पूरा कार्यक्रम एक दिन पीछे खिसका दिया गया।
बांग्लादेश की टीम
- फोटो : instagram
खिलाड़ी अब भी असंतुष्ट: संकट खत्म नहीं
- भले ही कार्यक्रम जारी हो गया हो और इस्लाम की आंशिक विदाई हो गई हो, पर खिलाड़ियों की मांगें पूरी नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि बोर्ड को यह मुद्दा गंभीरता से लेना चाहिए और इस्लाम को पूरी तरह बोर्ड से बाहर किया जाना चाहिए।
- खिलाड़ियों ने मीडिया को बताया कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं बल्कि सम्मान और पेशेवर माहौल के लिए है। सीडब्ल्यूएबी ने अपने बयान में लिखा, 'हम बीपीएल को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं।'
आगे क्या? संभावित ठहराव
स्थिति इस समय बेहद नाजुक है। अगर इस्लाम सार्वजनिक माफी नहीं मांगते तो बीपीएल के आगे भी टलने या अनिश्चितकालीन स्थगन की स्थिति बन सकती है। बीसीबी भी इसे लेकर चिंतित है क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित होगी। बांग्लादेश के क्रिकेट ऑब्जर्वर्स का मानना है कि यह विवाद देश के क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े प्रशासनिक संकटों में गिना जाएगा।