भारतीय क्रिकेट में जिस वक्त बल्लेबाजों का बोलबाला था, उस दौर में पेशे से इंजीनियर एक गेंदबाज की टीम में एंट्री होती है। गुजरते समय के साथ इस स्पिनर की चमक कुछ ऐसी बिखरी कि आज भी उनके रिकॉर्ड तोड़ने का सपना देश का हर नवोदित खिलाड़ी देखता है। छह फीट 1 इंच लंबे, सौम्य से दिखने वाले अनिल कुंबले भारतीय क्रिकेट इतिहास में सर्वाधिक विकेट चटकाने वाले गेंदबाज हैं।
अनिल कुंबले: इंजीनियर से क्रिकेटर फिर कोच बने भारत के सबसे सफल गेंदबाज की कहानी
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दुनिया के सबसे पढ़े-लिखे क्रिकेटर्स में गिने जाने वाले अनिल कुंबले ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बेहद कम ही लोग जानते हैं कि अनिल कुंबले शुरुआत में तेज गेंदबाजी किया करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने स्पिन को अपना हथियार बना लिया। आईपीएल 2020 के लिए किंग्स इलेवन पंजाब के हेड कोच और ऑपरेशन क्रिकेट नियुक्त किए गए, कुंबले ने वैसे तो अपने करियर में कई यादगार स्पैल डाले, जिसने उन्हें महान गेंदबाज के तौर पर स्थापित किया, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ परफेक्ट 10 का रिकॉर्ड खास है।
भारतीय टेस्ट टीम 2007 के दौर में मुश्किलों से घिरी थी। राहुल द्रविड़ ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था और सौरव गांगुली की पद पर वापसी नामुमकिन थी। सचिन ने कप्तानी से हाथ खड़े कर लिए थे। वन-डे की कमान नए-नए धोनी को सौंपी गई थी। सहवाग टीम मैनेजमेंट की पसंद नहीं थे। ऐसे दौर में कुंबले ने न सिर्फ टीम को संभाला बल्कि कामयाबी की नई परिभाषा भी बनाई। बतौर कप्तान कुंबले ने अपनी पहली सीरीज में पाकिस्तान को न सिर्फ नाकों चने चबवाए बल्कि दिल्ली के फिरोजशाह में पाकिस्तान पर 6 विकेट की जीत हासिल करते हुए 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी हथियाया।
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद जब अनिल कुंबले भारतीय टीम के कोच बने तो कप्तान विराट कोहली के साथ उनके संबंध एक समय के बाद बिगड़ने लगे। कड़े नियम और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के फैसले शायद विराट को पसंद नहीं आए। सीईओ को मैसेज भेजकर चीकू ने शिकायत की।
अनिल कुंबले का कोच के तौर पर रिकॉर्ड भी शानदार था। टीम इंडिया ने उनकी कोचिंग में खेले 17 टेस्ट मैचों में 12 जीते और केवल एक मैच गंवाया था। टीम ने कोई सीरीज नहीं हारी। वन-डे मुकाबलों में भी टीम का प्रदर्शन शानदार रहा।
कुंबले के कार्यकाल में भारत ने 13 वन-डे मैच में आठ जीते, जबकि पांच मैच गंवाए। वहीं पांच टी-20 मैचों में भारत ने दो मैच जीते, दो मैच हारे और एक का कोई नतीजा नहीं निकला, लेकिन बदली हुए हालातों में अपने इसी कद के चलते कुंबले बीसीसीआई के पुराने अधिकारियों की नजरों में भी खटकने लगे थे। आखिरकार 20 जून 2017 उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।