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जीत के बाद टीम इंडिया: संजू और अभिषेक ने बताई अपने कमबैक की कहानी, सूर्य ने किन तीन खिलाड़ियों का लिया नाम?
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: Sovit Chaturvedi
Updated Mon, 09 Mar 2026 08:03 AM IST
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सार
संजू सैमसन के लिए टी20 विश्वकप में जगह बना पाना आसान नहीं रहा। अभिषेक शर्मा भी इस विश्वकप में फॉर्म से जूझते रहे। आइए जानते हैं इन खिलाड़ियों ने चैंपियन बनने के बाद क्या कहा...
संजू सैमसन
- फोटो : IANS
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विस्तार
भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। भारत ने तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। भारत एकमात्र टीम है जिसने अपने घरेलू मैदान पर ये टूर्नामेंट जीता है। भारत की खिताबी जीत में सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन का योगदान अहम रहा जिन्होंने सेमीफाइनल के बाद फाइनल में भी दमदार बल्लेबाजी की। संजू को उनके प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
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टूर्नामेंट में भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाए
सैमसन के लिए टी20 विश्व कप में जगह बना पाना आसान नहीं रहा। टी20 विश्व कप से ठीक पहले भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज हुई थी जिसमें सैमसन का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। इसके बाद उनका प्लेइंग-11 में जगह बना पाना मुश्किल हो गया था। मौजूदा टूर्नामेंट में सैमसन ने पांच मैच खेले, लेकिन वह टीम के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। सैमसन ने 326 रन बनाए।
सैमसन के लिए टी20 विश्व कप में जगह बना पाना आसान नहीं रहा। टी20 विश्व कप से ठीक पहले भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज हुई थी जिसमें सैमसन का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। इसके बाद उनका प्लेइंग-11 में जगह बना पाना मुश्किल हो गया था। मौजूदा टूर्नामेंट में सैमसन ने पांच मैच खेले, लेकिन वह टीम के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। सैमसन ने 326 रन बनाए।
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संघर्ष के दिनों को किया याद
जीत के बाद खिलाड़ियों ने प्रतिक्रिया दी। सैमसन ने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि वह किस तरह न्यूजीलैंड सीरीज के बाद टूट गए थे। सैमसन ने कहा, यह किसी सपने जैसा लग रहा है। मैं बहुत खुश और आभारी हूं। शब्द भी कम पड़ रहे हैं और भावनाएं भी संभल नहीं रही हैं। जहां तक मेरे तीन अर्धशतक की बात है, तो सच कहूं तो इसकी शुरुआत एक–दो साल पहले ही हो गई थी। 2024 के विश्व कप में मैं टीम में था, लेकिन मुझे खेलने का मौका नहीं मिला। तब भी मैं लगातार खुद को उसी स्थिति में सोचता रहा, ख्वाब देखता रहा और मेहनत करता रहा कि जब मौका मिले, तो वैसा ही प्रदर्शन करूं।
जीत के बाद खिलाड़ियों ने प्रतिक्रिया दी। सैमसन ने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि वह किस तरह न्यूजीलैंड सीरीज के बाद टूट गए थे। सैमसन ने कहा, यह किसी सपने जैसा लग रहा है। मैं बहुत खुश और आभारी हूं। शब्द भी कम पड़ रहे हैं और भावनाएं भी संभल नहीं रही हैं। जहां तक मेरे तीन अर्धशतक की बात है, तो सच कहूं तो इसकी शुरुआत एक–दो साल पहले ही हो गई थी। 2024 के विश्व कप में मैं टीम में था, लेकिन मुझे खेलने का मौका नहीं मिला। तब भी मैं लगातार खुद को उसी स्थिति में सोचता रहा, ख्वाब देखता रहा और मेहनत करता रहा कि जब मौका मिले, तो वैसा ही प्रदर्शन करूं।
सैमसन बोले- सचिन सर से की थी चर्चा
उन्होंने कहा, न्यूजीलैंड सीरीज के बाद मैं पूरी तरह टूट गया था। ऐसा लगा था कि मेरे सारे सपने बिखर गए हैं। मैं सोच रहा था कि अब क्या करूं? कई पूर्व खिलाड़ियों ने मुझसे संपर्क किया और मेरी मदद करने की कोशिश की। पिछले कुछ महीनों से मैं लगातार सचिन तेंदुलकर सर के संपर्क में था। मैंने उनसे बात की और लंबी-लंबी चर्चाएं कीं। उनके जैसे महान खिलाड़ी से मार्गदर्शन मिलने से बड़ी बात और क्या हो सकती है? जिन लोगों ने मेरा साथ दिया, मैं उन सबका बहुत आभारी हूं। जहां तक आगे के लक्ष्य की बात है, फिलहाल यह उपलब्धि ही मेरे लिए बहुत बड़ी है। अभी मैं इसे जीना और इसका आनंद लेना चाहता हूं। कुछ दिनों बाद सोचूंगा कि आगे क्या करना है।
उन्होंने कहा, न्यूजीलैंड सीरीज के बाद मैं पूरी तरह टूट गया था। ऐसा लगा था कि मेरे सारे सपने बिखर गए हैं। मैं सोच रहा था कि अब क्या करूं? कई पूर्व खिलाड़ियों ने मुझसे संपर्क किया और मेरी मदद करने की कोशिश की। पिछले कुछ महीनों से मैं लगातार सचिन तेंदुलकर सर के संपर्क में था। मैंने उनसे बात की और लंबी-लंबी चर्चाएं कीं। उनके जैसे महान खिलाड़ी से मार्गदर्शन मिलने से बड़ी बात और क्या हो सकती है? जिन लोगों ने मेरा साथ दिया, मैं उन सबका बहुत आभारी हूं। जहां तक आगे के लक्ष्य की बात है, फिलहाल यह उपलब्धि ही मेरे लिए बहुत बड़ी है। अभी मैं इसे जीना और इसका आनंद लेना चाहता हूं। कुछ दिनों बाद सोचूंगा कि आगे क्या करना है।
कप्तान और कोच के भरोसे पर खरे उतरे अभिषेक
भारत के लिए सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय बना हुआ था, लेकिन उन्होंने भी फाइनल में दमदार प्रदर्शन करते हुए अर्धशतक जड़ा। अभिषेक की फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे और इस बारे में भी चर्चा चल रही थी कि क्या अभिषेक को फाइनल मुकाबले से आराम दिया जाएगा? हालांकि, मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने लगातार अभिषेक का समर्थन किया था। सूर्यकुमार ने कहा था, 'ये खेल 11 खिलाड़ियों का है और इसमें एक या दो खिलाड़ी का दिन खराब हो सकता है।' वहीं, गंभीर को भी भरोसा था कि अभिषेक फॉर्म में लौटेंगे। अभिषेक कप्तान और कोच के भरोसे पर खरे उतरे।
भारत के लिए सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय बना हुआ था, लेकिन उन्होंने भी फाइनल में दमदार प्रदर्शन करते हुए अर्धशतक जड़ा। अभिषेक की फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे और इस बारे में भी चर्चा चल रही थी कि क्या अभिषेक को फाइनल मुकाबले से आराम दिया जाएगा? हालांकि, मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने लगातार अभिषेक का समर्थन किया था। सूर्यकुमार ने कहा था, 'ये खेल 11 खिलाड़ियों का है और इसमें एक या दो खिलाड़ी का दिन खराब हो सकता है।' वहीं, गंभीर को भी भरोसा था कि अभिषेक फॉर्म में लौटेंगे। अभिषेक कप्तान और कोच के भरोसे पर खरे उतरे।
अभिषेक बोले- खुद पर शक होने लगा था
खिताबी जीत के बाद अभिषेक ने कहा, एक बात बिल्कुल साफ थी। मैं इसे पहले भी साझा करना चाहता था, लेकिन आज सबसे सही दिन है। कप्तान और कोच को मुझ पर भरोसा था, जबकि मुझे खुद पर शक होने लगा था। ऐसा अनुभव मुझे पहले कभी नहीं हुआ था, यह मेरे लिए एक मुश्किल टूर्नामेंट था। मैं बस अपने प्रोसेस पर ध्यान दे रहा था, लेकिन मैच-दर-मैच यह आसान नहीं था। फिर भी मुझे इस टीम से प्यार है, क्योंकि जिस तरह उन्होंने मेरा साथ दिया, वह खास है।
उन्होंने कहा, पूरे साल मैं टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन बड़े टूर्नामेंट में वैसा नहीं कर पा रहा था, इसलिए यह मेरे लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद टीम और मैनेजमेंट ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया, वह बहुत मायने रखता है। टूर्नामेंट के बीच में मैं भावुक भी हो गया था और कोच व कप्तान से बात करना चाहता था। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम हमारे लिए बड़े मैच जिताओगे। अगर कोई मुझे शुरू से कहता कि आपके रन नहीं बन रहे तो कोई बात नहीं, आप विश्वकप जीत जाओगे, तो बात अलग होती। मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कोच और सूर्यकुमार समेत सभी सीनियर्स कहते रहे कि आप बड़ा मैच जिताओगे। बड़े दिन का इंतजार करो।
खिताबी जीत के बाद अभिषेक ने कहा, एक बात बिल्कुल साफ थी। मैं इसे पहले भी साझा करना चाहता था, लेकिन आज सबसे सही दिन है। कप्तान और कोच को मुझ पर भरोसा था, जबकि मुझे खुद पर शक होने लगा था। ऐसा अनुभव मुझे पहले कभी नहीं हुआ था, यह मेरे लिए एक मुश्किल टूर्नामेंट था। मैं बस अपने प्रोसेस पर ध्यान दे रहा था, लेकिन मैच-दर-मैच यह आसान नहीं था। फिर भी मुझे इस टीम से प्यार है, क्योंकि जिस तरह उन्होंने मेरा साथ दिया, वह खास है।
उन्होंने कहा, पूरे साल मैं टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन बड़े टूर्नामेंट में वैसा नहीं कर पा रहा था, इसलिए यह मेरे लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद टीम और मैनेजमेंट ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया, वह बहुत मायने रखता है। टूर्नामेंट के बीच में मैं भावुक भी हो गया था और कोच व कप्तान से बात करना चाहता था। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम हमारे लिए बड़े मैच जिताओगे। अगर कोई मुझे शुरू से कहता कि आपके रन नहीं बन रहे तो कोई बात नहीं, आप विश्वकप जीत जाओगे, तो बात अलग होती। मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कोच और सूर्यकुमार समेत सभी सीनियर्स कहते रहे कि आप बड़ा मैच जिताओगे। बड़े दिन का इंतजार करो।
हार्दिक ने माहिका को दिया श्रेय
हार्दिक पांड्या ने कहा, ''मेरे लिए यह पांचवां कम बैक था। मैं क्रिकेट इसीलिए खेला हूं। बारबाडोस के बाद तय किया था कि जो ट्रॉफी खेलूंगा, उसे जीतना चाहूंगा। इस जीत के पीछे बहुत सारी मेहनत है। मुझे भी सिर्फ मेहनत आती है। माहिका जब से आई है, तब से जिंदगी में जीत ही जीत की बात हुई है। माहिका का खास तौर पर जिक्र करना चाहूंगा। इनका सबसे बड़ा सपोर्ट है। मेरे सपोर्ट स्टाफ ने भी बहुत मेहनत की। लोगों को जो हार्दिक पांड्या दिखता है, उसके पीछे इन लोगों की मेहनत है। मेरा आधा करियर बाकी है। मैं कम से कम 10 ट्रॉफी जीतना चाहूंगा। कल से मुझे पता था कि हम चैंपियन हैं। माहिका से भी कहा था कि चिंता मत करो, हम ही जीतेंगे। अभिषेक और ईशान से भी मैंने आज कहा कि याद करो कि जिंदगी में सबसे अच्छा लम्हा क्या था। उसे याद करो और खेलो। संजू सैमसन पर हमें गर्व है।''
हार्दिक पांड्या ने कहा, ''मेरे लिए यह पांचवां कम बैक था। मैं क्रिकेट इसीलिए खेला हूं। बारबाडोस के बाद तय किया था कि जो ट्रॉफी खेलूंगा, उसे जीतना चाहूंगा। इस जीत के पीछे बहुत सारी मेहनत है। मुझे भी सिर्फ मेहनत आती है। माहिका जब से आई है, तब से जिंदगी में जीत ही जीत की बात हुई है। माहिका का खास तौर पर जिक्र करना चाहूंगा। इनका सबसे बड़ा सपोर्ट है। मेरे सपोर्ट स्टाफ ने भी बहुत मेहनत की। लोगों को जो हार्दिक पांड्या दिखता है, उसके पीछे इन लोगों की मेहनत है। मेरा आधा करियर बाकी है। मैं कम से कम 10 ट्रॉफी जीतना चाहूंगा। कल से मुझे पता था कि हम चैंपियन हैं। माहिका से भी कहा था कि चिंता मत करो, हम ही जीतेंगे। अभिषेक और ईशान से भी मैंने आज कहा कि याद करो कि जिंदगी में सबसे अच्छा लम्हा क्या था। उसे याद करो और खेलो। संजू सैमसन पर हमें गर्व है।''
सूर्यकुमार ने संजू, अभिषेक और बुमराह की तारीफ की
सूर्यकुमार यादव ने कहा, ''मुझे लगता है कि इस जीत का एहसास होने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन फिलहाल बहुत खुशी हो रही है। यह एक लंबा सफर रहा है। 2024 वर्ल्ड कप के बाद यह यात्रा शुरू हुई थी। जय शाह, रोहित शर्मा और बाकी लोगों ने मुझ पर भरोसा दिखाया और मुझे टीम की अगुआई करने का मौका दिया। वहां से शुरू हुआ यह सफर आज यहां जीत के साथ पूरा हुआ। पिछले दो साल से हम अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं और हम बस 2024 वर्ल्ड कप में अपनाई गई अच्छी क्रिकेटिंग आदतों को ही आगे बढ़ाना चाहते थे। लड़कों ने इसे बहुत अच्छी तरह अपनाया। खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। आपको समझना होता है कि वे क्या कर सकते हैं। मुझे पता था कि टीम में कई मैच जिताने वाले खिलाड़ी हैं और सही समय आने पर वे कमाल करेंगे। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा बेहतरीन खिलाड़ी हैं। हमें पता था कि वे कुछ खास करेंगे और उन्होंने फाइनल में वही किया। जसप्रीत बुमराह तो एक पीढ़ी में एक बार आने वाले गेंदबाज हैं। मैं उन्हें नेशनल ट्रेजर कह सकता हूं। उन्हें पता है कि काम कैसे करना है। वह अपने काम में सबसे बेहतरीन हैं।''
सूर्यकुमार यादव ने कहा, ''मुझे लगता है कि इस जीत का एहसास होने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन फिलहाल बहुत खुशी हो रही है। यह एक लंबा सफर रहा है। 2024 वर्ल्ड कप के बाद यह यात्रा शुरू हुई थी। जय शाह, रोहित शर्मा और बाकी लोगों ने मुझ पर भरोसा दिखाया और मुझे टीम की अगुआई करने का मौका दिया। वहां से शुरू हुआ यह सफर आज यहां जीत के साथ पूरा हुआ। पिछले दो साल से हम अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं और हम बस 2024 वर्ल्ड कप में अपनाई गई अच्छी क्रिकेटिंग आदतों को ही आगे बढ़ाना चाहते थे। लड़कों ने इसे बहुत अच्छी तरह अपनाया। खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। आपको समझना होता है कि वे क्या कर सकते हैं। मुझे पता था कि टीम में कई मैच जिताने वाले खिलाड़ी हैं और सही समय आने पर वे कमाल करेंगे। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा बेहतरीन खिलाड़ी हैं। हमें पता था कि वे कुछ खास करेंगे और उन्होंने फाइनल में वही किया। जसप्रीत बुमराह तो एक पीढ़ी में एक बार आने वाले गेंदबाज हैं। मैं उन्हें नेशनल ट्रेजर कह सकता हूं। उन्हें पता है कि काम कैसे करना है। वह अपने काम में सबसे बेहतरीन हैं।''