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भारत बनाम न्यूजीलैंड: राष्ट्रीय टीम में वापसी को लेकर क्या बोले भुवनेश्वर कुमार? बताया- किस तरह मिली सफलता

Sat, 24 Oct 2026 01:32 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, क्राइस्टचर्च
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, क्राइस्टचर्च Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Sat, 24 Oct 2026 01:32 PM IST
सार

  • भारतीय टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने राष्ट्रीय टीम में अपनी वापसी पर प्रतिक्रिया दी।
  • बीसीसीआई ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया जिसमें भुवनेश्वर ने बताया कि टीम से बाहर रहने के बावजूद उन्होंने मेहनत करना नहीं छोड़ा।
  • भुवनेश्वर ने हालांकि कहा कि उन्होंने कभी भविष्य के बारे में ज्यादा नहीं सोचा।

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India Vs New Zealand: pacer Bhuvneshwar Kumar on his Team India comeback say Never chased this jersey
भुवनेश्वर कुमार - फोटो : IANS

विस्तार

दाएं हाथ के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी की है। भुवनेश्वर ने कहा है कि खुद से कोई उम्मीद न रखने और अपने काम पर फोकस करने की वजह से राष्ट्रीय टीम से दूर रहने के बावजूद उनकी तैयारियों पर कभी कोई असर नहीं पड़ा। भुवनेश्वर को न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में जगह मिली है। वह शुरुआती दोनों टी20 में प्लेइंग-11 में जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। 
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बीसीसीआई ने साझा किया वीडियो 
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में भुवनेश्वर कुमार ने कहा, पिछले तीन-चार वर्षों में मैंने भविष्य की चिंता करने की जगह वर्तमान पर फोकस किया है। मैं जिस सोच में हूं, वह बहुत सामान्य है। मुझे खुद से कोई उम्मीद नहीं है। मुझे लगता है कि पिछले 3-4 वर्षों में मेरे लिए चीजें ऐसे ही हुईं। कोई उम्मीद नहीं, बस अपना काम करते रहो। आम तौर पर हम वर्तमान में रहने की बात करते हैं। हम भविष्य के बारे में नहीं सोचते। मुझे लगता है कि मैं अभी इसी सोच में हूं। मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे यही सिखाया कि वर्तमान में रहो। पिछले चार साल में, मैं कभी इंडियन जर्सी के पीछे नहीं भागा। मुझे यह भी नहीं पता था कि वे चार साल कब आएंगे।
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India Vs New Zealand: pacer Bhuvneshwar Kumar on his Team India comeback say Never chased this jersey
भुवनेश्वर कुमार - फोटो : ANI
किसे दिया श्रेय?
भारतीय टीम में वापसी का श्रेय भुवनेश्वर ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल को दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में उनकी वापसी होगी या नहीं, इसका उन्हें पता नहीं था, लेकिन घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के लिए तैयारी जारी रही। भुवनेश्वर ने कहा, पिछले दो आईपीएल में, मैं बिना किसी उम्मीद के गया था। लेकिन ऐसा नहीं था कि मैंने तैयारी नहीं की थी। मैंने फिटनेस से लेकर स्किल्स और मानसिक पक्ष, सब पर काम किया। हां, इस बात की उम्मीद शून्य थी कि मैं क्या करूंगा। मुझे टीम के लिए योगदान देना था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे दो साल में दो आईपीएल खिताब मिलेंगे।

भुवनेश्वर का मानना है कि आईपीएल ने उन्हें टी20 क्रिकेट की बदलती जरूरतों को समझने में भी मदद की है, जिसमें बल्लेबाज ज्यादा आक्रामक हो गए हैं और हाई स्कोर आम बात हो गई है। उन्होंने कहा, मुझे पता है कि एक इम्पैक्ट प्लेयर होता है। लेकिन उस इम्पैक्ट प्लेयर ने बल्लेबाज का माइंडसेट बहुत बदल दिया है। वे पहली बॉल से ही पीछे पड़ जाते हैं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हम गेंदबाजों को पीड़ित मानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, एक गेंदबाज के तौर पर आप गेम को नियंत्रित कर सकते हैं। आप चाह सकते हैं कि वे वहीं हिट करें जहां हम चाहते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक नजरिया है। पिछले कुछ वर्षों में गेम में काफी बदलाव आया है, सिर्फ फ्रेंचाइजी क्रिकेट में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी। 200 एक छोटा स्कोर हो गया है।
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भुवनेश्वर कुमार - फोटो : PTI
विदेश में खेलने की चुनौती पर क्या बोले भुवी
इस अनुभवी पेसर ने विदेशों में खेलने की चुनौतियों के बारे में भी बताया, खासकर सेना देशों में, जहां बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों के लिए हालात मुश्किल हो सकते हैं। उन्होंने कहा, यह कोई बड़ी बात नहीं है। हम एक युवा टीम हैं। हम कई वर्षों से खेल रहे हैं। जब आप किसी विदेशी दौरे पर आते हैं, तो यह मुश्किल होता है। हालात अलग होते हैं। आम तौर पर, हम उम्मीदों के साथ आते हैं कि शायद हमें किसी फास्ट बॉलर से कुछ मिलेगा, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों से, जिस तरह से हम व्हाइट बॉल फॉर्मेट देख रहे हैं, गेंदबाजों को ज्यादा सपोर्ट नहीं मिलता। मैंने महसूस किया है कि टी20 एक ऐसा फॉर्मेट बन गया है जहां आपको एक गेंदबाज के तौर पर बहुत परिपक्वता की जरूरत होती है।  

भुवनेश्वर ने कहा, जब भी हम किसी विदेशी दौरे पर आते हैं, तो सबसे बड़ा माइंडसेट वहां जीतने का होता है, खासकर जब हम सेना (साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों में आते हैं। यह आसान नहीं है, लेकिन ऐसे देशों में जीतने से आपको बहुत संतुष्टि मिलती है। जिस तरह से हमने पहला गेम जीता, मुझे पता है कि यह गेंदबाजों के लिए मुश्किल था। बल्लेबाजों ने जिस तरह चेज किया, उससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले मैच में जीत आगे के मैचों और सीरीज के लिए आत्मविश्वास लेकर आती है।
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