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ललित मोदी का दावा: सीनियर खिलाड़ियों से की थी 2007 T20 विश्वकप खेलने की अपील, सचिन-गांगुली का क्या था रुख?
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Fri, 05 Jun 2026 11:30 AM IST
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सार
आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी इन दिनों काफी चर्चा में हैं। ललित मोदी ने अब एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि 2007 में उन्होंने इंग्लैंड दौरे के दौरान सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे सीनियर खिलाड़ियों से टी20 क्रिकेट खेलने की विनती की थी।
ललित मोदी
- फोटो : ANI
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विस्तार
आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि 2007 में उन्होंने सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे सीनियर खिलाड़ियों से टी20 क्रिकेट खेलने की अपील की थी। ललित मोदी ने बताया कि किस तरह वह 2007 में भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान ड्रेसिंग रूम में भारतीय खिलाड़ियों के पास गए थे और उन्होंने इन खिलाड़ियों को पहले टी20 विश्व कप में खेलने के लिए मनाने की कोशिश की थी।
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ललित मोदी बोले- टी20 को लेकर शुरुआत में था संदेह
न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में ललित मोदी ने खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने 2007 में इंग्लैंड दौरे के दौरान भारतीय खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया और उन्हें पहले आईसीसी टी20 विश्व कप में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि कई खिलाड़ी नए प्रारूप में खेलने के लिए अनिच्छुक थे, इसे बेवकूफी भरा खेल बताते हुए उन्होंने लंबे दौरे के बाद थकान और अपने परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा का हवाला दिया था। आईपीएल के संस्थापक ने उस रवैये की तुलना वर्तमान समय से करते हुए कहा कि टी20 क्रिकेट का महत्व इतना बढ़ गया है कि अब अगर कोई खिलाड़ी विश्व कप से बाहर रहने का विकल्प चुनता है तो प्रशंसकों, खिलाड़ियों और प्रशासकों की ओर से व्यापक आलोचना होगी।
- ललित मोदी के अनुसार, शुरुआत में टीम के भीतर इस प्रारूप को लेकर संदेह का माहौल था।
- भारत का इंग्लैंड दौरा 19 जुलाई से आठ सितंबर 2007 तक था जिसमें टीम को तीन टेस्ट और सात मैचों की वनडे सीरीज खेलनी थी। वहीं, पहले टी20 विश्व कप की शुरुआत 11 सितंबर 2007 में हुई थी।
- राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन टी20 विश्व कप के लिए महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में युवा टीम चुनी गई थी जिसमें कई सीनियर खिलाड़ी शामिल नहीं थे।
- 2007 टी20 विश्व कप टीम में वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, दिनेश कार्तिक, आरपी सिंह और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी शामिल थे।
न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में ललित मोदी ने खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने 2007 में इंग्लैंड दौरे के दौरान भारतीय खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया और उन्हें पहले आईसीसी टी20 विश्व कप में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि कई खिलाड़ी नए प्रारूप में खेलने के लिए अनिच्छुक थे, इसे बेवकूफी भरा खेल बताते हुए उन्होंने लंबे दौरे के बाद थकान और अपने परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा का हवाला दिया था। आईपीएल के संस्थापक ने उस रवैये की तुलना वर्तमान समय से करते हुए कहा कि टी20 क्रिकेट का महत्व इतना बढ़ गया है कि अब अगर कोई खिलाड़ी विश्व कप से बाहर रहने का विकल्प चुनता है तो प्रशंसकों, खिलाड़ियों और प्रशासकों की ओर से व्यापक आलोचना होगी।
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खिलाड़ियों ने ललित मोदी से क्या कहा?
ललित मोदी ने कहा, 2007 में जब भारत इंग्लैंड दौरे पर था, तब मैं ड्रेसिंग रूम में हर खिलाड़ी के पास गया। मैंने उनसे कहा कि प्लीज, मैं आपसे विनती करता हूं कि टी20 खेलें। इन खिलाड़ियों ने कहा कि ललित, क्या आप मजाक कर रहे हैं? यह कैसा बेवकूफी भरा खेल है? हम इसमें नहीं खेलना चाहते। ड्रेसिंग रूम में हर किसी ने मुझसे यही कहा कि अरे, हमारा दौरा लंबा रहा है। हम अपने परिवारों के साथ रहना चाहते हैं। अब आज के समय में क्या जनता, खिलाड़ी और प्रशासक किसी खिलाड़ी के विश्व कप न खेलने को स्वीकार करेंगे? हंगामा मच जाएगा।
ललित मोदी ने आगे कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 2007 के टी20 विश्व कप में अपनी पूरी टीम नहीं भेजी, बल्कि एमएस धोनी की अगुआई वाली एक युवा और अपेक्षाकृत अनुभवहीन टीम को मौका दिया। कई स्थापित सितारों की अनुपस्थिति पर उन्होंने कहा कि प्रशंसकों, खिलाड़ियों और प्रशासकों द्वारा विश्व कप टूर्नामेंटों को दिए जाने वाले महत्व को देखते हुए मौजूदा समय में ऐसा निर्णय अकल्पनीय होगा। ललित ने कहा कि भारत में टी20 क्रिकेट को शुरुआत में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, सीमित दर्शक संख्या के कारण यह प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं के लिए आकर्षक नहीं था।
ललित मोदी ने कहा, भारत में टी20 क्रिकेट पर किसी को भरोसा नहीं था। अगर दर्शक नहीं होंगे तो विज्ञापन से कमाई नहीं होगी। विज्ञापन से कमाई नहीं होगी तो सब्सक्रिप्शन भी नहीं मिलेगा। अगर कोई देख रहा होगा तो पैसा आएगा। अगर कोई नहीं देख रहा होगा तो पैसा नहीं आएगा। आज के समय में जो भी चीज दर्शकों को आकर्षित करती है, उसे विज्ञापनदाताओं से पैसा मिलता है।
ललित मोदी ने कहा, 2007 में जब भारत इंग्लैंड दौरे पर था, तब मैं ड्रेसिंग रूम में हर खिलाड़ी के पास गया। मैंने उनसे कहा कि प्लीज, मैं आपसे विनती करता हूं कि टी20 खेलें। इन खिलाड़ियों ने कहा कि ललित, क्या आप मजाक कर रहे हैं? यह कैसा बेवकूफी भरा खेल है? हम इसमें नहीं खेलना चाहते। ड्रेसिंग रूम में हर किसी ने मुझसे यही कहा कि अरे, हमारा दौरा लंबा रहा है। हम अपने परिवारों के साथ रहना चाहते हैं। अब आज के समय में क्या जनता, खिलाड़ी और प्रशासक किसी खिलाड़ी के विश्व कप न खेलने को स्वीकार करेंगे? हंगामा मच जाएगा।
ललित मोदी ने आगे कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 2007 के टी20 विश्व कप में अपनी पूरी टीम नहीं भेजी, बल्कि एमएस धोनी की अगुआई वाली एक युवा और अपेक्षाकृत अनुभवहीन टीम को मौका दिया। कई स्थापित सितारों की अनुपस्थिति पर उन्होंने कहा कि प्रशंसकों, खिलाड़ियों और प्रशासकों द्वारा विश्व कप टूर्नामेंटों को दिए जाने वाले महत्व को देखते हुए मौजूदा समय में ऐसा निर्णय अकल्पनीय होगा। ललित ने कहा कि भारत में टी20 क्रिकेट को शुरुआत में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, सीमित दर्शक संख्या के कारण यह प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं के लिए आकर्षक नहीं था।
ललित मोदी ने कहा, भारत में टी20 क्रिकेट पर किसी को भरोसा नहीं था। अगर दर्शक नहीं होंगे तो विज्ञापन से कमाई नहीं होगी। विज्ञापन से कमाई नहीं होगी तो सब्सक्रिप्शन भी नहीं मिलेगा। अगर कोई देख रहा होगा तो पैसा आएगा। अगर कोई नहीं देख रहा होगा तो पैसा नहीं आएगा। आज के समय में जो भी चीज दर्शकों को आकर्षित करती है, उसे विज्ञापनदाताओं से पैसा मिलता है।
युवराज के छह छक्कों ने जगाई टी20 में रुचि
पूर्व क्रिकेट प्रशासक ने यह भी दावा किया कि दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहले टी20 विश्व कप को शुरुआत में दर्शकों की संख्या के मामले में काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन युवराज सिंह के एक ओवर में लगाए गए छह छक्कों ने टूर्नामेंट को व्यापक रूप से चर्चा में ला दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने दर्शकों की रुचि और रेटिंग में उल्लेखनीय वृद्धि की। ललित मोदी ने आगे कहा कि उन्होंने ऐसे शानदार प्रदर्शनों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया और टी20 क्रिकेट के लिए वैश्विक समर्थन जुटाने के लिए काम किया, जब इसकी सफलता की संभावना पर बहुत कम लोगों को विश्वास था।
पूर्व क्रिकेट प्रशासक ने यह भी दावा किया कि दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहले टी20 विश्व कप को शुरुआत में दर्शकों की संख्या के मामले में काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन युवराज सिंह के एक ओवर में लगाए गए छह छक्कों ने टूर्नामेंट को व्यापक रूप से चर्चा में ला दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने दर्शकों की रुचि और रेटिंग में उल्लेखनीय वृद्धि की। ललित मोदी ने आगे कहा कि उन्होंने ऐसे शानदार प्रदर्शनों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया और टी20 क्रिकेट के लिए वैश्विक समर्थन जुटाने के लिए काम किया, जब इसकी सफलता की संभावना पर बहुत कम लोगों को विश्वास था।