लगभग दो दशक तक घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज नमन ओझा ने सोमवार को क्रिकेट को अलविदा कह दिया। संन्यास की घोषणा करते समय ओझा की आंखे नम हो गई थी। नमन ने जैसे ही बोलना शुरू किया तो उनके एक एक शब्द लड़खड़ा रहे थे।
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नमन ओझा
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हालत ऐसी हो गई थी कि मोबाइल में लिखा हुआ बयान भी ठीक से नहीं पढ़ पा रहा था यह क्रिकेटर। हालांकि, बाद में उन्होंने खुद को संभाला और रुंधे गले से अपनी औपचारिकता निभाई। संन्यास की घोषणा करते समय ओझा ने कहा, 'मैं क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले रहा हूं। यह लंबा सफर था और राज्य एवं राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का मेरा सपना पूरा हुआ।'
इस दौरान उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय टीम में मौका देने के लिए मध्यप्रदेश क्रिकेट संघ (एमपीसीए) और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) का शुक्रिया अदा किया। रणजी में सबसे ज्यादा शिकार करने वाले इस भारतीय विकेटकीपर ने कहा, 'मैं अपने करियर के दौरान साथ देने के लिए एमपीसीए, बीसीसीआई और साथी खिलाड़ियों और कोचों के अलावा आपने परिवार और दोस्तों का शुक्रिया करना चाहूंगा।'
ओझा ने कहा, 'मेरे पीठ में दर्द की समस्या है ऐसे में लंबे प्रारूप में मुझे समस्या हो रही थी। इसका एक और कारण यह भी है कि किसी टीम से जुड़ने के बाद मुझे कम से कम छह महीने तक उनके साथ रहना होगा। मैं परिवार के साथ समय बिताना चाहता हूं।' रणजी ट्रॉफी में विकेटकीपर के तौर पर सबसे ज्यादा शिकार (351) का रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले मध्यप्रदेश के इस दिग्गज ने कहा कि वह अब दुनिया भर के टी-20 लीगों में खेलना चाहते हैं।
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एमएस धोनी
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महज 17 साल की उम्र में 2000-01 सत्र से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले इस खिलाड़ी के लिए करिश्माई महेंद्र सिंह धोनी के युग में राष्ट्रीय टीम के लिए अधिक मौके मिलना मुश्किल हो गया। घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में शानदार प्रदर्शन के बाद 2010 में श्रीलंका के खिलाफ वन-डे और जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के दो मैचों में खेलने का मौका मिला। इसके बाद उन्हें टीम में मौका नहीं मिला।