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Sachin Tendulkar Birthday: जावेद मियांदाद की जगह फील्डिंग करने उतरे थे सचिन, नहीं पकड़ पाए थे कपिल का कैच
कुलदीप पंवार, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sovit Chaturvedi
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:18 PM IST
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सार
भारतीय टीम के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी। लेकिन एक मैच में वह जावेद मियांदाद की जगह फील्डिंग करने उतरे थे। यह तब की बात है जब सचिन उभरते हुए खिलाड़ी थे और उन्होंने भारत के लिए डेब्यू भी नहीं किया था।
सचिन तेंदुलकर
- फोटो : ANI
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विस्तार
क्रिकेट इतिहास में 'भगवान' का तमगा सिर्फ सचिन तेंदुलकर को ही मिला है। मास्टर ब्लास्टर नाम से मशहूर सचिन शुक्रवार को 53 साल के हो गए हैं। यूं तो सचिन ने भारत के लिए सफर नवंबर, 1989 में पाकिस्तान दौरे पर शुरू किया था, लेकिन यदि कहूं कि भारत से पहले वे पाकिस्तान के लिए खेल चुके थे तो आप क्या कहेंगे? यह कहानी सचिन ने अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माय वें' में बताई थी। दरअसल 20 जनवरी, 1987 को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में पाकिस्तान और सीसीआई इलेवन के बीच क्रिकेट मैच हुआ।
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सचिन ने 25 मिनट तक की थी फील्डिंग
यह मैच क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (सीसीआई) की 50वीं वर्षगांठ पर खेला गया था, जिसके लिए इमरान खान की कप्तानी में पाकिस्तान टीम खासतौर पर मुंबई आई थी। इस मैच में मुंबई क्रिकेट संघ ने 13 साल के सचिन तेंदुलकर समेत कई नवोदित उभरते हुए क्रिकेटरों को बुलाया था। बीच में जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर चले गए। इमरान ने सीसीआई के कप्तान हेमंत करकरे से स्थानापन्न फील्डर मांगा। बराबर में खड़े सचिन ने मराठी में करकरे से पूछा, मी जाउ का (क्या मैं जा सकता हूं)। फिर सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान की जर्सी में करीब 25 मिनट तक फील्डिंग की। इस तरह सचिन भारत के लिए खेलने से पहले ही पाकिस्तान के क्रिकेटर बन गए।
यह मैच क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (सीसीआई) की 50वीं वर्षगांठ पर खेला गया था, जिसके लिए इमरान खान की कप्तानी में पाकिस्तान टीम खासतौर पर मुंबई आई थी। इस मैच में मुंबई क्रिकेट संघ ने 13 साल के सचिन तेंदुलकर समेत कई नवोदित उभरते हुए क्रिकेटरों को बुलाया था। बीच में जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर चले गए। इमरान ने सीसीआई के कप्तान हेमंत करकरे से स्थानापन्न फील्डर मांगा। बराबर में खड़े सचिन ने मराठी में करकरे से पूछा, मी जाउ का (क्या मैं जा सकता हूं)। फिर सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान की जर्सी में करीब 25 मिनट तक फील्डिंग की। इस तरह सचिन भारत के लिए खेलने से पहले ही पाकिस्तान के क्रिकेटर बन गए।
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15 मीटर दौड़े पर नहीं लपक पाए कैच
इमरान ने सचिन को लॉन्ग-ऑन पर खड़ा किया था। कपिल देव ने ऊंचा शॉट मारा, जिसे कैच में बदलने के लिए सचिन ने 15 मीटर दौड़ लगाई। हालांकि वे कैच तक नहीं पहुंच सके, लेकिन उनके समर्पण की सभी ने तारीफ की। इसके नौ महीने बाद सचिन 1987 विश्व कप में बॉलबॉय के रूप में शामिल किए गए थे।
इमरान ने सचिन को लॉन्ग-ऑन पर खड़ा किया था। कपिल देव ने ऊंचा शॉट मारा, जिसे कैच में बदलने के लिए सचिन ने 15 मीटर दौड़ लगाई। हालांकि वे कैच तक नहीं पहुंच सके, लेकिन उनके समर्पण की सभी ने तारीफ की। इसके नौ महीने बाद सचिन 1987 विश्व कप में बॉलबॉय के रूप में शामिल किए गए थे।
छह बार वनडे विश्व कप में लिया हिस्सा
सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर में कुल छह वनडे विश्व कप में हिस्सा लिया। वह सर्वाधिक बार इस वैश्विक टूर्नामेंट में खेलने वाले खिलाड़ी हैं। सचिन के अलावा पाकिस्तान के जावेद मियांदाद ने भी अपने करियर में कुल इतनी ही बार विश्व कप खेला था। सचिन 1992, 1996, 1999, 2003, 2007 और 2011 वनडे विश्व कप टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने अपने करियर के आखिरी विश्व कप में इस ट्रॉफी को जीता। सचिन के लिए विश्व कप जीतना सबसे बड़ी उपलब्धि है और खास बात यह रही कि मास्टर ब्लास्टर ने अपने होम ग्राउंड वानखेड़े पर ही इस ट्रॉफी को अपने हाथों में उठाया।
सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर में कुल छह वनडे विश्व कप में हिस्सा लिया। वह सर्वाधिक बार इस वैश्विक टूर्नामेंट में खेलने वाले खिलाड़ी हैं। सचिन के अलावा पाकिस्तान के जावेद मियांदाद ने भी अपने करियर में कुल इतनी ही बार विश्व कप खेला था। सचिन 1992, 1996, 1999, 2003, 2007 और 2011 वनडे विश्व कप टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने अपने करियर के आखिरी विश्व कप में इस ट्रॉफी को जीता। सचिन के लिए विश्व कप जीतना सबसे बड़ी उपलब्धि है और खास बात यह रही कि मास्टर ब्लास्टर ने अपने होम ग्राउंड वानखेड़े पर ही इस ट्रॉफी को अपने हाथों में उठाया।

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