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Virat Kohli: 'गलतियों में सुधार के बजाय छोड़कर भाग गए', कोहली के टेस्ट से संन्यास पर मांजरेकर का अटपटा बयान
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Tue, 06 Jan 2026 04:23 PM IST
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सार
पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के फैसले पर टिप्पणी की है। उनका मानना है कि किंग कोहली ने अपने फॉर्म में सुधार के बजाय लाल गेंद प्रारूप को छोड़ना बेहतर समझा।
विराट कोहली-संजय मांजरेकर
- फोटो : ANI
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विस्तार
पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास पर बात की है। उनका मानना है कि किंग कोहली ने अपनी गलतियों में सुधार के बजाय प्रारूप को छोड़ना बेहतर समझा। उनका मानना है कि पूर्व कप्तान को अपने फॉर्म में सुधार के लिए प्रयास करने चाहिए थे।
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मांजरेकर ने उठाए कोहली के टेस्ट से संन्यास पर सवाल
मांजरेकर ने कहा कि जब जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं और स्टीव स्मिथ व केन विलियमसन जैसे समकालीन खिलाड़ी अपनी विरासत को और मज़बूत कर रहे हैं, ऐसे समय में कोहली का टेस्ट क्रिकेट से दूर होना और भी ज्यादा खलता है। उनके अनुसार, कोहली पिछले पांच साल में टेस्ट क्रिकेट में जिस तरह संघर्ष करते रहे, उस पर गंभीरता से काम नहीं किया गया।
इंस्टाग्राम पर साझा एक वीडियो में मांजरेकर ने कहा, 'जब मैं जो रूट को टेस्ट क्रिकेट में आगे बढ़ते देखता हूं तो मेरा ध्यान विराट कोहली की ओर चला जाता है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संन्यास से पहले के पांच साल में, जब वह औसतन सिर्फ 31 रन बना पा रहे थे, उन्होंने पूरे दिल से यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर समस्या क्या है।'
कोहली के सिर्फ वनडे खेलने से खफा मांजरेकर
मांजरेकर का मानना है कि कोहली तकनीकी बदलाव, मानसिक मजबूती या फिर कुछ समय के लिए टीम से बाहर रहकर घरेलू और विदेशी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलकर वापसी की कोशिश कर सकते थे। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ती तो कोहली को रणजी ट्रॉफी, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड की फर्स्ट क्लास क्रिकेट में जाकर खुद को दोबारा साबित करना चाहिए था। इसके अलावा, मांजरेकर ने कोहली के वनडे क्रिकेट जारी रखने के फैसले पर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि अगर कोहली सभी प्रारूपों से संन्यास ले लेते तो उन्हें उतनी निराशा नहीं होती। उनके मुताबिक, एक शीर्ष क्रम के बल्लेबाज के लिए वनडे क्रिकेट सबसे आसान प्रारूप है, जबकि असली परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में होती है।
मांजरेकर ने कहा, 'टेस्ट क्रिकेट आपको तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती के हर पहलू से परखता है। टी20 की चुनौतियां अलग हैं, लेकिन एक बल्लेबाज की असली पहचान टेस्ट क्रिकेट से बनती है। विराट जैसे फिट खिलाड़ी से उम्मीद थी कि वह अपनी फॉर्म में वापसी के लिए संघर्ष जारी रखते।'
मांजरेकर ने कहा कि जब जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं और स्टीव स्मिथ व केन विलियमसन जैसे समकालीन खिलाड़ी अपनी विरासत को और मज़बूत कर रहे हैं, ऐसे समय में कोहली का टेस्ट क्रिकेट से दूर होना और भी ज्यादा खलता है। उनके अनुसार, कोहली पिछले पांच साल में टेस्ट क्रिकेट में जिस तरह संघर्ष करते रहे, उस पर गंभीरता से काम नहीं किया गया।
इंस्टाग्राम पर साझा एक वीडियो में मांजरेकर ने कहा, 'जब मैं जो रूट को टेस्ट क्रिकेट में आगे बढ़ते देखता हूं तो मेरा ध्यान विराट कोहली की ओर चला जाता है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संन्यास से पहले के पांच साल में, जब वह औसतन सिर्फ 31 रन बना पा रहे थे, उन्होंने पूरे दिल से यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर समस्या क्या है।'
कोहली के सिर्फ वनडे खेलने से खफा मांजरेकर
मांजरेकर का मानना है कि कोहली तकनीकी बदलाव, मानसिक मजबूती या फिर कुछ समय के लिए टीम से बाहर रहकर घरेलू और विदेशी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलकर वापसी की कोशिश कर सकते थे। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ती तो कोहली को रणजी ट्रॉफी, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड की फर्स्ट क्लास क्रिकेट में जाकर खुद को दोबारा साबित करना चाहिए था। इसके अलावा, मांजरेकर ने कोहली के वनडे क्रिकेट जारी रखने के फैसले पर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि अगर कोहली सभी प्रारूपों से संन्यास ले लेते तो उन्हें उतनी निराशा नहीं होती। उनके मुताबिक, एक शीर्ष क्रम के बल्लेबाज के लिए वनडे क्रिकेट सबसे आसान प्रारूप है, जबकि असली परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में होती है।
मांजरेकर ने कहा, 'टेस्ट क्रिकेट आपको तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती के हर पहलू से परखता है। टी20 की चुनौतियां अलग हैं, लेकिन एक बल्लेबाज की असली पहचान टेस्ट क्रिकेट से बनती है। विराट जैसे फिट खिलाड़ी से उम्मीद थी कि वह अपनी फॉर्म में वापसी के लिए संघर्ष जारी रखते।'