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खिलाड़ियों का सियासत से मोह: खेल के मैदान से राजनीति के अखाड़े में उतरे हैं ये नाम; हासिल कर चुके बड़े मुकाम

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sovit Chaturvedi Updated Tue, 31 Mar 2026 05:44 PM IST
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सार

लिएंडर पेस ने तृणमूल कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली है। यह पहली बार नहीं है जब किसी खिलाड़ी ने राजनीति दल का दामन थामा है। कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो राजनीति में बड़े मुकाम तक पहुंच चुके हैं। आइए जानते हैं इन खिलाड़ियों के बारे में...

Sports to Politics Journey Azharuddin Navjot Sidhu Leander Paes Who Entered Political Career
राजनीति में शामिल हो चुके खिलाड़ी - फोटो : IANS
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विस्तार

खेल के मैदान में नाम कमा चुके कई खिलाड़ी राजनीति के अखाड़े में भी उतरे हैं। अलग-अलग खेलों के इन खिलाड़ियों का सियासत से काफी मोह है और ये सिलसिला अभी भी जारी है। आने वाले दिनों में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं जिनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी और असम शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल से पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अशोक डिंडा को फिर चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि मंगलवार को दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भी भगवा पार्टी का दामन थाम लिया है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इस बार पूर्व भारतीय बल्लेबाज मनोज तिवारी को टिकट नहीं दिया है जो ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री भी हैं। 
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खेल से सियासत तक का सफर
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी खिलाड़ी ने राजनीति में करियर शुरू किया है। इससे पहले भी कई खिलाड़ी राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। कई खिलाड़ी तो राजनीति के मैदान में भी बड़े मुकाम पर पहुंचे हैं। कुछ खिलाड़ी ऊंचे पदों पर पहुंचकर कैबिनेट मंत्री बन गए तो वहीं कुछ अन्य के चुनावों में मिलेजुले नतीजे रहे और वे अब भी अपना रास्ता तलाश रहे हैं।  इन सभी खिलाड़ियों ने यह दिखाया है कि खेल से मिली लोकप्रियता और अनुशासन का इस्तेमाल जनता की सेवा और प्रशासन में भी किया जा सकता है। आइए उन कुछ मशहूर खिलाड़ियों के नामों पर एक नजर डालते हैं जिन्होंने अपने करियर में यह बदलाव किया...
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मोहम्मद अजहरुद्दीन
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान 2009 में कांग्रेस में शामिल हुए और उसी साल उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से लोकसभा सदस्य बने। लेकिन 2014 और 2023 में हुए अगले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हैदराबाद क्रिकेट संघ के प्रमुख के तौर पर कुछ समय काम करने के बाद अजहर को तेलंगाना में रेवंत रेड्डी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया जहां उन्हें सार्वजनिक उद्यम और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया।

नवजोत सिंह सिद्धू
भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कई पार्टियों भाजपा, कांग्रेस और उनकी अपनी पार्टी आवाज-ए-पंजाब के लिए काम किया। वह भाजपा के टिकट पर 2004 और 2009 के आम चुनाव जीते। लेकिन 2017 में कांग्रेस में शामिल हो गए और अमृतसर पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव जीता। उन्हें 2022 के राज्य चुनावों में उसी सीट पर आप पार्टी के प्रतिद्वंद्वी ने हरा दिया। फिलहाल वह राजनीति से कुछ समय के लिए दूर हैं।

राज्यवर्धन सिंह राठौड़
इस शीर्ष निशानेबाज ने ओलंपिक में भारत के लिए निशानेबाजी का पहला रजत पदक जीता था। वह 2013 में भाजपा से जुड़े और 2014 के आम चुनावों में जयपुर से लोकसभा के लिए चुने गए। उन्होंने 2019 के चुनावों में भी जीत हासिल की। 2023 में उन्होंने राज्य की राजनीति का रुख किया और उसी साल चुनाव जीता जिसके बाद उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया।

साइना नेहवाल
दुनिया की पूर्व नंबर एक और लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली बैडमिंटन की इस दिग्गज खिलाड़ी 2020 में अपनी बहन के साथ भाजपा से जुड़ी लेकिन उन्होंने अभी तक चुनावों में अपनी किस्मत नहीं आजमाई है।

गौतम गंभीर
दो बार की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और भारतीय टीम के मौजूदा कोच ने 2019 में भाजपा के जरिए राजनीति में कदम रखा। इसी साल उन्होंने पूर्वी दिल्ली से आम चुनाव जीता। लेकिन 2024 में उन्होंने एक क्रिकेट कोच के तौर पर अपने खेल करियर को फिर से शुरू करने के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली।

कीर्ति आजाद
विश्व कप 1983 की विजेता टीम के सदस्य ने सबसे पहले भाजपा के जरिए राजनीति में कदम रखा और बिहार के दरभंगा से विधानसभा और लोकसभा चुनाव जीता। लेकिन 2015 में आजाद को वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के साथ अनबन के चलते भाजपा से निलंबित कर दिया गया और बाद में वह 2019 में कांग्रेस में शामिल हो गए। 2021 में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और पश्चिम बंगाल के बर्धमान-दुर्गापुर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करके फिर से लोकसभा में पहुंचे।

विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया
दोनों कामयाब और उतने ही विवादित पहलवान रहे, दोनों 2024 में कांग्रेस पार्टी में एक साथ शामिल हुए। इससे पहले उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया था। बृज भूषण भाजपा के नेता थे और उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। फोगाट ने जहां जुलाना निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करके हरियाणा में विधायक का पद संभाला तो पार्टी ने पूनिया को अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का प्रमुख नियुक्त किया।

विजेंदर सिंह
बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले इस मुक्केबाज ने 2019 में कांग्रेस के जरिए राजनीति में कदम रखा, लेकिन उसी साल दक्षिण दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए। बाद में 2024 में वह भाजपा में शामिल हो गए।

बाईचुंग भूटिया
भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान 2014 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन दार्जिलिंग से आम चुनाव हार गए। हालांकि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने वाम मोर्चा का समर्थन किया। बाद में उन्होंने अपनी खुद की पार्टी ‘हमारो सिक्किम’ बनाई, लेकिन चुनावों में कोई खास असर नहीं डाल पाए।

हरभजन सिंह
भारत के पूर्व स्पिनर दो विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे और उनके नाम 400 से ज्यादा टेस्ट विकेट दर्ज हैं। वह 2022 में आम आदमी पार्टी के साथ राजनीति में शामिल हुए। बाद में आपने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया।

चेतन चौहान
भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज खेल करियर के बाद भाजपा में शामिल हो गए। वह 1991 और 1998 में अमरोहा से सांसद रहे। लेकिन 1996, 1999 और 2004 में वे वहां से चुनाव हार गए। उन्होंने 2017 में राजनीति में वापसी की और नगावां सादात से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीता। चौहान का निधन 2020 में हो गया।

योगेश्वर दत्त
लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले दत्त 2019 में भाजपा में शामिल हुए और अब भी एक सक्रिय कार्यकर्ता हैं।

दिलीप टिर्की
भारत के पूर्व हॉकी कप्तान 2012 में बीजू जनता दल में शामिल हुए और उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया। लेकिन वह 2024 में सुंदरगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाए।

कल्याण चौबे
भारत के पूर्व फुटबॉलर और वर्तमान में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष 2015 में भाजपा के जरिए राजनीति में आए। 2019 के आम चुनावों में वह तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा से हार गए। वह 2021 और 2024 में बंगाल विधानसभा चुनाव भी हार गए।

ज्योतिर्मयी सिकदर
1998 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली यह दिग्गज एथलीट सीपीएम की ओर से 14वीं लोकसभा की सदस्य थीं। लेकिन 2009 के आम चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2019 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को अपना समर्थन देने की घोषणा की लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गईं।
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