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फुटबॉल के देश में बैट-बॉल की वापसी: कैसे इटली में जन्मा, दबा और फिर जिंदा हुआ क्रिकेट? 230 साल पुरानी है कहानी

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Tue, 10 Feb 2026 08:53 AM IST
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सार

इटली पहली बार पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप में पहुंचा है। फुटबॉल के लिए मशहूर देश में क्रिकेट का इतिहास 18वीं सदी तक जाता है, लेकिन मुसोलिनी शासन के दौरान खेल लगभग खत्म हो गया। 1980 के बाद शुरू हुई पुनर्बहाली, ICC मान्यता और प्रवासी खिलाड़ियों की बदौलत आज इटली वैश्विक मंच पर है। यह उपलब्धि अचानक नहीं, दशकों की मेहनत का परिणाम है।

From Mussolini to the World Cup: Italy 230-Year Cricket Comeback story, How Cricket Survived Politics
इटली में क्रिकेट कैसे लोकप्रिय हुआ - फोटो : Twitter/ IANS
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विस्तार

इटली आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप में भले ही पहली बार नजर आ रहा हो, लेकिन इस देश में क्रिकेट कोई नया खेल नहीं है। फुटबॉल भले ही आज इटली का जुनून हो, पर क्रिकेट की जड़ें यहां दो सौ साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। इटली में क्रिकेट नया नहीं है। आईसीसी के मुताबिक, इटली में क्रिकेट का पहला दर्ज मुकाबला 1793 में खेला गया था। उस समय ब्रिटिश नौसेना के नायक होराशियो नेल्सन ने नेपल्स के बंदरगाह पर अपने नाविकों के लिए मैच आयोजित कराया था। मकसद था कि जहाज किनारे खड़े रहने के दौरान नाविक व्यस्त रहें और किसी परेशानी में न पड़ें।
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यहीं से खेल की बुनियाद पड़ी। जो शुरुआत महज ब्रिटिश नाविकों के टाइमपास के रूप में हुई थी, वही धीरे-धीरे देश में इस खेल के बीज बो गई। समय के साथ क्रिकेट ने इटली की जमीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और अब हालात ऐसे हैं कि टीम वैश्विक मंच पर कदम रख चुकी है। इटली की टीम सोमवार को भले ही स्कॉटलैंड से हार गई हो, लेकिन उसने दम दिखाया। बल्लेबाजों और गेंदबाजों को देखकर लगा कि इनमें काबीलियत है।
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इटली बनाम स्कॉटलैंड - फोटो : IANS
बड़े इतालवी फुटबॉल क्लब की जड़ें भी क्रिकेट से जुड़ीं
दिलचस्प बात यह है कि इटली के कुछ सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों की जड़ें भी क्रिकेट से जुड़ी हैं। 1893 में ब्रिटिश दूतावास में जेनोआ क्रिकेट एंड एथलेटिक क्लब की स्थापना हुई। यह क्लब गर्मियों में क्रिकेट और सर्दियों में फुटबॉल खेलता था और आगे चलकर इटली का सबसे पुराना फुटबॉल क्लब बन गया। आज भी इसका आधिकारिक नाम जेनोआ क्रिकेट एंड फुटबॉल क्लब ही है। इसी तरह, एसी मिलान की स्थापना 1899 में मिलान फुटबॉल एंड क्रिकेट क्लब के रूप में हुई थी, जो बताता है कि उस समय देश में क्रिकेट कितना लोकप्रिय था।

फुटबॉल आगे निकल गया, मगर क्रिकेट पूरी तरह गायब नहीं हुआ, बस किनारों पर चला गया। इटली के दो और प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लबों का रिश्ता भी क्रिकेट से जुड़ा रहा है। इंटरनेशनल मिलानो, जिसे इंटर मिलान के नाम से ज्यादा जाना जाता है, 1908 में मिलान फुटबॉल एंड क्रिकेट क्लब के रूप में ही बना था। बाद में विदेशी खिलाड़ियों पर रोक लगाने के फैसले के विरोध के बाद अलग होकर नई पहचान बनाई गई। वहीं एएस रोमा तीन पुराने क्लबों के विलय से बना, जिनमें से एक ‘रोमन’ नाम का क्लब था, जो शुरुआती दिनों में क्रिकेट भी खेलता था।

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मुसोलिनी - फोटो : Twitter
इटली में 1922 के आसपास बदल गए क्रिकेट के हालात
क्रिकेट का शुरुआती विस्तार 19वीं सदी में भी जारी रहा। इस दौर में फ्रांसिस मैकेरोनी जैसे लोगों ने खेल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। अंग्रेज मूल के इस इतालवी कर्नल ने इटली में क्रिकेट को फैलाने के लिए खुद अपने हाथों से बल्ले और गेंद तक बना डाले। 1922 के आसपास हालात बदल गए। प्रथम विश्व युद्ध ने इटली की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया था। देश कर्ज, बेरोजगारी और सामाजिक असंतोष से जूझ रहा था। जब निर्वाचित लिबरल पार्टी की सरकार इन समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रही, तो बेनिटो मुसोलिनी की फासीवादी विचारधारा तेजी से उभरने लगी।

अक्तूबर 1922 में पार्टी के सत्ता में आते ही, जो ब्रिटिश प्रभाव से जुड़ा माना जाता था, क्रिकेट को गैर-इतालवी समझकर खारिज कर दिया गया। आक्रामक राष्ट्रवाद के दौर में इसे एक पतित और विदेशी सांस्कृतिक तत्व बताया गया और समाज से व्यवस्थित रूप से लगभग मिटा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि लंबे समय तक इटली से क्रिकेट लगभग गायब ही हो गया।

मुसोलिनी का दौर: विदेशी खेल पर ताला
1922 से 1943 के बीच बेनिटो मुसोलिनी के फासीवादी शासन ने क्रिकेट को ब्रिटिश और विदेशी खेल मानकर किनारे कर दिया। सरकार ने फुटबॉल को राष्ट्रीय एकता और प्रचार का हथियार बना दिया। पैसा, स्टेडियम, पहचान, सब कुछ वहां के फुटबॉल लीग 'सीरी ए' को मिला।

ब्रिटिश समुदाय, जो क्रिकेट को जिंदा रखे हुए था, राजनीतिक तनाव के बीच कम होता गया और खेल सार्वजनिक जीवन से लगभग गायब हो गया। करीब दो दशकों तक यह खेल हाशिये पर रहा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद धीरे-धीरे इसकी वापसी शुरू हुई, लेकिन बहुत छोटे स्तर पर, और इसे मुख्य रूप से प्रवासी समुदायों द्वारा ही खेला जाता था। इसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। 2023 में मोनफाल्कोने शहर में क्रिकेट को अन-इटैलियन बताकर बैन तक कर दिया गया था।

रोम एशेज: क्रिकेट के पुनरुत्थान की तरफ छोटा कदम
1960 के दशक में क्रिकेट को रोम में एक अनपेक्षित ठिकाना मिला। विला डोरिया पाम्फिली के खूबसूरत मैदान पर यह खेल खूब फला-फूला, जहां से सेंट पीटर के गुंबद का नजारा भी दिखाई देता था। यहां ऑस्ट्रेलियाई और ब्रिटिश दूतावासों की टीमें, संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (FAO), कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स एसोसिएशन, वेनेरेबल इंग्लिश कॉलेज और बेडा कॉलेज की टीमें आपस में जोरदार मुकाबले खेलती थीं। इन मैचों को वे 'रोम एशेज' कहा करते थे। इस दौर के तुरंत बाद देशभर में नए क्लब बनने लगे। रोम में डोरिया पाम्फिली क्रिकेट क्लब से लेकर उत्तर इटली में उभरती टीमों तक, 1970 के दशक में मिलान क्रिकेट क्लब और 1980 के दशक में यूराटॉम सीसी जैसे नाम सामने आए। धीरे-धीरे क्रिकेट ने फिर से अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दीं।

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इटली की टीम - फोटो : ICC
वापसी की राह: 45 साल की मेहनत
आधुनिक दौर में असली पुनर्जागरण 1980 में फेडरेशन बनने के बाद शुरू हुआ। 1995 में आईसीसी एसोसिएट सदस्यता मिली। इटालियन ओलंपिक कमेटी से मान्यता मिलने के बाद सरकारी मदद का रास्ता खुला।आज देश में करीब 4,000 रजिस्टर्ड पुरुष क्रिकेट खिलाड़ी हैं और लगभग 80 क्लब दो-स्तरीय ढांचे में खेल रहे हैं। टीम में हेरिटेज प्लेयर्स, प्रवासी और दूसरी-तीसरी पीढ़ी के क्रिकेटर शामिल हैं। फेडरेशन के सीईओ लुका ब्रूनो मलास्पिना ने कहा, 'सिर्फ यहां पहुंचना और खेलना ही 45 साल की मेहनत का नतीजा है।'

इटली के क्रिकेट इतिहास में उतार-चढ़ाव का दौर रहा
इटली के क्रिकेट में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर आया। 1997 में आईसीसी ट्रॉफी में डेब्यू करते हुए टीम 22 में संयुक्त रूप से आखिरी स्थान पर रही, लेकिन महज एक साल बाद उन्होंने इंग्लैंड इलेवन को प्रमोशन/रिलिगेशन प्लेऑफ में हराकर क्रिकेट जगत को चौंका दिया। 2000 के दशक की शुरुआत में इटली ने अलग-अलग डिवीजनों, रेलिगेशन और वापसी के कई दौर देखे। 2002 यूरोपीय चैंपियनशिप में छठे स्थान पर रहने के बाद 2004 में टीम डिवीजन टू में पहुंची और 2005 की आईसीसी ट्रॉफी के लिए रेपेशाज टूर्नामेंट में जगह बनाई। वहां जाम्बिया को हराकर इटली ने आखिरकार सातवां स्थान हासिल किया।

वर्ल्ड क्रिकेट लीग में उनका सफर भी कुछ ऐसा ही रहा। 2006 में डिवीजन वन में पांचवें स्थान पर रहने के बाद 2007 में फिजी को हराकर डिवीजन थ्री में आए। 2008 में डिवीजन फोर में तीसरा स्थान मिला, जबकि 2010 में दूसरा स्थान हासिल कर 2011 में फिर डिवीजन थ्री में वापसी की। टीम 2013 तक वहां बनी रही, लेकिन लगातार हार के बाद 2014 में एक बार फिर रेलिगेशन का सामना करना पड़ा।

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इटली और स्कॉटलैंड की टीमें - फोटो : IANS
2013 में आईसीसी वर्ल्ड टी20 क्वालिफायर में जगह बनाई
हालांकि मुश्किलों के बीच टीम का जज्बा हमेशा कायम रहा। नवंबर 2013 में इटली ने अपने इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर खेलते हुए आईसीसी वर्ल्ड टी20 क्वालिफायर में जगह बनाई। वहां अमेरिका, यूएई और नामीबिया जैसी टीमों पर जीत दर्ज कर उन्होंने सबका ध्यान खींचा। 2018 में आईसीसी ने सभी सदस्य देशों को पूर्ण टी20आई का दर्जा दे दिया, जिसके बाद इटली की रफ्तार और बढ़ी। उसी साल टीम ने यूरोप क्वालिफायर के रीजनल फाइनल्स में जगह बनाई।

मई 2019 में इटली ने अपना पहला आधिकारिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला और यूट्रेख्ट में जर्मनी को सात विकेट से हराकर यादगार जीत दर्ज की। 2023 तक आते-आते ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में आधारित, लेकिन इतालवी पासपोर्ट रखने वाले खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने की रणनीति रंग लाने लगी। इस नीति ने टीम की ताकत बढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इटली की प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दी।

मुश्किलें अभी बाकी हैं
इटली के पास अब भी बड़े स्तर की पक्की क्रिकेट सुविधाएं नहीं हैं। 'होम' इंटरनेशनल मैच अक्सर इंग्लैंड या नीदरलैंड में कराने पड़ते हैं। हालांकि टर्फ पिच, प्रोफेशनल लीग ढांचा और स्कूलों में क्रिकेट शुरू करने की योजनाएं चल रही हैं। 2027 तक प्रस्तावित यूरोपीय टी20 लीग में इटालियन फ्रेंचाइजी की बातचीत भी जारी है। यानी अब नजर टिके रहने की है, सिर्फ पहुंचने की नहीं।

वर्ल्ड कप: मौजूदगी ही जीत
भारत और श्रीलंका में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में इटली ग्रुप सी में स्कॉटलैंड, नेपाल, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ है। उलटफेर होगा तो इतिहास बन जाएगा, लेकिन असली कहानी पहले ही लिखी जा चुकी है।सहायक कोच केविन ओ’ब्रायन, जिन्होंने 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ आयरलैंड की ऐतिहासिक जीत में कमाल किया था, कहते हैं, 'उम्मीद है कि वे हमारी कहानी से प्रेरणा लेंगे।'

क्यों खास है यह सफर?
जब अगली बार इटली को क्रिकेट वर्ल्ड कप में देखें, तो यह मत सोचिए कि वे यहां गलती से आ गए हैं। यह 200 साल से ज्यादा पुरानी यात्रा है, जिसे राजनीति ने रोका, पहचान ने दबाया, लेकिन जुनून ने वापस खड़ा कर दिया।
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