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पाकिस्तान का बहाना: खेल को सियासत से दूर रखने की बात, पर भारत के नाम पर राजनीति! PM शहबाज का दोहरा चेहरा उजागर

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लाहौर Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 05 Feb 2026 08:50 AM IST
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सार

पाकिस्तान सरकार और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि भारत के खिलाफ क्रिकेट भी पाकिस्तान के लिए सियासत का औजार बन जाता है। मंच से यह कहना कि खेल में राजनीति नहीं होनी चाहिए और उसी सांस में राजनीतिक बहिष्कार का एलान करना, साफ तौर पर दोहरे चरित्र को दर्शाता है। आईसीसी की नाराजगी और क्रिकेट प्रशंसकों की निराशा बताती है कि इस फैसले का नुकसान सिर्फ खेल को ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट को भी लंबे समय तक भुगतना पड़ सकता है।

Pakistan’s Excuse: Politics Kept Out of Sports? India-Centric Politics Expose Shehbaz Sharif’s Double Standard
खेल पर ज्ञान, फैसलों में राजनीति: शहबाज शरीफ की दोहरी नीति बेनकाब - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार मैदान से ज्यादा राजनीति सुर्खियों में है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के खिलाफ मुकाबले के बहिष्कार पर चुप्पी तोड़ी है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ वे कहते हैं कि खेल में राजनीति नहीं होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ उनका फैसला पूरी तरह राजनीतिक नजर आता है।

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भारत के खिलाफ खेलने से इनकार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संघीय कैबिनेट को संबोधित करते हुए साफ कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच नहीं खेलने का स्पष्ट फैसला लिया है। उन्होंने कहा, 'हमने टी20 वर्ल्ड कप को लेकर अपना रुख साफ कर लिया है कि हम भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेंगे।' शहबाज शरीफ के मुताबिक यह फैसला सोच-समझकर और उचित आकलन के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा, 'हमें बांग्लादेश के समर्थन में स्टैंड लेना चाहिए और मैं समझता हूं यह सही फैसला है।' भारत-पाकिस्तान मुकाबला 15 फरवरी को श्रीलंका में होना तय था।

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‘खेल में सियासत नहीं’, लेकिन खुद सियासी फैसला
अपने बयान में शहबाज शरीफ ने यह भी कहा, 'खेल में राजनीति नहीं होनी चाहिए।' यहीं से उनका दोहरा चरित्र सामने आता है। अगर खेल में सियासत नहीं होनी चाहिए, तो फिर सरकार द्वारा मैच का बहिष्कार का एलान क्यों किया गया है? इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि पाकिस्तानी टीम भारत के खिलाफ मैदान पर नहीं उतरेगी, लेकिन इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया गया।
 

ICC की सख्त प्रतिक्रिया
पाकिस्तान सरकार के फैसले के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने कड़ा रुख अपनाया था। आईसीसी ने साफ कहा कि चयनात्मक भागीदारी किसी वैश्विक खेल आयोजन की बुनियादी भावना के खिलाफ है। आईसीसी ने कहा कि सभी योग्य टीमों से समान शर्तों पर खेलने की उम्मीद की जाती है और इस तरह के फैसले खेल की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं।

बांग्लादेश मामला और पाकिस्तान की भूमिका
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में बांग्लादेश का मामला भी अहम है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश ने भारत में खेलने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद आईसीसी ने उसे बाहर कर स्कॉटलैंड को मौका दिया। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री और पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात भी की थी।

मैदान में भारत का दबदबा
अगर क्रिकेट रिकॉर्ड देखें तो पाकिस्तान का भारत के खिलाफ आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक आठ मुकाबले हुए हैं, जिनमें भारत ने सात जीते हैं। पिछले एशिया कप में भी भारत ने पाकिस्तान को क्लीन स्वीप किया था, जहां युवा भारतीय बल्लेबाजों ने पाकिस्तानी गेंदबाजी की जमकर पोल खोली। भारत से हार के डर को पाकिस्तान अलग अलग नाम दे रहा है। पर शहबाज शरीफ की दोहरी नीति बेनकाब हो गई है। एक तरफ खेल पर ज्ञान दे रहे हैं और वहीं, दूसरी तरफ उनके फैसलों में राजनीति भी झलक रही है। हालांकि, गरीबी की मार झेल रहा पड़ोसी मुल्क यह भूल गया कि आईसीसी का हंटर चला तो पीसीबी की स्थिति बद से बदतर हो सकती है।

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